बूढ़े लोगों की समस्याएं बन गई हैं अब नाम चमकाने का ज़रिया

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  • Saturday, June 25, 2011
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  • DR. ANWER JAMAL
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  • बूढ़े माँ बाप और लाचार इंसान हिंदी ब्लॉग जगत की चिंता का विषय हमेशा से हैं। 'प्यारी माँ' ब्लॉग हिंदी ब्लॉग जगत का पहला सामूहिक प्रयास है । इसके बाद दो चार और ब्लॉग भी इसी चिंता को लेकर खड़े हुए हैं और अब यह चिंता उन ब्लॉग्स पर भी देखी जा रही है , जो कि अब तक इस तरह के मुददों से कोई सरोकार ही नहीं रखते थे या फिर कम रखते थे।
    यह एक अच्छा लक्षण है लेकिन संकीर्णता और पक्षपात का आलम यह है कि किसी ने भी 'प्यारी माँ' ब्लॉग के रचनात्मक आंदोलन का जिक्र तक अपनी पोस्ट में न किया । हरेक अपने आप को ऐसे जाहिर कर रहा है जैसे कि इस मुददे को चर्चा मात्र उसके लेखन के कारण मिल रही है । यह एक ग़लत ट्रेंड है ।
    वृद्धों के प्रति उपेक्षा एक गंभीर सामाजिक समस्या है। इसे महज़ क़ानून और क़ानूचियों के बल पर हल नहीं किया जा सकता । ब्लॉग पर विचार विमर्श किया जा सकता है लेकिन इसे हल करने के लिए हमें हक़ीक़त की दुनिया में काम करना होगा और सबको मिलकर करना होगा।
    जो लोग सबके साथ मिलकर सोचने तक के लिए तैयार नहीं हैं , वे इस समस्या पर लिख कर ख़ुद को मानवीयता के गुण के आवरण में लिपटा हुआ सा तो दिखा सकते हैं लेकिन इस समस्या को वास्तव में हल नहीं कर सकते ।

    8 comments:

    रविकर said...

    aabhaar
    chinta karne vale hain
    main bhi aaya aapke sath

    चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

    अब तो लोग चोरी करके अपनी पोस्ट बना लेते है और सीनाजोरी भी करते हैं :)

    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

    समाज के हर तबके को जागरूक करना होगा!

    DR. ANWER JAMAL said...

    @ रविकर जी ! साथ आने के लिए आपका शुक्रिया ।

    DR. ANWER JAMAL said...

    @ आदरणीय चंद्रमौलेश्वर जी ! आप सही कह रहे हैं । अभी हमने हिंदी ब्लॉगिंग गाइड की तैयारी में लोगों से जुड़ने के लिए कहा तो बजाय साथ आने ख़ुद वैसी ही लिखनी शुरू कर दी है।
    :)

    DR. ANWER JAMAL said...

    @ आदरणीय रूपचंद जी ! सभी लोग जागरूक हों और पक्षपात से त्याग कर मिलकर काम करें तो कोई समस्या बाक़ी बचने वाली नहीं है ।
    आपसे सहमत !

    वाणी गीत said...

    हम तो आँखों देखी ही लिखते हैं ...इधर बार -बार यही दृश्य देखने को मिले तो लिख दिया !

    DR. ANWER JAMAL said...

    @ वाणी जी ! आप प्यारी माँ ब्लॉग की नियमित पाठिका भी हैं और आपसे वैचारिक समर्थन सदा ही मिला है । शिकायत उनसे है जो हरेक सकारात्मक आंदोलन को अपनी गुटबाज़ी के कारण पहले तो नज़रअंदाज़ कर देते हैं और जब वह सफल हो जाता है तब भी वे उससे अन्जान से होने का दिखावा किया करते हैं ।
    आपने अपने लेख का लिंक दिया होता तो हम उसे भी जरूर पढ़ते और उस पर अपनी राय भी देते । इसके बावजूद हमें आशा है कि आपने लिखा है तो अच्छा ही लिखा होगा ।

    धन्यवाद !

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