ये ऐसा बंधन है कभी टूट नहीं सकता , ये ऐसी दौलत है कोई लूट नहीं सकता , जीवन भर देती हम सबको दुआएं हम सब की माएं ;हम सबकी माएं. वो अपना निवाला बच्चे को दे देती , बदले में बच्चे से भला माँ है क्या लेती ? अपने पर ले लेती वो सारी बलाएँ , हम सबकी माएं,हम सब की माएं जो भटके कभी हम वो राह दिखाती, जीने का सलीका माँ ही तो सिखाती ममता के मोती बच्चों पे लुटाएं , हम सबकी माएं.हम सबकी माएं . जो गोद में लेकर रोते को हँसाती; जो ऊँगली पकड़कर चलना है सिखाती , जो खुद जगती रहकर बच्चे को सुलाएं हम सब की माएं ,हम सबकी माएं . शिखा कौशिक http://shikhakaushik666.blogspot.com
बस एक माँ है जो मुझ से कभी ख़फ़ा नहीं होती