माँ तो माँ है...

कितना सुन्दर नाम है इस ब्लॉग का प्यारी माँ .हालाँकि प्यारी जोड़ने की कोई ज़रुरत ही नहीं है क्योंकि माँ शब्द में संसार का सारा प्यार भरा है.वह प्यार जिस के लिए संसार का हर प्राणी भूखा है .हर माँ की तरह मेरी माँ भी प्यार से भरी हैं,त्याग की मूर्ति हैं,हमारे लिए उन्होंने अपने सभी कार्य छोड़े और अपना सारा जीवन हमीं पर लगा दिया.
शायद सभी माँ ऐसा करती हैं किन्तु शायद अपने प्यार के बदले में सम्मान को तरसती रह जाती हैं.हम अपने बारे में भी नहीं कह सकते कि हम अपनी माँ के प्यार,त्याग का कोई बदला चुका सकते है.शायद माँ बदला चाहती भी नहीं किन्तु ये तो हर माँ की इच्छा होती है कि उसके बच्चे उसे महत्व दें उसका सम्मान करें किन्तु अफ़सोस बच्चे अपनी आगे की सोचते हैं और अपना बचपन बिसार देते हैं.हर बच्चा बड़ा होकर अपने बच्चों को उतना ही या कहें खुद को मिले प्यार से कुछ ज्यादा ही देने की कोशिश करता है किन्तु भूल जाता है की उसका अपने माता-पिता की तरफ भी कोई फ़र्ज़ है.माँ का बच्चे के जीवन में सर्वाधिक महत्व है क्योंकि माँ की तो सारी ज़िन्दगी ही बच्चे के चारो ओर ही सिमटी होती है.माँ के लिए कितना भी हम करें वह माँ के त्याग के आगे कुछ भी नहीं है .माँ बदला नहीं चाहती चाहती है केवल बच्चों का प्यार ओर हम कितने स्वार्थी होते हैंकि हम वह भी माँ को नहीं दे पाते.विश्व में हम देखते हैंकि जितने सफलता के उच्च शिखर पर पहुंचे हैं उनकी सफलता में माँ का महत्व है.

21 comments:

शिखा कौशिक said...

bilkul sahi kaha hai aapne .bhavbhari prastuti ke liye hardik badhai .

शिखा कौशिक said...

bilkul sahi kaha hai aapne .bhavbhari prastuti ke liye hardik badhai .

शिखा कौशिक said...

bilkul sahi kaha hai aapne .bhavbhari prastuti ke liye hardik badhai .

POOJA... said...

ji... ekdam satya... mai bhi aapki baaton se poorntaya sahmat hu...

Anjana (Gudia) said...

achchi post! saadar

HAKEEM YUNUS KHAN said...

Nice post .

DR. ANWER JAMAL said...

@ शालिनी जी और शिखा जी ! इस प्यारी मां के आंचल तले आप दोनों कौशिक सिस्टर्स का दिली इस्तक़बाल है। दो बहनों की एक साथ शिरकत से यहां पारिवारिक जज़्बे का अहसास ताज़ा रहेगा।
यह सही है कि ‘मां‘ लफ़्ज़ अपने अंदर खुद मुकम्मल भी है और प्यारा भी लेकिन मात्र चार अक्षरों से ब्लागस्पॉट पर कोई यूआरएल नहीं बनता, इसलिए मां के साथ अगर कोई लफ़ज़ जोड़ा जा सकता है तो फिर वह लफ़ज़ प्यार के अलावा कुछ और हो ही नहीं सकता। मां प्यार देती भी है और प्यारी लगती भी है। हमें भी उसके प्रति अपने प्यार को ज़ाहिर करने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए। हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हमारी मां तो जानती ही है कि हम उससे बहुत प्यार करते हैं।
नहीं, आप उससे कहिए कि आप उससे बहुत प्यार करते हैं। आप देखेंगे कि ऐसा कहने के बाद उसके चेहरे की चमक बढ़ जाएगी और आपके दिल को एक सुकून मिलेगा, ऐसा सुकून जो कि किसी और काम करने से आपको कभी नहीं मिल सकता।
आपने एक अच्छी पोस्ट इस प्यारे ब्लाग को दी है, इसके लिए आपका शुक्रिया।
जो भी इस ब्लाग का मेम्बर है, जब भी वह इस ब्लाग पर कोई पोस्ट पब्लिश करे तो हमारी वाणी के लोगो पर ज़रूर क्लिक करे ताकि आपकी पोस्ट हमारी वाणी पर दिखाई दे और फिर हरेक पाठक अगर वह किसी अन्य माध्यम से इस ब्लाग पर आया है तो उसे भी हमारी वाणी पर जाकर पोस्ट के ‘ाीर्षक पर एक क्लिक ज़रूर दे ताकि पोस्ट हमारी वाणी के हॉट कॉलम में आ जाए और एक अच्छा संदेश ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंच सके।
मैं इस साहित्य को समाचार पत्रों में भी प्रकाशित किए जाने की व्यवस्था करूंगा। इसके लिए एक पूरी स्मारिका भी निकाली जा सकती है।
हरेक मेम्बर कम से कम अपने परिचितों में से एक ब्लागर को अवश्य ही इस ब्लाग का मेम्बर या फॉलोअर बनाए ताकि पाठकों की संख्या में इज़ाफ़ा हो सके।
नेक मक़सद के लिए सभी एक मन होकर परस्पर सहयोग करें और इस ब्लाग को ब्लाग जगत की एक मिसाल बनाएं, इसे बेमिसाल बनाएं और ऐसा होकर रहेगा, इंशा अल्लाह !

किलर झपाटा said...

आप लोग इतना इमोशनल क्यों लिखते हो यार ? हाँ नहीं तो.....

माँ......मैं आ रहा रहा हूँ माँ।

Sunil Kumar said...

माँ के बारे में जितना भी कहा जाये वह कम है बस इसी लिए उसका दर्जा ख़ुदा के बाद आया है

दर्शन कौर धनोए said...

मेरे मन के मन्दिर में एक धुंधली -सी तस्वीर हे जिसे शायद 'माँ 'कहते हे --मेरी माँ का देहांत १०वर्ष की उम्र में ही हो गया था बस कुछ यादे बाकी हे जो बेहद हसीन हे --आपका ब्लोक पसंद आया जल्दी ही ई - मेल करुगी

Minakshi Pant said...

माँ तो माँ है उसकी छवि कही भी आसानी से देखि जा सकती है फिर वो पशु हो या फिर पक्षी कितनी खूबसूरती से अपना सारा कर्तव्य निभाती है माँ के बारे मै जिनता भी कहो लगता है नहीं अभी कुछ और कहना बाक़ी है ! सच मै इतनी ही प्यारी होती है माँ जो हरदम साये की तरह अपने साथ ही महसूस की जा सकती है !

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

very nice

Neelam said...

Maa main tumhe bhul paayungi kaise,
sach tum behadd yaad aati ho .
kaash wahan se lout aana sambhav hota to main har koshish karti tumhe waapis le aane ki.
miss u lot Maa.

Neelam said...

Maa main tumhe bhul paayungi kaise,
sach tum behadd yaad aati ho .
kaash wahan se lout aana sambhav hota to main har koshish karti tumhe waapis le aane ki.
miss u lot Maa.

Neelam said...

http://neelamkashaas.blogspot.com
mera email id hai ..
gracious.sharma@gmail.com

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

bahut sundar lekh hai..shalini ji kaa...प्यारी माँ ब्लॉग में...
कल यानि ११ तारीख को शालिनी जी का ये लेख चर्चामंच पर होगा... http://charchamanch.blogspot.com

आप चर्चामंच पर आ कर आपने विचारों से भी अनुग्रहित करियेगा..

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

मेरा ई मेल पता है -
nutan.dimri@gmail.com

रंजना said...

बहुत सही कहा आपने...

काश कि सब यह समझ पाते...

निर्मला कपिला said...

सार्थक पोस्ट। शुभकामनायें।

merisha dsouza said...

YES YOUR CORRECT WITHOUT MOTHER EVERYINTHING IS BLANK IN A CHILD'S LIFE.I AM THANKFUL TO GOD T5HAT I HAVE A VERY LOVING MOTHER AND I LOVE HER SO MUCH THAT I AM READY TO DO WHATEVER

Laxmi said...

Maa to bas maa hi hai.
eska ehsas ek ladki ko sabse jyada tab hota hai jab wo khud maa banti hai.

There was an error in this gadget

Followers

प्यारी माँ

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
  • वह जीने लगी है... - अब नहीं होती उसकी आँखे नम जब मिलते हैं अपने अब नहीं भीगतीं उसकी पलके देखकर टूटते सपने। अब नहीं छूटती उसकी रुलाई किसी से उल्हानो से अब नहीं मरती उसकी भूख कि...
  • “तो क्या हुआ मिन्नी......”--- लघु कथा - “तो क्या हुआ मिन्नी......” नन्हा समर सुबकती हुई अपनी छोटी बहन को बड़े प्यार से गोदी में समेटने का प्रयास कर रहा था और बातों से उसका जी बहलाने की कोशिश ...
  • प्राकृतिक अभियंता - तिनके चुन चुन घरोंदा बनाया आने जाने के लिए एक द्वार लगाया मनोयोग से घर को सजाया दरवाजे पर खड़े खड़े अपना घर निहार रही देख दस्तकारी अपनी फूली नहीं सम...
  • चर्चा कार - करते हैं बैठ चर्चा, खाली ये जब भी होते, कोई काम इनको करते मैने कभी न देखा. ................................................... वो उसके साथ...
  • हम पानी का मोल क्यों नहीं समझ पा रहे हैं? - 22 मार्च पानी बचाने का संकल्प, उसके महत्व को जानने और संरक्षण के लिए सचेत होने का दिन है। अनुसंधानों से पता चला है कि विश्व के 1.5 अरब लोगों को पीने ...
  • हमारी फरियाद है जमाने से - कोई कहता है कि मुझसे मेरा बचपन छीन लिया गया कोई कहता है कि मुझसे मेरा यौवन छीन लिया गया लेकिन क्या कभी आपने सुना है कि किसी ने कहा हो कि मुझसे मेरा बुढ़ापा...
  • ये है सरकारी होली :) - सरकार आपको होली तक फ्री राइड करवाएगी फिर वो बस हो ऑटो टैक्सी या फिर मेट्रो क्योंकि यदि नोट लेकर निकले और किसी ने रंग भरा गुब्बारा मार दिया तो आपकी तो बल्ले...
  • तुम और मैं -८ - *.....तुम !* *स्याह लफ्ज़ों में लिपटे ख़यालात हो* *और मैं...* *उन ख़यालों की ताबीर |* *एक एहसास की नज़्म* *आज भी ...* *जिन्दा है तुम्हारे मेरे बीच !!* *सु-म...
  • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
  • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
  • टी-पाट - *टी-पाट* *कहानी-पूनम श्रीवास्तव * *छनाक की तेज आवाज हुयी और उज्ज्वला कुछ लिखते लिखते चौंक पड़ी।फिर बोली क्या हुआ?क्या टूटा ?अ...
  • नया साल ! - समर घर से निकला तो पत्नी और बच्चों के लिए गिफ्ट पहले ही खरीदता हुआ होटल पहुंचा था। रात में प्रोग्राम ख़त्म करके सीधे घर भागेगा क्यो...
  • - * गज़ल * तमन्ना सर फरोशी की लिये आगे खड़ा होता मैं क़िसमत का धनी होता बतन पर गर फना होता अगर माकूल से माहौल में मैं भी पला होता मेरा जीने का मक़सद आसमां से भी ...
  • वेदों में गायन कला - *- डॉ. शरद सिंह* *गायन मानव की संवेदनाओं को जागृत करता है.आज दुनिया भर में संगीत के महत्व पर वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं . पाश्चात्य जगत के व...
  • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
  • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -9) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना पुराना जीवन याद करने लगती > हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में > ...

मन की दुनिया

नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

 
Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.