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सलाम आखरी !

' कल पेपर में कही पढ़ा की बच्चो ने अपनी बूढी  माँ को धर से निकाल दिया ' --कहा तेरा ख्याल कोन रखेगा ? ऐसा तो अक्सर सुनने को मिलता  ही हे--क्या मन स्थिति होती होगी उस समय उस दयनीय माँ की ---वही चित्रण करने की एक कोशीश ---      एक बूढी माँ की दयनीय पुकार ----- आखरी वक्त हे साँस भी हे आखरी , जिन्दगी की हर बात हे आखरी , तोबा ! करती हु अब ,किसी को नही जनूंगी * न अब किसी के सहारे अपनी जिन्दगी पूरी करुगी , जीते- जी मेरी इज्जत किसी ने नही की , मरकर करेगे ये एतबार नही करुँगी  , मुझ को मेरे अपनो ने नहलाकर कफ़न दे दिया , कुछ धड़ी भी मेरे साथ न बिताई की दफ्न कर दिया , दुनियां वालो ! मुबारक यह एह्साने -जहां तुमको , कर चले हम तो सलाम आखरी-आखरी !!!              * जन्म देना |