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Showing posts with the label kavita

माँ ! वो पारस है !

माँ ! वो पारस है ! कभी माँ के थके पैरों को दबा कर देखो ख़ुशी जन्नत की अपने दिल में तुम पा जाओगे . जिसने देकर के थपकी सुलाया है तुम्हे क्या उसे दर्द देकर चैन से सो पाओगे ? करीब बैठकर माँ की नसीहतें भी सुनो कई गुस्ताखियाँ करने से तुम बच जाओगे . उसने हर फ़र्ज़ निभाया है बड़ी तबियत से उसके हिस्से का क्या आराम तुम दे पाओगे ? उम्रदराज़ हुई चल नहीं वो पाती है उसे क्या छोड़ पीछे आगे तुम बढ जाओगे ? जिसने कुर्बान करी अपनी हर ख़ुशी तुम पर उसके होठों पे क्या मुस्कान सजा पाओगे ? तुम्हे छू कर के मिटटी से बनाती सोना माँ ! वो पारस है उसे भूल कैसे पाओगे ? शिखा कौशिक http://shikhakaushik666.blogspot.com

सबसे खुशनसीब

सबसे   खुशनसीब  औलाद जो सदा माँ के करीब  है ; सारी दुनिया में वो ही खुशनसीब  है . जिसको परवाह नहीं माँ के सुकून की ; शैतान का वो बंदा खुद अपना रकीब है . दौलतें माँ की दुआओं की नहीं सहेजता  इंसान ज़माने में वो सबसे गरीब है . जो लबों पे माँ के मुस्कान सजा दे  दिन रात उस बन्दे के दिल में मनती ईद है . माँ जो खफा कभी हुई गम-ए -बीमार हो गए ; माँ की दुआ की हर दवा इसमें मुफीद है . है शुक्र उस खुदा का जिसने बनाई माँ ! मुबारक हरेक लम्हा जब उसकी होती दीद है .                              शिखा कौशिक  htttp://shikhakaushik666.blogspot.com

माँ,मेरी माँ,

माँ,मेरी माँ,    खुद को क्यों न देखती हो? बच्चे कुछ बन जाये मेरे,    हरदम ये ही  सोचती हो. बच्चे खेलें तो तुम खुश हो,     पढ़ते देखके व्यस्त काम में, बच्चे सोते तब भी जगकर,     खोयी हो बस इस ख्याल में, चैन से बच्चे सोये मेरे इसीलिए तुम जगती हो! बच्चे कुछ बन जाये मेरे हरदम ये ही सोचती हो. बच्चे जो फरमाइश करते,               आगे बढ़ पूरी करती. अपने खाने से पहले तुम ,             बच्चों का हो पेट भरती . बच्चे पर कोई आंच जो आये,आगे बढ़कर झेलती हो! बच्चे कुछ बन जाएँ मेरे हरदम ये ही सोचती हो. बच्चे केवल खुद की सोचें,         तुम बस उनको देखती हो. तुम्हारे लिए कुछ करें न करें,        तुम उनका सब करती हो. अच्छे  जीवन के सपने तुम,बच्चों के लिए बुनती हो! बच्चे कुछ बन जाये मेरे,हरदम ये ही सोचती हो.                          शालिनी कौशिक  http:/...

माँ एक एक श्वास है

कोई मुझसे पूछता -फरिश्ते से मिली हो कभी ? मैं उसे ये बोलती ''मै माँ से मिलकर आई  हूँ ! कोई मुझसे पूछता -तू कैसे खुशमिजाज है ? मै उसे ये बोलती -''ये माँ का आशीर्वाद है . कोई मुझसे पूछता -''क्या नहीं जन्नत की आरजू ? मैं उसे ये बोलती -''मेरे पास माँ की गोद है . कोई मुझसे पूछता -''देखा है खूबसूरत कोई ? मैं उसे ये बोलती ''मेरी माँ से सुन्दर कौन है ! कोई मुझसे पूछता -''क्या है तू दौलतमंद भी ? मैं उसे ये बोलती -''माँ की दुआएं साथ हैं . कोई मुझ से  पूछता -''माँ से अलग क्या कुछ नहीं ? मैं उसे ये बोलती -'' दिल की धड़कन है वही ,माँ एक एक श्वास है !             शिखा कौशिक  http://shikhakaushik666.blogspot.com