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Showing posts from February, 2012

लंबे बच्चे चाहिए तो दूर की बीवी लाएं

BBC सुनने में यह बात अजीब-सी लग सकती है, लेकिन पोलैंड के वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर पति और पत्नी एक ही शहर के हैं तो उनके बच्चे का कद नाटा रहेगा। अगर आपको लंबा बच्चा चाहिए तो यह सुनिश्चित कीजिए कि आपकी पत्नी या पति आप के शहर से दूर के शहर के हों। पोलैंड के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में पता लगाया है कि अगर मियाँ-बीवी एक ही शहर के हैं तो उनके बच्चे दूर रहने वाले माता-पिता के बच्चों से नाटे होते हैं। सारा खेल जेनेटिक्स का है। शोध के अनुसार अलग अलग क्षेत्रों में पैदा हुए माता पिता की जीन्स में एक ही शहर में पैदा हुए मियाँ-बीवी की तुलना में कम समानता होती है। यह शोध पोलिश अकादमी ऑफ साइंस के मानव विज्ञान संस्थान के डेरियूज डेनेल ने किया है। उन्होंने लाइव साइंसेस में प्रकाशित लेख में लिखा है कि ज्यादा अनुवांशिक विविधता से बच्चों का शरीर अन्य बच्चों की तुलना में ज्यादा असरदार तरीके से काम करता है। माता-पिता की सामाजिक आर्थिक स्थिति से भी फर्क शोध के मुताबिक कद के निर्धारण में और कई तत्व भी काम करते हैं- मसलन माता पिता का कद और उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति भी क्योंकि समृद्ध व्यक्तियों

रोजाना सिर्फ ये दो काम कर लेंगे तो बीमार नहीं पड़ेगे

आजकल बदलते मौसम के साथ तबीयत बिगड़ जाना एक आम समस्या है। सर्दी, खांसी, पेट व बुखार जैसी समस्याएं कमजोर इम्युनिटी पॉवर के कारण बदलते मौसम के साथ शरीर पर तुरंत हावी हो जाती हैं। अगर आपके साथ भी यही परेशानी है। बदलते मौसम के साथ आपकी तबीयत भी नासाज हो जाती है तो आप रोज नीचे बताएं दो काम करें, बीमारियां आसपास भी नहीं फटकेंगी। एक रिसर्च के नतीजे कहते हैं यदि कोई भी व्यक्ति जीवन भर सिर्फ इन दो उपायों को करता रहे तो उसके शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार या कमजोर पडंने की संभावना लगभग न के बराबर रह जाती है ये सूर्य से जुड़े ये उपाय हमारे इम्यून सिस्टम को बेहद मजबूत बना देते हैं… - उगते हुए सूरज की किरणों का शरीर से ज्यादा से ज्यादा स्पर्श होने दें। ऐसा करते हुए मार्निग वॉक, आसन, ध्यान या प्राणायाम करने से लाभ और भी अधिक बढ़ जाता है। - सप्ताह में कम से कम 2 दिन धूप स्नान करें यानी सुबह की सूर्य किरणों के साथ नहाएं इससे आपके शरीर और मन की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। Source – http://religion.bhaskar.com/article/yoga-do-two-things-daily-will-just-not-sick-2763442.html?HFR

अपनी बेटियों के सफ़ेद बाल काले कीजिए नीम से

आजकल कई वजहों से बाल उम्र से पहले ही सफ़ेद हो जाते हैं। लड़कियों के बाल सफ़ेद हो जाएं तो लड़कियों के साथ उनकी मांएं भी चिंतित हो जाती हैं। एक राज़ की बात आज आपको बताई जा रही है। इसे आज़माइये और इसका जादू असर देखिए। इस दौरान तली हुई और खट्टी चीज़ों का परहेज़ करें। 1. नीम का तेल नाक के नथुनों में चंद क़तरे रोज़ाना टपकाएं आपके बाल अगर उम्र से पहले सफ़ेद हो गए हैं तो वे काले हो जाएंगे। 2. नीम के हरे पत्तों का रस नाक में टपकाने से सिरदर्द दूर होता है और कान में टपकाने से कान के दर्द में आराम मिलता है। 3. दाद वाली जगह पर लगाने से दाद दूर हो जाता है। 4. नीम के पत्ते पीसकर शहद में मिलाकर घाव पर लगाया जाए तो जो घाव किसी तरह ठीक न होता हो, वह इस मरहम से ठीक हो जाएगा। 5. नीम की दातुन करने से आप दांतों और मसूड़ों की बीमारियों से मुक्ति पा जाएंगे। जिसे फ़ायदा हो वह यहां आकर ज़रूर बताए ताकि दूसरे भी इसका इस्तेमाल करने की प्रेरणा पाएं।

माँ दुनिया की सबसे प्यारी चीज होती है

माँ दुनिया की सबसे प्यारी चीज होती है. जीवन में व्यक्ति सब कुछ प्राप्त कर सकता है पर माँ यदि खो जाये तो फिर नहीं मिलती. वे लोग बड़े खुशनशीब होते हैं जिनकी माँ होती है. मेरी माँ भी बड़ी प्यारी थी पर वे मुझे छोड़ कर चार साल पहले दुनिया से चली गईं. हम अब सिर्फ उनकी याद ले कर जीते हैं और साल में उनकी पुण्य तिथि मना लेते हैं. मेरी माँ ने मुझे हमेशा अच्छे काम करने के लिए प्रेरित किया और संतोषी बनने की शिक्षा दी. वे हमेशा कहती थी संतोषी सदा सुखी. वे हमेशा संकट के समय धीरज रखने की सलाह देती थीं और मुश्किल समय में सांत्वना देते हुए कहती थी की उद्यम करो संकट दूर हो जायेगा. हम आज भी उनके बताये रस्ते पर चल कर गर्व महसूस करते हैं.   प्रथम पुण्य तिथि: श्रीमती कुसुम कुमारी कोठारी

उकसावे पर बेटे की हत्या को हत्या नहीं माना कोर्ट ने

मदुरै ।। मदास उच्च न्यायालय ने बेटे की हत्या के मामले में 60 साल की विधवा को निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को छह वर्ष के सश्रम कारावास में तब्दील कर दिया है। साथ ही अदालत ने कहा कि इसे हत्या करार नहीं दिया जा सकता,क्योंकि मां की देखभाल करने से लगातार इनकार करते आ रहे बेटे के उकसाने पर महिला ने यह कदम उठाया। तिरूनेलवेली जिले के अगस्थियारपुरम की निवासी एम पूवाम्मल की आपराधिक याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए अदालत की मदुरै पीठ ने इस मामले को गैर इरादतन हत्या में तब्दील कर दिया। इस महिला ने निचली अदालत द्वारा उसे दी गई सजा को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पूवाम्मल का बेटा एम देवेन्द्रन अपने विवाह के बाद से ही पत्नी के साथ अपनी ससुराल में रह रहा था। पांच अक्तूबर 2007 को अपने पति की मौत के बाद पूवाम्मल ने बहू-बेटे पर अपने साथ रहने के लिए दबाव डाला। लेकिन जब देवेन्द्रन ने उसकी अपील नहीं सुनी तो पूवाम्मल को गुस्सा आ गया और उसने 23 अक्तूबर 2007 को उस पर कुल्हाड़ी से वार किया। बाद में उसने खुद को एक कमरे में बंद कर

नारी स्वयं नारी के लिए संवेदनहीन क्यों ?

यह तो सभी जानते हैं हमारे देश में महिला समाज को सदियों से प्रताड़ित किया जाता रहा है . उसे सदैव पुरुष के हाथों की कठपुतली बनाया गया.उसे अपने पैरों की जूती समझा गया.उसके अस्तित्व को पुरुष वर्ग की सेवा के लिए माना गया . परन्तु आधुनिक परिवर्तन के युग में समाज के शिक्षित होने के कारण महिला समाज में भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता का संचार हुआ और महिला समाज को उठाने ,उसके शोषण को रोकने एवं समानता के अधिकार को पाने के लिए अनेक आन्दोलन चलाये गए अनेक महिला संगठनों का निर्माण हुआ महिला समाज ने अपने शोषण के विरुद्ध आवाज उठाई , और समानता के अधिकार पाने के लिए संघर्ष प्रारंभ किया . यद्यपि महिलाओं की स्तिथि में बहुत कुछ परिवर्तन आया है ,पुरुष वर्ग की सोच बदली है .परन्तु मंजिल अभी काफी दूर प्रतीत होती है.अभी भी सामाजिक सोच में काफी बदलाव लाने की आवश्यकता है . शिक्षा के व्यापक प्रचार प्रसार के बावजूद आज भी महिलाओं की स्वयं की सोच में काफी

महान संस्कृति, घटिया रिवाज Great Indian Culture

भारत के लोग चाहें तो अपने सिर पर गुलाबी रंग का बड़ा सा साफा बांधे यह कहते हुए शान से घूम सकते हैं कि वे एक महान संस्कृति के रक्षक हैं, पर संयुक्त राष्ट्र के डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक्स ऐंड सोशल अफेयर्स ने भारत और चीन को बेटियों के लिए दुनिया भर में सबसे खराब देश माना है। उसने 150 देशों में 40 बरसों के अध्ययन के आधार पर यह रिपोर्ट पेश की है। इसके मुताबिक यहां एक से पांच साल के बीच की उम्र करीब 75 फीसदी लड़कियां मौत के मुंह में चली जाती हैं। पूरी दुनिया में बेटियों के साथ ऐसा और कहीं नहीं होता। ऐसा नहीं है कि यह समस्या पहले न रही हो, लेकिन आज के समाज में इसका स्तर हैरान करने वाला है। शिक्षा का स्तर बढ़ने से लड़के के मुकाबले लड़की को कमतर आंकने की प्रवृत्त जिस तरह से कम कम होनी चाहिए थी, वह संभव नहीं हो पाई। इसलिए यह देखना चाहिए कि आखिर हमारी सरकारी योजनाओं में खोट कहां है? पिछले तीन दशकों में यहां लिंगानुपात कम करने और बेटियों का जीवन स्तर सुधारने के लिए तरह-तरह की योजनाएं बनाई गईं हैं। उन्हें सही तरीके से लागू किया गया होता तो शायद यह हालत नहीं होती। इसकी जिम्मेदारी
बस से उतरकर.. जेब में हाथ डाला, मैं चौंक पड़ा.., जेब कट चुकी थी..। जेब में.. था भी क्या..? कुल 150 रुपए और एक खत..!! जो मैंने अपनी माँ को लिखा था कि - मेरी नौकरी छूट गई है; अभी पैसे नहीं भेज पाऊँगा…। तीन दिनों से.. वह पोस्टकार्ड मेरी जेब म ... ें पड़ा था। पोस्ट.. करने को.. मन ही.. नहीं कर रहा था। 150 रुपए जा चुके थे..। यूँ ......150 रुपए ..कोई बड़ी रकम नहीं थी., लेकिन.. जिसकी नौकरी छूट चुकी हो, उसके लि...ए.. 150 रुपए.. 1500 सौ से कम.. नहीं होते..!! कुछ दिन गुजरे...। माँ का खत मिला..। पढ़ने से पूर्व.. मैं सहम गया..। जरूर.. पैसे भेजने.. को लिखा होगा..। …लेकिन, खत पढ़कर.. मैं हैरान.. रह गया। माँ ने लिखा था — “बेटा, तेरा 500 रुपए का.. भेजा हुआ मनीआर्डर.. मिल गया है। तू कितना अच्छा है रे ! …पैसे भेजने में.. कभी लापरवाही.. नहीं बरतता..।” मैं इसी.. उधेड़- बुन में लग गया.. कि आखिर.. माँ को मनीआर्डर.. किसने भेजा होगा..? कुछ दिन बाद., एक और पत्र मिला..। चंद लाइनें.. लिखी थीं—आड़ी- तिरछी..। बड़ी मुश्किल से खत पढ़ पाया..। लिखा था — “भाई, 150 रुपए तुम्हारे.. और 350 रुपए अपनी ओर से मिलाकर मैंने तुम