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बच्चे ने बनाई कैसर जांचने की सस्ती प्रणाली Cancer

जैक को अपने शोध की पुष्टि करवाने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी अमरीका के मेरीलैंड में रहने वाले 15 साल के छात्र जैक एंद्राका के शौक बिल्कुल वैसे हैं जैसा उनकी उम्र के स्कूली छात्रों का होता है. जैक को कयाक और टीवी शो देखना काफी पसंद है और खाली वक्त में उन्हें दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित कैंसर लैबोरेट्री में शोध करना भी पसंद है. जैक ने कैंसर की जाँच की एक प्रणाली विकसित की है. उनका दावा है कि उन्होंने पैनक्रियास के कैंसर की जांच करने वाली जो टेस्ट प्रणाली को तैयार किया है वो अब तक की सभी जांच प्रणालियों से 168 गुना तेज़ और करीब 1000 गुना सस्ता और 400 गुना ज्यादा असरदार है. उनका कहना है कि इस टेस्ट की कम कीमत से अस्पतालों में इसकी उपलब्धता तो बढ़ेगी ही, गरीब और कम आय वाले मरीज़ भी इसका इस्तेमाल कर पाएंगे. जैक अब अपने शोधकार्य को अमरीकी शहर बाल्टीमोर के हॉकिंस विश्वविद्यालय में पूरा कर रहे हैं. गूगल की मदद से जैक के अनुसार इस शोध में गूगल से भी काफ़ी ...

जानिए मां बनने का गणित To be a mother

आजकल यह जानना जितना आसान है कि क्या मैं गर्भवती हूं या नहीं ठीक उतना ही यह जानना भी आसान हो गया कि मां बनने के लिए सबसे अच्छा समय य दिन कौन सा है। बेस्ट फर्टिलिटी डेट चेक करने के लिए खास स्ट्रिप्स यूज कर सकती हैं। ये स्ट्रिप्स ल्यूटेनाइजिंग हार्मोन का लेवल चेक कर बताती हैं कि कंसीव करने के लिए आपकी बॉडी कब सबसे ज्यादा रिसेप्टिव है। किसी भी महिला की बॉडी मंथ में चार दिन सबसे ज्यादा रिसेप्टिव होती है और इन्हीं दिनों में फीमेल बॉडी में ऑव्यूलेशन भी होता है। इस दौरान एक ओवरी में 15-20 एग्स मैच्योर होते हैं और इनमें से सबसे बड़े साइज के एग को मसल्स फैलोपियन ट्यूब में शिफ्ट करती हैं। यानी ऑव्यूलेशन में ओवरीज में से एग्स रिलीज होते हैं। यह एग 12 से 24 घंटे तक एक्टिव रहता है। इस पीरियड में अगर हेल्दी स्पर्म और एग मिल जाएं, तो प्रेग्नेंसी हो जाती है। गौरतलब है कि एक हेल्दी स्पर्म फीमेल बॉडी में करीब 7 दिनों तक एक्टिव रहता है। इसका मतलब हुआ कि प्रेग्नेंट होने के लिए आपको यह पता होना चाहिए कि आपकी बॉड...

बेटे की अंतिम इच्छा के लिए पिता ने श्मशान में काटा केक

4 बेटों की मौत, अंतिम इच्छा के लिए पिता ने श्मशान में काटा केक…! धवल पटेल, सूरत। गुजरात, बर्थडे मनाने गोवा पहुचें शहर के चार युवकों सहित ड्राईवर की गुरुवार को भीषण सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई। दुर्घटना अगासियम बायपास हाईवे के नजदीक हुई। चारों युवक प्राईवेट टैक्सी से बायपास से गुजर रहे थे, तभी दूसरी तरफ से आ रही टाटा मोबाइल कार से भिड़ंत हो गई। टैक्सी में सवार सूरत के चार युवकों सहित ड्राईवर की मौत हो गई। जबकि टाटा मोबाइल काड्राईवर गंभीर रूप से घायल है।चारों युवकों की उम्र 22 से 23 वर्ष के बीच थी और ये एक दोस्त का बर्थडे सेलीब्रेट करने गोवा पहुंचे थे। मृतकों की पहचान सिद्धार्थ सुराणा, रौनक गोती, गौरव तातेड, रोहित जैन और ड्राईवर जहीर अब्बास के रूप में हुई है।सूरत के ये चारों युवक टेक्सटाइल के बिजनेस से जुड़े हुए थे। गुरुवार को शहर के कापड बाजार में इन युवाओं कीमौत के समाचार से मातम पसर गया।रोहित का 16 अगस्त को जन्मदिन था। इसलिए दोस्त रोहित का बर्थडे सेलीब्रेट करने गोवा गए थे। परिजनों ने भी खुशी-खुशी इसकी सहमति दे दी थी। लेकिन जन्मदिन से पहले ही रोहित को...

डॉ.भावना श्रीवास्तव की एक यादगार भेंट Wife

डॉ.भावना श्रीवास्तव   की एक यादगार भेंट , जो औरत की हक़ीक़त को और उसके मुक़द्दस जज़्बात को सामने लाती है- पत्नी   माँ  भी    है.         माँ , पुत्री, बहिन, पत्नी, गुरु, मित्र,देवी अदि अनेक रूपों में नारी की पूजा करने वाले संस्कार भारत में ही हैं भारत के आलावा किसी और देश में नहीं . पाश्चात्य संस्कृति के अनुसार - विवाह के उपरांत बच्चा हो या नहीं ये आवश्यक नहीं. वहां विवाह एक एक से ज्यादा बार भी किये जा सकते हैं. तलाक लेकर विवाह तोड़ कर किसी अन्य से विवाह कर लिया या विधवा होने पर विवाह कर लिया. यद्यपि भारत में भी यह संस्कृति आ गयी है. पर भारत में मूल रूप से नारी को पुरुष की 'संगिनी' और अर्धांगिनी के रूप में ही स्वीकार किया जाता रहा है है. दोनों का रिश्ता एक दुसरे का सहयोगी और एक दुसरे के कार्यों की प्रशंसा , सराहना करने वाला माना गया है.       भारत के महानगरों में रहने वाले और माँ का समर्थन जीतने अपने को चरित्रवान बताने वाले ऊपर से बाह्य दिखावा मात्र करने वाले पति यह कहते पाए जाते हैं-- "हम पत्नियां तो कई पा सक...

विवाह पूर्व यौन सम्बंध की त्रासदी

बुद्धिजीवी का काम विचार करना होता है। एक बुद्धिजीवी ने अपने साथ काम करने वाली महिला को बड़ी उम्र तक कुंवारा देखा तो उन्होंने यह विचार किया कि आखि़र एक लड़की अविवाहित रहते हुए किसी पुरूष से यौन सम्बंध बना ले तो इसमें हर्ज ही क्या है ? इंसान के अंदर बुद्धि के साथ एक चीज़ मन भी होती है। मन में विचार आते ही रहते हैं। इनमें से हरेक विचार का पालन नहीं किया जा सकता क्योंकि इंसान के अंदर विवेक भी होता है। औरत और मर्द का आपसी ताल्लुक़ एक अनोखी लज़्ज़त देखा है। यह सही है। यह लज़्ज़त सबको नसीब हो, यह सोचना भी ग़लत नहीं है लेकिन इंसान को जानवर के स्तर पर उतार देना ठीक नहीं है। इंसान का विवेक जानवर से ज़्यादा विकसित होता है। इसीलिए वह सही और ग़लत की तमीज़ भी जानवरों से ज़्यादा रखता है। सही-ग़लत की यह तमीज़ ज़मीन के हरेक हिस्से में और हरेक इंसान में पाई जाती है। पूर्व हो या पश्चिम, उत्तर हो या दक्षिण, देश हो या विदेश, औरत और मर्द के लिए यौन संबंध की व्यवस्था के लिए निकाह और विवाह की एक रस्म को अदा करना सभी जगह ज़रूरी समझा जाता है। इसके ज़रिये मस्ती के साथ हस्ती की ज़िम्मेदारी को भी बांटा जाता है। सेक्स में मज़ा भ...

माँ देती बुलंदी की राह उसके रहमों-करम से .

माँ देती बुलंदी की राह उसके रहमों-करम से .      मिलती है हमको माँ  उसके रहमों-करम से   ; मिलती है माँ की गोद उसके रहमों-करम से . अहकाम में माँ के छिपी औलाद की नेकी ; ममता की मिलती छाँव उसके रहमों-करम से . तालीम दे जीने के वो काबिल है बनाती ; माँ करती राहनुमाई उसके रहमों-करम से . औलाद की ख्वाहिश को वो देती  है  तवज्जह ;  माँ दिलकुशा मोहसिन उसके रहमों-करम से . कुर्बानियां देती सदा औलाद की खातिर ; माँ करती परवरिश है उसके रहमों-करम से . तसव्वुर 'शालिनी' के अब भर रहे परवाज़ ; माँ देती बुलंदी की राह उसके रहमों-करम से .                                            शालिनी कौशिक                                                       [कौशल ] अहकाम -हुकुम ,राहनुमाई -पथप्रदर्शन ,दिलकुशा -बड़े दिलवाला...

एक आवाज़ बीमार भ्रूण हत्या के खि़लाफ़

प्यारी बेटी अनम की याद में, जो जन्नत का फूल बन गई है. अनम हमारी बेटी का नाम है, जो कि 24 जून 2010 को पैदा हुई और सिर्फ़ 28 दिन हमारे पास रहकर 22 जुलाई 2010 को इस दुनिया से चली गई। वह ‘स्पाइना बायफ़िडा‘ की बीमारी से जूझ रही थी। उसकी बीमारी का पता डाक्टर मीनाक्षी राना ने उसकी पैदाइश से पहले ही लगा लिया था। अनम, जब 7 माह का एक भ्रूण ही थी, तभी डाक्टर ने यह सलाह दी थी कि इसे टर्मिनेट करा दीजिए क्योंकि इसकी रीढ़ की हड्डी ठीक नहीं है। इस भ्रूण की कमर पर एक ज़ख्म है। इसका असर इसके पैरों पर आएगा और इसके सिर की हड्डियों में भी कमी है। डाक्टर मीनाक्षी राना की जगह कोई दूसरा डाक्टर होता तो वह भी यही सलाह देता क्योंकि मेडिकल वर्ल्ड के माहिरों ने यही सही ठहराया है। एक सवाल तो यही है कि सही और ग़लत ठहराने का अधिकार उन्हें किसने दिया ? दूसरा सवाल यह है कि क्या बीमार भ्रूणों को टर्मिनेट कर देने का उनका फ़ैसला ठीक होता है ? पैदा होने के बाद जो लोग बीमार और ज़ख्मी हो जाते हैं या जिंदगी भर के लिए विकलांग हो जाते हैं, क्या उन्हें दुनिया से ‘टर्मिनेट‘ कर दिया जाता है ? अगर एक मुकम्मल इंसान अपाहिज होने के बावज...