पैसा, शोहरत और बेक़ैद आज़ादी का नाम कामयाबी नहीं है Success

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  • Friday, June 7, 2013
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  • DR. ANWER JAMAL
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  • ज़िया ख़ान मर गई. उसने 3 दिन पहले पंखे से लटक कर खुदकुशी कर ली थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया है कि मरने से पहले उसने शराब भी पी थी. मरने से पहले उसने सूरज पंचोली को फ़ोन किया था. अखबारों के मुताबिक़- 
    बॉलिवुड ऐक्ट्रेस जिया खान की खुदकुशी केस में सूरज पंचोली के अलावा एक नाम बार-बार आ रहा है और वह है नीलू। जुहू पुलिस ने बुधवार को इस नीलू के रहस्य से पर्दा उठाया। पहले शक किया जा रहा था कि यह नीलू सूरज और जिया की प्रेम कहानी का एक तीसरा कोण है, पर जुहू पुलिस के एक अधिकारी ने एनबीटी को बताया कि यह नीलू किसी कम उम्र की लड़की का नाम नहीं, एक महिला का है। यह नीलू पेश से जूलर है। शायद जूलरी की शॉपिंग के दौरान जिया और सूरज की नीलू से पहचान हुई होगी।
    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सोमवार रात को जब जिया ने सूरज को अपने घर मिलने के लिए एसएमएस किया, तो सूरज ने कहा कि उसे नीलू से 10 बजे मिलने जाना है। इसके कुछ घंटे बाद जब जिया ने नीलू को फोन किया कि क्या आपके यहां सूरज है, तो नीलू ने कहा कि नहीं, वह तो कल आनेवाला है। इस पर जिया ने मान लिया कि शायद सूरज किसी और लड़की के पास गया है। इसी को लेकर वह सूरज पर भड़क उठी।
    बाद में सूरज ने नीलू से जिया की गलतफहमी को दूर करने के लिए फोन भी करवाया, पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सूरज ने पुलिस को बताया कि वह जिया को नीलू से मिलने से जुड़े एसएमएस में दस बजे के साथ एएम (यानी अगले दिन सुबह दस बजे) लिखना भूल गया था, इसलिए यह गलतफहमी हुई।
    सूरज ने पुलिस को यह भी बताया कि वह और जिया करीब एक साल से रिलेशनशिप में थे। करीब आठ महीने पहले जब जिया ने खुदकुशी की पहली बार कोशिश की थी, तो सूरज के पिता आदित्य ने सूरज को जिया से अलग रहने की सलाह दी थी। लेकिन सूरज ने फिर भी यह रिश्ते बनाए रखे। सूरज ने बाद में जिया की मां रबिया को लंदन फोन किया और उसे अपनी बेटी के साथ मुंबई रहने की सलाह दी।
    आदमी कामयाबी पाना चाहता है क्योंकि वह कामयाबी पाने के लिये ही बना है. 
    ...लेकिन असल में इंसान को सबसे पहले यह समझना होगा कि कामयाबी किसे कहते हैं ?
    पैसा, शोहरत और बेक़ैद आज़ादी पा लेने का नाम कामयाबी नहीं है और न ही कोई भी आदमी खुद से तय कर सकता है कि कामयाबी क्या है ?
    काम को पूरा कर लेने का नाम कामयाबी या सफलता है.
    इंसान का काम या कर्म क्या है ?
    इसे जानने के लिये ही ईश्वर की ज़रूरत पड़ती है . 
    कर्म ही धर्म है .
    आज इंसान ईश्वर और धर्म से कटकर जी रहा है और इस जीने के हाथों मर रहा है .
    हमने बार बार कहा है कि आत्महत्या करने वालों को अपना आदर्श न बनाएं. जो इनका अनुसरण करता है या इनके जैसा बनना चाहता है वह भी आत्महत्या के मार्ग पर चल पड़ता है.
    एक ताज़ा ख़बर हमारे इस दावे की दलील है -

    जिया खान के गम में 12 साल के लड़के ने दी जान

    2 comments:

    तुषार राज रस्तोगी said...

    बेहद दुःख की बात है यह | भगवान् जिया खान की आत्मा को शांति प्रदान करे |

    रविकर said...

    बेबाक विश्लेषण-
    सचेत करती प्रस्तुति-

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