माँ कभी मरती नही हैं ..?

Posted on
  • Wednesday, July 13, 2011
  • by
  • दर्शन कौर धनोय
  • in
  • Labels:








  • माँ कभी मरती नही हैं ..?

    वो सिर्फ जिस्म छोडती हैं ,चोला बदलती हैं ,अपने बच्चो से बिदा लेती हैं !
    हर माँ अपने आप में परिपूर्ण होती हैं !
    स्त्री का बस 'माँ' होना ही अपने आप में सम्पूर्ण हैं | पुरुष तो जीवन -भर 
    ' माँ ' का अनुचर ही होता हैं ,जीवन -भर माँ बनने का प्रयास करता रहता 
    हैं पर सिर्फ 'पिता' बनकर रह जाता हैं !
    पर माँ अपनी साधना से पुरुष को अमृत पिला कर महाबली बनाती है ?
    इसलिए माँ कभी मरती नहीं..?
    वो अपने विचारो से, अपनी आकांशाओ से,अपने समर्पण से, हमेशा जीवित 
    रहती है ..और हम जब तक उसके साए में रहते हैं तब तक सुरक्षित रहते हैं !
    जैसे ही वो साया हमारे ऊपर से उठ जाता हैं तो हम निरह प्राणी बन जंगल -जंगल 
    घूमते रहते हैं ..एक अनबुझ प्यास के लिए ..?
    फिर वो अमृत हमे नही मिलता ???   

    8 comments:

    दर्शन कौर धनोए said...

    बहुत दिनों बाद आप सबसे मुलाकात हुई हैं ..? अनेको शुभकामनाओ सहित ...

    रविकर said...

    सही है ||
    बधाई ||

    वन्दना said...

    आपकी रचना तेताला पर भी है ज़रा इधर भी नज़र घुमाइये
    http://tetalaa.blogspot.com/

    Manish Kr. Khedawat said...

    sunder likha hai :)
    __________________________
    वो स्कूल का गुज़रा ज़माना ||

    कुश्वंश said...

    behad sundar abhvyakti hai hamesh se intzaar rahta hai aapki rachnao ka , badhai

    Roshi said...

    sach kaha hai .aaj jab maa nahi hai hamare pass to pata chalta hai............

    अनामिका की सदायें ...... said...

    istri me mamta, kshama, daya, vinamrta aur sehen shakti ke bhaav jyada hote hain jo purush se alag kar dete hain. agar purush me bhi ye gun aa jaye to vo bhi mata ban sakte hain.

    sunder abhivyakti.

    DR. ANWER JAMAL said...

    ज़माने के हालात देखकर
    मरने को मन तो करता है मेरा
    मगर उस दुआ का क्या होगा
    जो किसी ने मांगी थी
    मेरी सलामती के लिए
    उन आंखों का क्या होगा
    जो आते-जाते देखती हैं
    मेरा रास्ता
    उस दिल का क्या होगा
    जो धड़कता है मेरा नाम लेकर
    और उन सांसों का क्या होगा
    जो चलती हैं मेरी सांसों के साथ
    मेरी उस बूढ़ी मां का क्या होगा
    जो बसती है मेरी धड़कन में
    और मुझे इंसान बनाया।
    http://pyarimaan.blogspot.com/2011/04/blog-post_19.html

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • जीवन की जंग - जीतनी तो थी जीवन की जंग तैयारियाँ भी बहुत की थीं इसके लिए कितनी तलवारें भांजीं कितने हथियारों पर सान चढ़ाई कितने तीर पैने किये कितने चाकुओं पर धार लगाई ...
    • संताप से भरे पुत्र का पत्र - कल एक पुत्र का संताप से भरा पत्र पढ़ने को मिला। उसके साथ ऐसी भयंकर दुर्घटना हुई थी जिसका संताप उसे आजीवन भुगतना ही होगा। पिता आपने शहर में अकेले रहते थे, ...
    • कानून पर कामुकता हावी - [image: Navodayatimes] १६ दिसंबर २०१२ ,दामिनी गैंगरेप कांड ने हिला दिया था सियासत और समाज को ,चारो तरफ चीत्कार मची थी एक युवती के साथ हुई दरिंदगी को लेकर ,आ...
    • ब्रह्म वाक्य - दुःख दर्द आंसू आहें पुकार सब गए बेकार न खुदी बुलंद हुई न खुदा ही मिला ज़िन्दगी को न कोई सिला मिला यहाँ रब एक सम्मोहन है और ज़िन्दगी एक पिंजर और तू म...
    • बस यूँ ही ~ 2 - *मैं जिंदा तो हूँ , जिंदगी नहीं है मुझमें * *फक़त साँस चल रही है ज़िस्म फ़ना होने तक !!* *सु-मन *
    • हेमलासत्ता [भाग- एक] - एक छोटे से गांव खेतासर में हेमला जाट रहता था। उसके घर में दूध, पूत, धन, धान्य सभी था। सभी तरह से उसकी जिन्दगी सुखपूर्वक कट रही थी। उसकी अपनी प्रिय पत्नी से...
    • नंबर रेस का औचित्य? - 10वीं 12वीं का रिजल्ट आया. किसी भी बच्चे के 90% से कम अंक सुनने में नहीं आये. पर इतने पर भी न बच्चा संतुष्ट है न उनके माता पिता। इसके साथ ही सुनने में आया...
    • आइना - है वह आइना तेरा हर अक्स का हिसाब रखता है तू चाहे याद रखे न रखे उसमें जीवंत बना रहता है बिना उसकी अनुमति लिए जब बाहर झाँकता है चाहे कोई भी मुखौटा लगा ल...
    • माँ तुझे प्रणाम - *माँ तुझे प्रणाम* *शत शत नमन कोटि प्रणाम * *माँ तुझे प्रणाम ।* *जब मैं तेरी कोख में आई * *तूने स्पर्श से बताया था * *ममता का कोई मोल नहीं * *तूने ही सि...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • नया साल ! - समर घर से निकला तो पत्नी और बच्चों के लिए गिफ्ट पहले ही खरीदता हुआ होटल पहुंचा था। रात में प्रोग्राम ख़त्म करके सीधे घर भागेगा क्यो...
    • - * गज़ल * तमन्ना सर फरोशी की लिये आगे खड़ा होता मैं क़िसमत का धनी होता बतन पर गर फना होता अगर माकूल से माहौल में मैं भी पला होता मेरा जीने का मक़सद आसमां से भी ...
    • वेदों में गायन कला - *- डॉ. शरद सिंह* *गायन मानव की संवेदनाओं को जागृत करता है.आज दुनिया भर में संगीत के महत्व पर वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं . पाश्चात्य जगत के व...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -9) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना पुराना जीवन याद करने लगती > हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में > ...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

    • मेरे मन की.... - मेरी पहली पुस्तक "मेरे मन की" की प्रिंटींग का काम पूरा हो चुका है | और यह पुस्तक बुक स्टोर पर आ चुकी है| आप सब ऑनलाइन गाथा के द्वारा बुक कर सकते है| मेरी...
      8 hours ago
     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.