माँ एक कोमल एहसास , माँ ज़िन्दगी की ख्वाब , माँ दुनिया की सबसे बड़ी नेमत । इन मुर्गी के बच्चों को जरा गौर से देखिये ... अपनी माँ से कैसे लिपटे हुए हैं । और इस माँ ने अपने बच्चों को कैसे अपने ऊपर , अपने परों में छिपा रक्खा है । यही है माँ का अनूठा प्यार । सरे जहाँ की नेमतों में सबसे बड़ी नेमत है माँ का प्यार, इसी लिए लोग कहते हैं कि मेरे पास माँ है , माँ ... मुनव्वर राना के शब्दों में ... जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है , माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है । मुसीबत के दिनों ...
Comments
शब्द नहीं सूझ रहे... क्या लिखूं इस पर।
आपने तो रूला ही दिया।
एक बार फिर बेहतरीन।
यह बिलकुल सच है.
और यह भी सच है कि आँखें भर आईं. इन खूबसूरत अशआर के साथ हम आपका और आपकी इस बेहतरीन रचना का इस्तक़बाल करते हैं.
उम्र भर रखे रही सर पर ज़रूरतों का पहाड़
थक गई साँसें तो अब आराम फरमाते है माँ
जो जुबां पर भी न आये , दिल में घुट कर रह गए
ऐसे कुछ अरमान अपने साथ ले जाती है माँ
आपकी आमद ने आज हमारी देरीना इंतज़ार को बिल-आख़िर ख़तम कर दिया.
जजाकल्लाह .
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (28-3-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com/
इसी के साथ आज मैंने अपने कई और ब्लॉग्स भी इस एग्रीगेटर पर जोड़ दिया है.
रास्ते अभी और भी हैं ट्रैफिक बढाने के लिए. जैसे जैसे मेरा इल्म बढ़ता जायेगा और मुझे वक़्त मिलता जायेगा , मैं आपकी आवाज़ को ज्यादा से ज़्यादा फैलाता चला जाऊंगा.
आप लिखते रहें और हम पढ़ते रहें ऐसी हमारी इच्छा है.
शुक्रिया.
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/03/good-news.html
मैं तुझ ही में तो समाई हुई हुं।
सुन्दर, बेहतरीन
Vivek Jain (vivj2000.blogspot.com)
इस खुशखबरी का चर्चा आप यहाँ भी देख सकते हैं
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/03/blog-post_27.html
आप सभी का बहोत बहोत शुक्रिया। मेरी रचना को सराहने के लिये। ये रचना ही सिर्फ़ नहिं है ये हक़ीकत बयाँ की है मैने।
डो.जमाल साहब की तहे दिल से शुक्रगुज़ार हुं जिन्होंने मुझे प्यारी माँ ब्लोग पर लिखने को कहा।
“तुं ही तो मेरा वजुद है बेटी
khubsurat ahsason se sazi rachna