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Showing posts with the label 'जीवन शैली'

बूढ़े लोगों की समस्याएं बन गई हैं अब नाम चमकाने का ज़रिया

बूढ़े माँ बाप और लाचार इंसान हिंदी ब्लॉग जगत की चिंता का विषय हमेशा से हैं। 'प्यारी माँ' ब्लॉग हिंदी ब्लॉग जगत का पहला सामूहिक प्रयास है । इसके बाद दो चार और ब्लॉग भी इसी चिंता को लेकर खड़े हुए हैं और अब यह चिंता उन ब्लॉग्स पर भी देखी जा रही है , जो कि अब तक इस तरह के मुददों से कोई सरोकार ही नहीं रखते थे या फिर कम रखते थे। यह एक अच्छा लक्षण है लेकिन संकीर्णता और पक्षपात का आलम यह है कि किसी ने भी 'प्यारी माँ' ब्लॉग के रचनात्मक आंदोलन का जिक्र तक अपनी पोस्ट में न किया । हरेक अपने आप को ऐसे जाहिर कर रहा है जैसे कि इस मुददे को चर्चा मात्र उसके लेखन के कारण मिल रही है । यह एक ग़लत ट्रेंड है । वृद्धों के प्रति उपेक्षा एक गंभीर सामाजिक समस्या है। इसे महज़ क़ानून और क़ानूचियों के बल पर हल नहीं किया जा सकता । ब्लॉग पर विचार विमर्श किया जा सकता है लेकिन इसे हल करने के लिए हमें हक़ीक़त की दुनिया में काम करना होगा और सबको मिलकर करना होगा। जो लोग सबके साथ मिलकर सोचने तक के लिए तैयार नहीं हैं , वे इस समस्या पर लिख कर ख़ुद को मानवीयता के गुण के आवरण में लिपटा हुआ सा तो दिखा सकते हैं लेकिन ...

चिंताएं दूर करता है मां का प्यार

आज आपको एक ख़बर भी देंगे और एक ऐसी वेबसाइट से भी परिचित कराएंगे जो कि बहुत सी ऐसी जानकारियां अपने दामन में समेटे हुए है जो कि सभी औरतों के लिए और ख़ास तौर पर एक मां के लिए बहुत ज़रूरी हैं। ख़बर के नीचे दिये गये लिंक पर जाकर आप उस वेबसाइट को देख सकते हैं।  लंदन। यदि आपको लगता है कि मां का प्यार सिर्फ बच्चे को बिगड़ता है, तो आप गलत हैं। एक नए अध्ययन में कहा गया है कि मां का प्यार बच्चे को भविष्य में तनाव और चिंताओं से निपटने में बहुत मददगार साबित होता है। ब्रिटिश अखबार डेली मेल के अनुसार, शोधकर्ताओं ने पाया है कि बच्चों को मां का खूब प्यार मिलता है, वे जीवन में आगे चलकर अपने निजी संबंधों में सुरक्षा की भावना महसूस करते हैं। मां के साथ जिन बच्चों के संबंध प्रगाढ़ होते हैं, वे जीवन की मुश्किलों से बेहतर ढंग से निपट पाते हैं। नॉर्थ कैरोलीना स्थित ड्यूक यूनिवर्सिटी की डॉ. जोआन्ना मासेल्को और उनकी टीम ने यह अध्ययन किया है। उन्होंने अमेरिका के रोड्स आइलैंड में पिछली सदी के छठे दशक में किए गए एक अध्ययन को अपना आधार बनाया। इस अध्ययन में आठ महीने के 1000 बच्चों और उनकी माताओं के संबंधों...

मेरे पास माँ है - M. Afsar Khan

माँ   एक   कोमल   एहसास ,  माँ   ज़िन्दगी   की   ख्वाब ,  माँ   दुनिया   की सबसे   बड़ी   नेमत । इन   मुर्गी   के   बच्चों   को   जरा   गौर   से   देखिये ... अपनी   माँ   से   कैसे   लिपटे   हुए   हैं ।  और   इस   माँ   ने   अपने   बच्चों   को   कैसे अपने   ऊपर , अपने  परों   में   छिपा   रक्खा   है । यही   है   माँ   का   अनूठा   प्यार । सरे जहाँ की नेमतों में सबसे बड़ी नेमत है माँ का प्यार, इसी लिए लोग कहते हैं कि  मेरे   पास   माँ   है ,  माँ ...  मुनव्वर   राना   के   शब्दों   में ... जब   भी   कश्ती   मेरी   सैलाब   में   आ   जाती   है , माँ   दुआ   करती   हुई    ख्वाब   में   आ जाती   है । मुसीबत   के   दिनों ...

रिश्तों से रिसता दर्द, रविवार डॉट कॉम में सारदा लहांगीर

प्रतीक हेतु चित्र गूगल से साभार, संपादक   मुझे पता है, मेरे दिन अब गिनती के रह गए हैं, मुझे कुछ नहीं चाहिए, मौत आने से पहले कोई मुझे मेरे बेटे से मिलवा दे। यह व्यथा है, एक बेबस मां की, जिसे कैंसर ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। सुंदरगढ़ जिले के लाहुनीपाड़ा की 32 बरस की नीता को 2008 में जब कैंसर से पीड़ित पाया गया, तब तक यह नासूर उसके शरीर में काफी फैल चुका था और जब उसके पति धनराज को पता चला कि उसका रोग लाइलाज हो गया है, तो उसने नीता को बेसहारा छोड़ दिया। वह अपने साथ अपने बेटे को तो ले गया, लेकिन बेटी को नीता के भरोसे छोड़ दिया। 2008 से नीता अपने बेटे से नहीं मिल सकी है। 2010 में जब उसकी हालत बिगड़ने लगी, तो उसके माता-पिता को खबर की गई, वे आए भी, लेकिन वे कर भी क्या सकते थे। असल में जब डॉक्टरों ने बताया कि नीता की जिंदगी के कुछ महीने ही रह गए हैं, तभी धनराज ने उसे छोड़ दिया। पता चला है कि वह छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में कहीं रह रहा है। नीता उड़ीसा में कैंसर की अकेली मरीज नहीं, जिसे उसके परिवार ने बेबस छोड़ दिया हो। पुरी की 24 बरस की रस्मिता दास की कहानी भी नीता जैसी ही है...

निजी अस्पताल और नर्सिंग होम संचालकों ने धन कमाने के लालच में 226 महिलाओं के यूटेरस निकाले

राजस्थान के एक स्वयंसेवी संगठन का आरोप है कि दौसा जिले के बांदीकुई में संचालित पांच निजी अस्पतालों और नर्सिग होम संचालकों ने 226 महिलाओं की बच्चेदानी निकाल दी, जबकि चिकित्सकों का कहना है कि इसमें सिजेरियन प्रसव, बच्चेदानी सम्बंधी बीमारियों का उपचार भी शामिल है। स्वयंसेवी संगठन के प्रतिनिधि दुर्गा प्रसाद ने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के हवाले से कहा कि बांदीकुई के पांच में से तीन निजी नर्सिंग होम और अस्पताल के चिकित्सकों ने मार्च 2010 से सितम्बर 2010 तक अस्पताल पहुंचीं 385 महिलाओं में से दो सौ छब्बीस महिलाओं की बच्चेदानी निकाली। जिन महिलाओं की बच्चेदानी निकाली गई है, वे सभी गुर्जर और माली जाति की हैं। दौसा के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ओ पी मीणा ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। बांदीकुई के जिन पांच निजी अस्पताल और नर्सिंग होम की बात की जा रही है, उनके एक साल के रिकार्ड जब्त कर लिये गये है। महिलाओं का ऑपरेशन करने वाले सर्जन, चिकित्सकों, संचालकों एवं महिला रोगियों के बयान लिये जा रहे है। निजी अस्पताल और नर्सिंग होम चिकित्सक डा रमेश धाकड़ और डा सुनिल कट्टा ने एनजीओ...