माँ ! वो पारस है ! कभी माँ के थके पैरों को दबा कर देखो ख़ुशी जन्नत की अपने दिल में तुम पा जाओगे . जिसने देकर के थपकी सुलाया है तुम्हे क्या उसे दर्द देकर चैन से सो पाओगे ? करीब बैठकर माँ की नसीहतें भी सुनो कई गुस्ताखियाँ करने से तुम बच जाओगे . उसने हर फ़र्ज़ निभाया है बड़ी तबियत से उसके हिस्से का क्या आराम तुम दे पाओगे ? उम्रदराज़ हुई चल नहीं वो पाती है उसे क्या छोड़ पीछे आगे तुम बढ जाओगे ? जिसने कुर्बान करी अपनी हर ख़ुशी तुम पर उसके होठों पे क्या मुस्कान सजा पाओगे ? तुम्हे छू कर के मिटटी से बनाती सोना माँ ! वो पारस है उसे भूल कैसे पाओगे ? शिखा कौशिक http://shikhakaushik666.blogspot.com
बस एक माँ है जो मुझ से कभी ख़फ़ा नहीं होती