किशोरों का मस्तिष्क ठीक से काम नहीं करता !

Posted on
  • Thursday, October 6, 2011
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
  • in
  • Labels:

  • लंदन। माता-पिता अक्सर अपने किशोरवय बच्चों के व्यवहार से परेशान रहते हैं, लेकिन इसमें बच्चों का नहीं बल्कि उनके मस्तिष्क का दोष होता है।
    नए अध्ययन के मुताबिक, किशोरावस्था के दौरान मस्तिष्क ठीक ढंग से काम नहीं करता। शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि उम्र के इस मोड़ पर मस्तिष्क में नई कोशिकाओं को बनाने की प्रक्रिया बाधित होती है, जो नाटकीय परिणाम देती है।
    अखबार 'डेली मेल' के मुताबिक किशोरावस्था में नई कोशिकाओं के निर्माण में आने वाली बाधाओं के कारण उनमें न केवल व्यवहारिक समस्या पैदा होती है, बल्कि उनके बड़े होने पर सीजोफ्रेनिया जैसी दिमागी बीमारी का शिकार होने का खतरा भी होता है। ऐसा तब होता है, जब मस्तिष्क के हिप्पोकैंपस भाग में न्यूरॉन्स बनने में कमी आ जाती है।
    चूहों पर किए गए प्रयोग से पता चला कि यदि मस्तिष्क की कोशिकाओं के सुचारू विकास में बाधा आती है, तो वे असामाजिक हो जाते हैं। यही बाधा अगर वयस्क होने पर उत्पन्न होती है, तो ऐसा कोई प्रभाव नहीं दिखता।
    अध्ययन के प्रमुख प्रोफेसर एरी काफमैन ने 'न्यूरोसांइस जर्नल' में लिखा है कि यह अध्ययन सामाजिक विकास को समझने में मददगार होगा। इस अध्ययन से यह भी पता चला कि किशोरावस्था में बनी मस्तिष्क की कोशिकाएं उसके क्रियाकलापों और व्यवहार में बदलाव करती है।
    Source : 

    2 comments:

    वन्दना said...

    आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

    NISHA MAHARANA said...

    सार्थक एवं सारगर्भित रचना।

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • तुम गाँधी तो नहीं ! - ना ना पीछे मुड़ कर ना देखना क्या पाओगे वहाँ वीभत्स सचाई के सिवा जिसे झेलना तुम्हारे बस की बात नहीं तुम कोई गाँधी तो नहीं ! सामने देखो तुम्हें आगे बढ़ना ...
    • शापित मंजिलें - *... स्थितियाँ * *बदल देती हैं * *राह जिंदगी की ...* *... मंजिलें* *अक्सर अकेली रह * *शापित हो जाया करती हैं !!* *सु-मन *
    • बातें हैं बातों का क्या ....... - अम्बुआ की डाली पर चाहे न कुहुके कोयल किसी अलसाई शाम से चाहे न हो गुफ्तगू कोई बेनामी ख़त चाहे किसी चौराहे पर क्यों न पढ़ लिया जाए ज़िन्दगी का कोई नया शब्दक...
    • पहाड़ों के बीच बसा अलसीगढ़ - #हिन्दी_ब्लागिंग मनुष्य प्रकृति की गोद खोजता है, नन्हा शिशु भी माँ की गोद खोजता है। शिशु को माँ की गोद में जीवन मिलता है, उसे अमृत मिलता है और मिलती है सुरक...
    • केवल राष्ट्र के लिए था यह सृजन - देश की स्वतंत्रता के लिए 1857 से लेकर 1947 तक क्रान्तिकारियों व आंदोलनकारियों के साथ ही लेखकों, कवियों और पत्रकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय...
    • कृष्ण लीला - ग्वाल बाल साथ ले कान्हा ने धूम मचाई गोकुल की गलियों में ! खिड़की खुली थी घर में छलांग लगाई खाया नवनीत खिलाया मित्रों को भी कुछ खाया कुछ फैलाया आहट ...
    • नींद बनाम ख्व़ाब - मैंने अपनी नींदें बेच, कुछ ख्वाब खरीदे थे। रख दिया था सहेज कर, उन्हें अपनी पलकों तले। वक़्त की बारिशों औ आंधी से, कुछ उड़ गए, कुछ बह गए। कुछ को बचाया जतन...
    • तुम राम बनके दिल यूँ ही दुखाते रहोगे . - [image: Image result for seeta agni pariksha image] अवसर दिया श्रीराम ने पुरुषों को हर कदम , अग्नि-परीक्षा नारी की तुम लेते रहोगे , करती रहेगी सीता सदा मर्य...
    • - गज़ल 1 मुहब्बत से रिश्ता बनाया गया उसे टूटते रोज पाया गया मुहब्बत पे उसकी उठी अँगुलियाँ सरे बज़्म रुसवा कराया गया यहाँ झूठ बिकता बड़े भाव पर मगर सच को ठेंगा द...
    • माँ तुझे प्रणाम - *माँ तुझे प्रणाम* *शत शत नमन कोटि प्रणाम * *माँ तुझे प्रणाम ।* *जब मैं तेरी कोख में आई * *तूने स्पर्श से बताया था * *ममता का कोई मोल नहीं * *तूने ही सि...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • नया साल ! - समर घर से निकला तो पत्नी और बच्चों के लिए गिफ्ट पहले ही खरीदता हुआ होटल पहुंचा था। रात में प्रोग्राम ख़त्म करके सीधे घर भागेगा क्यो...
    • वेदों में गायन कला - *- डॉ. शरद सिंह* *गायन मानव की संवेदनाओं को जागृत करता है.आज दुनिया भर में संगीत के महत्व पर वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं . पाश्चात्य जगत के व...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -9) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना पुराना जीवन याद करने लगती > हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में > ...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.