डॉ.भावना श्रीवास्तव की एक यादगार भेंट Wife

Posted on
  • Wednesday, August 15, 2012
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
  • in
  • डॉ.भावना श्रीवास्तव  की एक यादगार भेंट , जो औरत की हक़ीक़त को और उसके मुक़द्दस जज़्बात को सामने लाती है-


    पत्नी  माँ भी   है. 


           माँ , पुत्री, बहिन, पत्नी, गुरु, मित्र,देवी अदि अनेक रूपों में नारी की पूजा करने वाले संस्कार भारत में ही हैं भारत के आलावा किसी और देश में नहीं . पाश्चात्य संस्कृति के अनुसार - विवाह के उपरांत बच्चा हो या नहीं ये आवश्यक नहीं. वहां विवाह एक एक से ज्यादा बार भी किये जा सकते हैं. तलाक लेकर विवाह तोड़ कर किसी अन्य से विवाह कर लिया या विधवा होने पर विवाह कर लिया. यद्यपि भारत में भी यह संस्कृति आ गयी है. पर भारत में मूल रूप से नारी को पुरुष की 'संगिनी' और अर्धांगिनी के रूप में ही स्वीकार किया जाता रहा है है. दोनों का रिश्ता एक दुसरे का सहयोगी और एक दुसरे के कार्यों की प्रशंसा , सराहना करने वाला माना गया है.
          भारत के महानगरों में रहने वाले और माँ का समर्थन जीतने अपने को चरित्रवान बताने वाले ऊपर से बाह्य दिखावा मात्र करने वाले पति यह कहते पाए जाते हैं-- "हम पत्नियां तो कई पा सकते हैं परन्तु माँ एक ही होती है" बिना ये सोचे कि उसकी पत्नी क़ी भी तो कोई माँ है जिसने उसे जन्म दिया है . आखिर वो क्यों नहीं कहती क़ी मुझे पति तो कई मिल सकते हैं पर पिता तो एक ही होता है.

            हर शब्द तोल मोल के बोलना चाहिए . हर कथन को अपने ऊपर लागु करके देखने से पहले जो भी शब्द मुंह में आये बोल देना वेसा ही है जेसे अँधेरे में बिना निशाना लगाये तीर छोड़ देना. अगर ऐसे पतियों को जिनको विवाह का मतलब नहीं मालूम है उन्हें सामाजिक रूप से विवाह करने कि अनुमति ही नहीं देना चाहिए. ऐसे लोग तो चोरी छुपे काम वासना पूरी कहीं भी करते रहते हैं. उनके लिए पत्नी सिर्फ भोग क़ी वास्तु रहती है.जो अपनी जिंदगी अकेलेपन और अपमान की आग में असमय ख़त्म कर देती है . 
            जब तक सच्चा प्रेम नहीं हो विवाह बंधन में नहीं बंधना चाहिए. पढाई लिखाई का महत्व प्रेम से कम होता है. संत कबीर दस जी भी कह गए हैं- पोथी पढ़ पढ़ जड़ मुआ पंडित भय न कोई , ढाई अक्षर 'प्रेम' का पढ़े सो पंडित होय .. जो तथाकथित किताबों के अध्ययन में मग्न अपने अंदर के प्रेम को प्रकट करने में असमर्थ हैं वो विद्वान नहीं कहला सकते.
            सच्ची चाहत ये नहीं देखती कि पत्नी मोटी है या दुबली? काली है या गोरी? अमीर घर से है या गरीब? ज्यादा पढ़ी लिखी है या कम ? चाहत सिर्फ दिल से होती है. पाश्चात्य सभ्यता का अनुसरण करने वालियों का साथ तभी तक लोग पसंद करते हैं जब तक वे जवान हो . जवानी ढलते ही उनका शारीरिक आकर्षण समाप्त हो जाता है .पत्नी से आकर्षण नहीं सच्चा प्रेम होता है यह शाश्वत आत्मिक प्रेम, स्नेह का बंधन है जो तो सभी को चाहिए इस बंधन मे तो स्वयं भगवान् भी बंधना चाहते हैं. बिना स्नेह के बंधन में बंधे जिंदगी कभी सफल नहीं हो सकती.
     जो पति ये कहते है माँ एक बार मिलती है पत्नियां कई बार वो ये क्यों नहीं सोचते कि उनकी पत्नी सिर्फ उनकी पत्नी ही नहीं है उनके बच्चे क़ी माँ भी है. उनके बच्चों का भविष्य है, उनकी पहली पाठशाला हैं. उसे पुत्री, बहिन, मित्र, प्रेमिका , पत्नी आदि के पात्र निभाने के साथ साथ माँ भी समझना चाहिए.
            बंगाल में तो हर रिश्ते के साथ 'माँ' शब्द का जोड़ते हैं जेसे- भाभी माँ, पीसी माँ, माशी माँ, बेटी माँ, बहु माँ, ..ऐसे कितने ही उदहारण हैं जिसमे पति अपनी पत्नी को ही माँ बुलाते थे. भगवान् राम कृष्ण परमहंस अपनी पत्नी में माँ शारदा को देवी माँ , जगद जननी शारदा कहकर उन पर फूल पुष्प चढाते थे.
    मराठी में कहावत भी है --- क्षण मात्रे पत्नी जीवन पर्यन्ते माँ. किसी भी नारी के लिए पत्नी का पात्र कुछ समय के लिए होताहै बाकि समय तो वह माँ क़ी ममता और करुना से ही ओतप्रोत होकर पति और परिवार क़ी सेवा करती है. इसलिए उसे क्षण मात्र की पत्नी और जीवन भर के लिए माँ भी कहा जाता है.
    Source : http://shribhav.blogspot.in/2012/08/blog-post_11.html

    2 comments:

    रविकर फैजाबादी said...

    इस प्रस्तुत आख्यान में, बड़े सटीक प्रहार |
    पुरुष अहम् को लग रही, यथा उचित फटकार |
    यथा उचित फटकार, फर्क कथनी करनी में |
    भारत नारी श्रेष्ठ, नहीं ऐसी धरनी में |
    पति पत्नी में प्यार, वर्ष चाहे हों तीखे |
    बीस वर्ष के बाद, एक सा मुखड़ा दीखे ||

    HAKEEM YUNUS KHAN said...

    Nice post.

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • मर्द की एक हकीकत - *[image: Hand writing I Love Me with red marker on transparent wipe board. - stock photo][image: Selfish business man not giving information to others.Mad...
    • एकाकी मोरनी - बाट निहारूँ कब तक अपना जीवन वारूँ आ जाओ प्रिय तुम पर अपना सर्वस हारूँ सूरज डूबा दूर क्षितिज तक हुआ अंधेरा घिरी घटाएं रिमझिम बरसें टूटे जियरा ...
    • क्या दीवाली लक्ष्मी जयन्ती है? - एक मान्यता के अनुसार दीपावली ‘लक्ष्मी जयन्ती’ अर्थात् लक्ष्मी के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। निश्चित ही यह कल्पना अर्वाचीन है, क्योंकि प्राचीन देवताओं...
    • दीवाली इस वर्ष - [image: Happy Diwali and swachchhata abhiyan - pics के लिए चित्र परिणाम] जब ज्योति जली विष्णुप्रिया के मंदिर में तम घटा घर के हर कोने का जगमग मन मंदिर हु...
    • अपनी बचा लूं और दूसरे की रीत दूँ - पहली बार अमेरिका 2007 में जाना हुआ था। केलिफोर्निया में रेड-वुड नामक पेड़ का घना जंगल है। हम मीलों-मील चलते रहे लेकिन जंगल का ओर-छोर नहीं मिला। इस जंगल में...
    • हुनर - *समेट लेना खुद को , अपने दायरे में * *सिखा देता है ये हुनर , वक़्त आहिस्ता आहिस्ता !!* *सु-मन *
    • We never can change our history - Dr Sharad Singh - *Dr Sharad Singh, * *Author & Historian**Thought of the Day* *History give us a chance to change ourselves but we never can change our history.* *- Dr Shar...
    • झूठ की लंका ! - गाँव में समाधान बैठक होने वाली थी और उसमें मंत्रीजी का आना तय था। सरपंच गाँव में माहौल बनाने के लिए लोगों को पहले से स...
    • - * गज़ल * बेवफाई के नाम लिखती हूँ आशिकी पर कलाम लिखती हूँ खत में जब अपना नाम लिखती हूँ मैं हूँ उसकी जिमाम लिखती हूँ आँखों का रंग लाल देखूँ तो उस नज़र को मैं...
    • अँधा युग - गोली और गाली जो बन चुके हैं पर्यायवाची इस अंधे युग की बनकर सौगात लगाते हैं ठिकाने बडबोली जुबान को तुम , तुम्हारी जुबान और तुम्हारी कलम रहन है सत्ता की...
    • नींद बनाम ख्व़ाब - मैंने अपनी नींदें बेच, कुछ ख्वाब खरीदे थे। रख दिया था सहेज कर, उन्हें अपनी पलकों तले। वक़्त की बारिशों औ आंधी से, कुछ उड़ गए, कुछ बह गए। कुछ को बचाया जतन...
    • माँ तुझे प्रणाम - *माँ तुझे प्रणाम* *शत शत नमन कोटि प्रणाम * *माँ तुझे प्रणाम ।* *जब मैं तेरी कोख में आई * *तूने स्पर्श से बताया था * *ममता का कोई मोल नहीं * *तूने ही सि...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -4) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से वे जग जाती हैं,और पुराना जीवन याद करने लगती हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में श...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.