माँ देती बुलंदी की राह उसके रहमों-करम से .

Posted on
  • Monday, July 30, 2012
  • by
  • Shalini Kaushik
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  •     
    मिलती है हमको माँ 
    उसके रहमों-करम से  ;
    मिलती है माँ की गोद उसके रहमों-करम से .

    अहकाम में माँ के छिपी औलाद की नेकी ;
    ममता की मिलती छाँव उसके रहमों-करम से .

    तालीम दे जीने के वो काबिल है बनाती ;
    माँ करती राहनुमाई उसके रहमों-करम से .

    औलाद की ख्वाहिश को वो देती है तवज्जह ; 
    माँ दिलकुशा मोहसिन उसके रहमों-करम से .

    कुर्बानियां देती सदा औलाद की खातिर ;
    माँ करती परवरिश है उसके रहमों-करम से .

    तसव्वुर 'शालिनी' के अब भर रहे परवाज़ ;
    माँ देती बुलंदी की राह उसके रहमों-करम से .

                                               शालिनी कौशिक 
                                                         [कौशल ]
    अहकाम -हुकुम ,राहनुमाई -पथप्रदर्शन ,दिलकुशा -बड़े दिलवाला ,मोहसिन -एहसान करने वाला ,तसव्वुर -कल्पना ,परवाज़ -उड़ान 

    3 comments:

    शिखा कौशिक said...

    सार्थक लिखा है आपने .आभार
    भारतीय नारी

    dheerendra said...

    सार्थक प्रस्तुति के लिए,,,,बधाई शालिनी जी,,,

    RECENT POST,,,इन्तजार,,,

    DR. ANWER JAMAL said...

    तसव्वुर 'शालिनी' के अब भर रहे परवाज़ ;
    माँ देती बुलंदी की राह उसके रहमों-करम से .

    Nice.

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