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Showing posts from March, 2011

यादे ! यादे !! यादे !!!

   तेरा चेहरा मुझको याद नही पर,  तेरी गोद मुझे याद है माँ ! तेरा प्यार याद नही रहा पर , उसका एहसास मुझे याद है माँ ! तेरे दुध से जीवन दान मिला , पर उस दूध की खुशबु याद नही माँ ! मेरे दिल पर तेरा हक़ है पर , मेरे शरीर को तेरा साथ नही माँ ! जब पैदा हुई तो तेरा आगोश था , पर अब जीवन में वह आस नही माँ ! तुझसे मिलना न मुमकिन है पर , तेरी याद पर मेरा अख्तियार नही माँ ! जब चाहां निगाहें झुका कर देख ली , मेरे दिल में इक तस्वीर है माँ !  तुम बिन ये घर सूना है , सुने घर में एक भी चिराग नही माँ ! तेरी बगिया में इक फूल खिला था , आज उस पर वीरानी -सी छाई है माँ ! तस्वीर में ज़िंदा है तू मेरे लिए, तक़दीर को क्या समझाऊ मैं  माँ ! हर शे में तुझको ढूंढा मैंने , इस भीड़ में केसे पहचानू मैं  माँ !  इस कंक्रीट के जंगल में धायल , कब से दोड़ रही हूँ  मैं  माँ !  लहू लुहान कब तक मैं  दोडू , बस ,एक सहारा मिल जाता माँ ! तेरे ममता का आंचल मिल जाता माँ ! तेरे प्यार का सागर मिल जाता माँ ! इस किश्ती को साहिल मिल जाता माँ !

मां के लिए ...

उसकी शिकायत का पिटारा चार – छह दिनों में खुल ही जाता तुम तो बस छोटी से प्‍यार करती हो ... हर समय बस काम ही काम करती रहती हो मां मुस्‍करा के कहती नहीं .. मैं तुम सबसे बेहद प्‍यार करती हूं .. मां उसकी शिकायतों को नजरअंदाज कर सिर पे हांथ रखती स्‍नेह से क्‍या हुआ ... काम भी तो जरूरी है, यकीं मानो काम के वक्‍त भी मेरी आंखों में तुम्‍हारी ही अभिलाषा पूर्ति रहती है तुम्‍हारे इस स्‍नेह से लिपटी मैं पल- पल तुम्‍हारे हर विचार को अपनाती हूं, सोच को परिपक्‍व होने के लिए दुनिया की भीड़ में छोड़ देती हूं तुम भी मेरी तरह एक मजबूत स्‍तंभ बनो मां के लिये आसान नहीं होता अपने बच्‍चे से दूर होना वो हर बच्‍चे की पीड़ा में एक समान दुखी होती है वह यह भी जानती है किसे उसकी ज्‍यादा जरूरत है तुम्‍हारी शिकायतें मुझे बुरी नहीं लगती मैं तुम्‍हारा स्‍नेह महसूस करती हूं इनमें और इस बात पे हैरां होती हूं कि जैसे तुम मुझसे झगड़ती हो ठीक वैसे ही मैं भी मां से झगड़ा किया करती हूं ...।

अब गर्भाशय प्रत्यारोपण जल्द होगा संभव

लंदन। उन महिलाओं के लिए खुशख़बरी है जो किन्हीं कारणों से गर्भाशय में हुई बीमारी की वजह से संतान सुख से वंचित हैं। स्वीडन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ गोटेनबर्ग के डाक्टरों ने दावा किया है कि अगले साल से गर्भाशय का प्रत्यारोपण संभव हो सकेगा। उन्होंने यह दावा प्रयोग के दौरान कई जानवरों में गर्भ को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित करने के बाद किया है। ब्रिटिश अख़बार डेली मेल ने प्रमुख शोधकर्ता प्रोफ़ेसर मैटस ब्रान्नस्टॉर्म के हवाले से ख़बर दी है कि अगले साल वे अन्य अंगों की तरह गर्भ को भी प्रत्यारोपित कर पाएंगे। मैटस ने कहा कि इस भविष्यवाणी से उन हज़ारों महिलाओं में एक नई आस जग गई है जिनकी गर्भ धारण करने की उम्र बीत गई है या फिर किसी बीमारी के कारण उनका गर्भाशय निकाल दिया गया है। वैज्ञानिकों की इस टीम ने इससे पहले चूहे, भेड़ और सुअर में इसका सफल परीक्षण किया है। अब उन्हें महिलाओं में ऐसी ही सफलता मिलने की आशा है। इस शोध का निष्कर्ष जर्नल ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनोकोलोजी पत्रिका के नवीनतम अंक में प्रकाशित हुआ है। ग़ौरतलब है कि गर्भाशय का पहला प्रत्यारोपण सऊदी अरब में साल 2000 में हुआ था लेकिन वह सफल नहीं हु

तेरा "वजुद" मुझ में है "माँ"

मैं चुराकर लाई हुं तेरी वो तस्वीर जो हमारे साथ तूने खींचवाई थी मेरे परदेस जाने पर। में चुराकर लाई हुं तेरे हाथों के वो रुमाल जिससे तूं अपना चहेरा पोंछा करती थी। मैं चुराकर लाई हुं वो तेरे कपडे जो तुं पहना करती थी। मैं चुराकर लाई हुं पानी का वो प्याला, जो तु हम सब से अलग छूपाए रख़ती थी। मैं चुराकर लाई हुं वो बिस्तर, जिस पर तूं सोया करती थी। मैं चुराकर लाई हुं कुछ रुपये जिस पर तेरे पान ख़ाई उँगलीयों के नशाँ हैं। मैं चुराकर लाई हुं तेरे सुफ़ेद बाल, जिससे मैं तेरी चोटी बनाया करती थी। जी चाहता है उन सब चीज़ों को चुरा लाउं जिस जिस को तेरी उँगलीयों ने छुआ है। हर दिवार, तेरे बोये हुए पौधे , तेरी तसबीह , तेरे सज़द े , तेरे ख़्वाब , तेरी दवाई , तेरी रज़ाई। यहां तक की तेरी कलाई से उतारी गई वो , सुहागन चुडीयाँ, चुरा लाई हुं “माँ”। घर आकर आईने के सामने अपने को तेरे कपडों में देख़ा तो , मानों आईने के उस पार से तूं बोली , “ बेटी कितनी यादो

तुम्हारे बिना

चाँद मेरे आँगन में हर रोज उतरता भी है, अपनी रुपहली किरणों से नित्य मेरा माथा भी सहलाता है, पर उस स्पर्श में वो स्निग्धता कहाँ होती है माँ, जो तुम्हारी बूढ़ी उँगलियों की छुअन में हुआ करती थी ! चाँदनी हर रोज खिड़की की सलाखों से मेरे बिस्तर पर आ अपने शीतल आवरण से मुझे आच्छादित भी करती है, अपनी मधुर आवाज़ में मुझे लोरी भी सुनाती है, पर उस आवरण की छाँव में वो वात्सल्य कहाँ माँ जो तुम्हारे जर्जर आँचल की ममता भरी छाँव में हुआ करता था, और उस मधुर आवाज़ में भी वह जादू कहाँ माँ जो तुम्हारी खुरदुरी आवाज़ की आधी अधूरी लोरी में हुआ करता था ! सूरज भी हर रोज सुबह उदित होता तो है, अपने आलोकमयी किरणों से गुदगुदा कर सारी सृष्टि को जगाता भी है , लेकिन माँ जिस तरह से तुम अपनी बाहों में समेट कर, सीने से लगा कर, बालों में हाथ फेर कर मुझे उठाती थीं वैसे तो यह सर्व शक्तिमान दिनकर भी मुझे कहाँ उठा पाता है माँ ! दिन की असहनीय धूप में कठोर श्रम के बाद स्वेदस्नात शरीर को सूर्य की गर्मी जो सन्देश देती है, उसमें तुम्हारी दी अनुपम शिक्षा का वह अलौकिक तेज और प्रखर आलोक कहाँ माँ जिसने आज भी जीवन की संघर्षमयी, पथरीली रा

माँ The mother (Urdu Poetry Part 2)

हम  बलाओं में कहीं घिरते हैं तो बेइख्तियार ‘ख़ैर हो बच्चे की‘ कहकर दर पे आ जाती है माँ दूर हो जाता है जब आँखों से गोदी का पला दिल को हाथों से पकड़कर घर को आ जाती है माँ दूसरे ही दिन से फिर रहती है ख़त की मुन्तज़िर दर पे आहट हो हवा से भी तो आ जाती है माँ चाहे हम खुशियों में माँ को भूल जाएँ दोस्तो ! जब मुसीबत सर पे आती है तो याद आती है माँ दूर हो जाती है सारी उम्र की उस दम थकन ब्याह कर बेटे की जब घर में बहू लाती है माँ छीन लेती है वही अक्सर सुकूने ज़िंदगी प्यार से दुल्हन बनाकर जिसको घर लाती है माँ हमने यह भी तो नहीं सोचा अलग होने के बाद जब दिया ही कुछ नहीं हमने तो क्या खाती है माँ ज़ब्त तो देखो कि इतनी बेरूख़ी के बावुजूद बद्-दुआ देती है हरगिज़ और न पछताती है माँ अल्लाह अल्लाह, भूलकर हर इक सितम को रात दिन पोती पोते से शिकस्ता दिल को बहलाती है माँ बेटा कितना ही बुरा हो, पर पड़ोसन के हुज़ूर रोक कर जज़्बात को बेटे के गुन गाती है माँ शादियाँ कर करके बच्चे जा बसे परदेस में दिल ख़तों से और तस्वीरों से बहलाती है माँ अपने सीने पर रखे है कायनाते ज़िंदगी ये ज़मीं इस वास्ते ऐ दोस्त कहलाती है माँ
 आज दो समाचार २३मार्च :- १< ओरंगाबाद :-   में एक बेटे ने अपनी ही  माँ की हत्या कर दी -- मामूली  कहासुनी सामने आई है .हत्यारे बेटे का नाम रमेश नागीरे (२८) बतलाया जाता है .इसका किसी बात  को लेकर अपनी माँ से विवाद हुआ ,जिसके चलते इस कलयुगी बेटे ने अपनी ही माँ को मार डाला .धटना के बाद आरोपी फरार है पोलिस तलाश कर रही है --- २<   मियामी  :-  रोड़ा होल्डर अपने बेटे जेम्स के कम नम्बर आने पर इतनी दुखी  हुई की उसे सबक सिखाने के लिए उसके गले में एक साइन  बोर्ड लटकाकर सडक पर खड़ा कर दिया ताकि उसे पढ़ाई  की अहमियत पता चल सके इस बोर्ड पर लिखा था :--"क्या मुझे शिक्षा की जरूरत है " दरअसल ,रोड़ा अपनी हाई स्कुल की पढाई पूरी नही कर पाई थी --वह नही चाहती थी की जेम्स के साथ भी ऐसा हो --इसलिए परीक्षा में जेम्स के कम नम्बर आए तो उसने उसे सजा देने का फेसला किया -- सोजन्य < आज का आनन्द (पूना से प्रकाशित न्यूज पेपर  )     

अच्छी माँ !

माँ तू कितनी अच्छी है  तू कितनी भोली है  प्यारी -प्यारी है  हमारे घर की दुलारी है  हमरी बगिया की माली है  हम को बोया तुने  हम को सींचा तुने  फिर हम मे खाद डाली  आज हम पेड़ बन चुके है  फल -फूल से लद चुके है  हम रे जीवन मै बहार लाने वाली तू  हम को हर पतझड़ से बचाने वाली तू  खिज़ा से हम को तू ने बचाया  बहारो से हम को तू ने मिलवाया  तेरी छाया पाकर हम परवान चढ़ गए  तेरे साए में रहकर हम निहाल हो गए  हर दुःख से हम को लड़ना तू ने सिखाया  हर मुश्किल से हम को उबरना तू ने सिखाया  मंजिल पर हम को आगे बड़ना तू ने सिखाया  हम तेरे कर्जदार है यह कर्ज केसे उतारे  बस !यही उलझन है तू आ के बतला दे -- आज आँखे तेरे दीदार को तरस रही है  क्योकि तू हम को छोड़ कर स्वर्ग में बस रही है !        

चार बच्चों की मां ने प्रेमी संग मिलकर पति को जिंदा जलाया

चार बच्चों की मां फुलको देवी ने अपने पति चंदर भुईयां को घर के अंदर ही जिंदा जला दिया। यह घटना होलिका दहन की रात शनिवार की है। इस मामले में पुलिस ने मृतक के पुत्र के बयान के आधार पर आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है। इधर घटना के 24 घंटे बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर आग से झुलसे चंदर भुइयां के शव को अपने कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए सोमवार को चतरा भेजा दिया है। पुलिस के अनुसार घटना के पीछे प्रेम-प्रसंग का मामला है। जगन भुईयां का पुत्र चंदर भुईयां टंडवा थाना क्षेत्र के खधैया गांव का रहनेवाला था। फुलको देवी ने 19 मार्च की रात होलिका दहन से पूर्व अपने ही घर में चंदर को बंद कर पहले उसके साथ मारपीट की और बाद में अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसे जिंदा जला दिया। अपने पति को जलाने में उसने केरोसिन तेल का प्रयोग किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लाश के हाथ-पांव बंधे थे। घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी रामयश प्रसाद ने घटनास्थल पर पहुंच कर पूरे मामले का जायजा लिया और तत्काल उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। घटना के वक्त मृतक के माता-पिता रामगढ़ जिले के तोरपा में थे। आरोपी महिला चौकीद
 सबको होली   की बहुत -बहुत शुभ कामनाए --मेरे ब्लोक 'मेरे अरमान मेरे सपने' पर आ   प सबका स्वागत है :- " बुरा न मानो होली है "

एक वचन जो माँ को दिया था

ज़िंदगी है अगर तो तुम जूझो मगर क़र्ज़ माँ का चुकाने का वायदा करो मूलचंद वशिष्ठ बिजनौर के राजेन्द्र नगर , नई बस्ती के रहने वाले हैं । सन् 1983 में उनकी माँ कलावती की मौत हो गई । सन्1982 में राजेन्द्र जी का लड़के विपिन मोहन का चयन एमबीबीएस में हो गया था। कलावती जी ने अपने बेटे मूलचंद से वचन लिया था कि पोते के डाक्टर बनने के बाद वह एक अस्पताल गरीबों के लिए बनवाएंगे , जिसमें गरीबों का पूरी तरह फ्री इलाज किया जाएगा। जिंदगी के उतार चढ़ाव से गुज़र कर अब वे अपने उस वचन को पूरा करने के क़ाबिल हो सके जो कि उन्होंने अपनी माँ को दिया था। उन्होंने अपनी माँ कलावती के नाम पर सिविल लाइन प्रथम पंचवटी कालोनी में एक अस्पताल का निर्माण कराया जिसमें ग़रीबों का इलाज भी मुफ्त होगा और उन्हें दवाइयाँ भी मुफ्त दी जाएँगी । अस्पताल के अलावा कलावती सामुदायिक केंद्र में ग़रीबों की बेटियों की शादी भी मुफ्त में कराई जाएँगी । अस्पताल में डा. रहमान सातों दिन मुफ़्त इलाज करेंगे जबकि डा. विपिन मोहन हफ्ते में एक दिन निःशुल्क उपचार करेंगे। यह घटना हमारे समाज में ऐसे समय सामने आई है जबकि माँ के वचन को और ग़रीबों को तो क्या , ख़ुद माँ

...जिनकी माँ नहीं होती ..!

''हमारी हर खता को मुस्कुराकर माफ़ कर देती ; खुदा नहीं मगर ''माँ' खुदा से कम नहीं होती .'' ''हमारी आँख में आंसू कभी आने नहीं देती ; कि माँ की गोद से बढकर कोई जन्नत नहीं होती .'' ''मेरी आँखों में वो नींद सोने पे सुहागा है ; नरम हथेली से जब माँ मेरी थपकी है देती .'' ''माँ से बढकर हमदर्द दुनिया में नहीं होता ; हमारे दर्द पर हमसे भी ज्यादा माँ ही तो रोती .'' ''खुदा के दिल में रहम का दरिया है बहता ; उसी कि बूँद बनकर ''माँ' दुनिया में रहती .'' ''उम्रदराज माँ कि अहमियत कम नहीं होती ; ये उनसे पूछकर देखो कि जिनकी माँ नहीं होती .''                                            शिखा कौशिक http://shikhakaushik666.blogspot.com/           

रिश्तों का अहतराम लाज़िम है हर इंसान पर

औरतों का दिन मनाया जा रहा है हर तरफ सारी दुनिया कर रही है बिन्ते हव्वा को सलाम माँ हो बेटी हो कि ज़ौजा हो कि बहनें हों शकील उनसे हर रिश्ते का है हम सब पे लाज़िम अहतराम शकील शम्सी , कॉलम हर्फ़े आख़िर , राष्ट्रीय सहारा उर्दू , पृ. 7 , 8 मार्च 2011 shakeelshamsi@gmail.com शब्दार्थ : बिन्ते हव्वा -आदिमाता हव्वा की बेटी , ज़ौजा - पत्नी , अहतराम -आदर , सम्मान

खट्टे-मीठे सपने.....

छन न न से गिरा मन-सपनों की घाटी में, बटोर लाया सपने कुछ खट्टे,कुछ मीठे, पारले की गोलियों जैसे........... अपनी टोली बुलाई- और सपने बांटने लगा....... माँ सिखाती रही है, मिलजुल बाँट के चलना, कम होंगे तो सपनों की घाटी है न ! छ न न से गिर जायेगा मन बटोर लाएगा सपने खट्टे-मीठे - पारले जैसी !

औरत तू जननी हे !

(माता गुजरी व् बालक गोविंद ) औरत  तू जननी हे--एक बहन है--एक बेटी है--एक पत्नीहै-- और इन सबसे ऊपर तू एक माँ है--हमारे गुरू गोविंदसिंह जी ने कहा  हे :-- "एकअच्छी माँ ही एक शूरवीर को जन्म देती हे"   यदि माता गुजरी जी न होती तो,  गुरु गोविन्दसिंह जी जेसे शूरवीर कहाँ होते ?  यदि माँ जिजामाता न होती तो,  शिवाजी कैसे  मराठा -पुत्र कहलाते ? यशोदा माँ ही थी , जिसने कृष्ण का पालन किया | वो देवकी माँ ही थी , जिसने कान्हा को जन्म दिया | रानी कोशल्या भी तो माँ थी,  जिसकी  कोंख से रघुवीर जन्मे | उस कैकई को कैसे भूलू , जिसके वचनों से वनवास गए |  वो भी माँ का एक रूप थी , जिसके कारण रावण का संहार हुआ |   वो माँ ही थी जिसकी कोंख से , कभी भगत,कभी सुभाष,कभी प्रताप पैदा हुए |   वो माँ ही थी ? वो माँ ही है --   जिसने हमे सूखे में सुलाया | नो माह हमारा बोझा ढोहा,   रातो को जागकर, हमे तिल -तिल बड़ा किया,  हमारी हर ख़ुशी पर अपनी खुशियों को निहाल किया | वो माँ ही हे--जो एक मांस के लोथड़े  को,  कभी डॉ.,कभी वकील,कभी इंजिनियर बनाती है, और इन सबसे ऊपर उसे एक इंसान बनाती है- माँ तुझे सलाम