यह सावन भी बीत गया माँ , ना आम, ना अमलतास, ना गुलमोहर, ना नीम, ना बरगद, ना पीपल किसी पेड़ की डालियों पे झूले नहीं पड़े ! ना चौमासा और बिरहा की तान सुनाई दी ना कजरी, मल्हार के सुरीले बोलों ने कानों में रस घोला ! ना मोहल्ले पड़ोस की लड़कियों के शोर ने झूला झूलते हुए आसमान गुँजाया , ना राखी बाँधने के बाद नेग शगुन को लेकर झूठ-मूठ की रूठा रूठी और मान मनौव्वल ही हुई ! जबसे तुम गयी हो माँ ना किसीने जीवन के विविध रंगों से मेरी लहरिये वाली चुनरी रंगी , ना उसमें हर्ष और उल्लास का सुनहरी, रुपहली गोटा लगाया ! ना मेरी हथेलियों पर मेंहदी से संस्कार और सीख के सुन्दर बूटे काढ़े , ना किसीने मेंहदी रची मेरी लाल लाल हथेलियों को अपने होंठों से लगा बार-बार प्यार से चूमा ! ना किसी मनिहारिन ने कोमलता से मेरी हथेलियों को दबा मेरी कलाइयों पर रंगबिरंगी चूड़ियाँ चढ़ाईं , ना किसीने ढेरों दुआएं देकर आशीष की चमकीली लाल हरी चार चार चूड़ियाँ यूँ ही बिन मोल मेरे हाथों में पहनाईं ! अब तो ना अंदरसे और पूए मन को भाते हैं , ना स...
Comments
शब्द नहीं सूझ रहे... क्या लिखूं इस पर।
आपने तो रूला ही दिया।
एक बार फिर बेहतरीन।
यह बिलकुल सच है.
और यह भी सच है कि आँखें भर आईं. इन खूबसूरत अशआर के साथ हम आपका और आपकी इस बेहतरीन रचना का इस्तक़बाल करते हैं.
उम्र भर रखे रही सर पर ज़रूरतों का पहाड़
थक गई साँसें तो अब आराम फरमाते है माँ
जो जुबां पर भी न आये , दिल में घुट कर रह गए
ऐसे कुछ अरमान अपने साथ ले जाती है माँ
आपकी आमद ने आज हमारी देरीना इंतज़ार को बिल-आख़िर ख़तम कर दिया.
जजाकल्लाह .
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (28-3-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com/
इसी के साथ आज मैंने अपने कई और ब्लॉग्स भी इस एग्रीगेटर पर जोड़ दिया है.
रास्ते अभी और भी हैं ट्रैफिक बढाने के लिए. जैसे जैसे मेरा इल्म बढ़ता जायेगा और मुझे वक़्त मिलता जायेगा , मैं आपकी आवाज़ को ज्यादा से ज़्यादा फैलाता चला जाऊंगा.
आप लिखते रहें और हम पढ़ते रहें ऐसी हमारी इच्छा है.
शुक्रिया.
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/03/good-news.html
मैं तुझ ही में तो समाई हुई हुं।
सुन्दर, बेहतरीन
Vivek Jain (vivj2000.blogspot.com)
इस खुशखबरी का चर्चा आप यहाँ भी देख सकते हैं
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/03/blog-post_27.html
आप सभी का बहोत बहोत शुक्रिया। मेरी रचना को सराहने के लिये। ये रचना ही सिर्फ़ नहिं है ये हक़ीकत बयाँ की है मैने।
डो.जमाल साहब की तहे दिल से शुक्रगुज़ार हुं जिन्होंने मुझे प्यारी माँ ब्लोग पर लिखने को कहा।
“तुं ही तो मेरा वजुद है बेटी
khubsurat ahsason se sazi rachna