मां का क्या होगा ? -राजकुमार सकोलिया

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  • Tuesday, April 19, 2011
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
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  • ज़माने के हालात देखकर 
    मरने को मन तो करता है मेरा
    मगर उस दुआ का क्या होगा
    जो किसी ने मांगी थी
    मेरी सलामती के लिए
    उन आंखों का क्या होगा
    जो आते-जाते देखती हैं 
    मेरा रास्ता
    उस दिल का क्या होगा
    जो धड़कता है मेरा नाम लेकर
    और उन सांसों का क्या होगा
    जो चलती हैं मेरी सांसों के साथ
    मेरी उस बूढ़ी मां का क्या होगा 
    जो बसती है मेरी धड़कन में
    और मुझे इंसान बनाया।
    ---------------------------
    २९/11- भार्गव नगर,
    जालंधर, 144003 (पंजाब)

    10 comments:

    Minakshi Pant said...

    सारी खुबसूरत भावनाएं माँ को ही समर्पित बहुत सुन्दर एहसासों से सजी रचना |

    रश्मि प्रभा... said...

    maa ki duayen jeene ka sambal banti hain ... maa ke prati soch ek samman hai

    संतोष कुमार झा said...

    बहुत खूब सुन्दर पोस्ट के लिए
    बधाई ......

    Roshi said...

    bahut sunder rachna

    Sunil Kumar said...

    ममतामयी सुन्दर रचना जो दिल में बस गयी बहुत बहुत बधाई

    Vivek Jain said...

    बहुत सुंदर!
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

    Sadhana Vaid said...

    माँ के हृदय की अगाध ममता और वात्सल्य को परिभाषित करती बहुत सुन्दर रचना ! बधाई !

    संजय कुमार चौरसिया said...

    माँ को समर्पित बहुत सुन्दर एहसासों से सजी रचना |

    DR. ANWER JAMAL said...

    आप सभी साहिबान से चाहा जा रहा है कि आप
    मुशायरा ब्लॉग पर भी तशरीफ़ लाये.
    मेहरबानी होगी.
    शुक्रिया .

    Patali-The-Village said...

    माँ को समर्पित बहुत सुन्दर एहसासों से सजी रचना | धन्यवाद|

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