Skip to main content

Posts

Showing posts with the label मेरे वालेदैन

बाबा-अम्मी

धक .. धक .. धक .. धक … मौत का काउनडाउन शुरु हो चुका था। मेरे “ बाबा ” ( पिताजी ) हम सब को छोडकर दुनिया को अलविदा कहने चले थे। अभी सुबह ही तो मैं आईथी आपको छोडकर “ बाबा ” । मैं वापस आने ही वाली थी। और जीजाजी का फोन सुनकर आपके पास आ भी गई। आपके सीनेपर मशीनें लगी हुईं थीं। आप को ओकसीजन की ज़रुरत थी शायद ईसीलिये। फ़िर भी आप इतने होश में थे कि हम तीनों बहनों और भाइ को पहचान रहे थे। आई . सी . यु में किसी को जाने कि ईजाज़त नहिं थी । …. पर “ बाबा ” हमारा दिल रो रहा था कि अभी एक ही साल पहले तो मेरी “ अम्मी ” हमें छोडकर जहाँ से चली गई थीं । आप हम सब होने के बावज़ुद तन्हा ही थे। हम सब मिलकर आपको सारी खुशियों में शरीक करते ….. पर “ बाबा ” आप !! हर तरफ मेरी “ अम्मी ” को ही ढूंढते रहते थे। आपको ये जहाँ से कोई लेना देना ही नहिं था मेरी “ अम्मी ” के जाने के बाद। क्या “ बाबा ” ये रिश्ता इतना ग़हरा हो जाता है ? मुझे याद है आप दोनों ने हम ...