बाद इसके किसी भी दिन क्या माँ है याद फिर आती .-HAPPY MOTHER'S DAY

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  • Sunday, May 12, 2013
  • by
  • Shalini Kaushik
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  • तरक्की इस जहाँ में है तमाशे खूब करवाती ,
    मिला जिससे हमें जीवन उसे एक दिन में बंधवाती .


    महीनों गर्भ में रखती ,जनम दे करती रखवाली ,
    उसे औलाद के हाथों है कुछ सौगात दिलवाती .


    सिरहाने बैठ माँ के एक पल भी दे नहीं सकते ,
    दिखावे में उन्हीं से होटलों में मंच सजवाती .



    कहे माँ लाने को ऐनक ,नहीं दिखता बिना उसके ,
    कुबेरों के खजाने में ठन-गोपाल बजवाती .


    बढ़ाये आगे जीवन में दिलाती कामयाबी है ,
    उसी मैय्या को औलादें, हैं रोटी को भी तरसाती .


    महज एक दिन की चांदनी ,न चाहत है किसी माँ की ,
    मुबारक उसका हर पल तब ,दिखे औलाद मुस्काती .


    याद करना ढूंढकर दिन ,सभ्यता नहीं हमारी है ,
    हमारी मर्यादा ही रोज़ माँ के पैर पुजवाती .



    किया जाता याद उनको जिन्हें हम भूल जाते हैं ,
    है धड़कन माँ ही जब अपनी कहाँ है उसकी सुध जाती .


    वजूद माँ से है अपना ,शरीर क्या बिना उसके ,
    उसी की सांसों की ज्वाला हमारा जीवन चलवाती .



    शब्दों में नहीं बंधती ,भावों में नहीं बहती ,
    कड़क चट्टान की मानिंद हौसले हममे भर जाती .


    करे कुर्बान खुद को माँ,सदा औलाद की खातिर ,
    क्या चौबीस घंटे में एक पल भी माँ है भारी पड़ जाती .



    मनाओ इस दिवस को तुम उमंग उत्साह से भरकर ,
    बाद इसके किसी भी दिन क्या माँ है याद फिर आती .


    बाँटो ''शालिनी''के संग रोज़ गम ख़ुशी माँ के,
    फिर ऐसे पाखंडों को ढोने की नौबत नहीं आती .


    शालिनी कौशिक
    [कौशल]



    2 comments:

    डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' said...

    sundar bhavmayi prastuti .aabhar

    DR. ANWER JAMAL said...

    वास्तव में आज इंसानियत के सामने आदर्श का संकट है.
    Nice.

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