माँ कभी मरती नही हैं ..? वो सिर्फ जिस्म छोडती हैं ,चोला बदलती हैं ,अपने बच्चो से बिदा लेती हैं ! हर माँ अपने आप में परिपूर्ण होती हैं ! स्त्री का बस 'माँ' होना ही अपने आप में सम्पूर्ण हैं | पुरुष तो जीवन -भर ' माँ ' का अनुचर ही होता हैं ,जीवन -भर माँ बनने का प्रयास करता रहता हैं पर सिर्फ 'पिता' बनकर रह जाता हैं ! पर माँ अपनी साधना से पुरुष को अमृत पिला कर महाबली बनाती है ? इसलिए माँ कभी मरती नहीं..? वो अपने विचारो से, अपनी आकांशाओ से,अपने समर्पण से, हमेशा जीवित रहती है ..और हम जब तक उसके साए में रहते हैं तब तक सुरक्षित रहते हैं ! जैसे ही वो साया हमारे ऊपर से उठ जाता हैं तो हम निरह प्राणी बन जंगल -जंगल घूमते रहते हैं ..एक अनबुझ प्यास के लिए ..? फिर वो अमृत हमे नही मिलता ???
बस एक माँ है जो मुझ से कभी ख़फ़ा नहीं होती