जन्म देने वाली माँ और फिर जीवनसाथी के साथ मिलने वाली दूसरी माँ दोनों ही सम्मानीय हैं। दोनों का ही हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस मदर्स डे पर 'अम्मा' नहीं है - पिछली बार मदर्स डे पर उनके कहे बगैर ही ऑफिस जाने से पहले उनकी पसंदीदा डिश बना कर दी तो बोली आज क्या है? शतायु होने कि तरफ उनके बड़ते कदमों ने isश्रवण शक्ति छीन ली थी।इशारे से ही बात कर लेते थे। रोज तो उनको जो नाश्ता बनाया वही दे दिया और चल दिए ऑफिस। वे अपनी बहुओं के लिए सही अर्थों में माँ बनी। उनके बेटे काफी उम्र में हुए तो आँखों के तारे थे और जब बहुएँ आयीं तो वे बेटियाँ हो गयीं। अगर हम उन्हें माँ न कहें तो हमारी कृतघ्नता होगी। वे दोनों बहुओं को बेटी ही मानती थीं। मैं अपने जीवन की बात करती हूँ। जब मेरी बड़ी बेटी हुई तभी मेरा बी एड में एडमिशन हो गया। मेरा घरऔर कॉलेज में बहुत दूरी थी । ६-८ घंटे लग जाते थे। कुछ दिन तो गयी लेकिन यह संभव नहीं हो पा रहा था। कालेज के पास घर देखा लेकिन मिलना मुश्किल था। किसी तरह से एक कमरा और बरामदे क...
बस एक माँ है जो मुझ से कभी ख़फ़ा नहीं होती