माँ ! वो पारस है !

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  • Friday, July 8, 2011
  • by
  • शिखा कौशिक
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  • माँ ! वो पारस है !


    कभी माँ के थके पैरों को दबा कर देखो
    ख़ुशी जन्नत की अपने दिल में तुम पा जाओगे .

    जिसने देकर के थपकी सुलाया है तुम्हे
    क्या उसे दर्द देकर चैन से सो पाओगे ?

    करीब बैठकर माँ की नसीहतें भी सुनो
    कई गुस्ताखियाँ करने से तुम बच जाओगे .

    उसने हर फ़र्ज़ निभाया है बड़ी तबियत से
    उसके हिस्से का क्या आराम तुम दे पाओगे ?

    उम्रदराज़ हुई चल नहीं वो पाती है
    उसे क्या छोड़ पीछे आगे तुम बढ जाओगे ?

    जिसने कुर्बान करी अपनी हर ख़ुशी तुम पर
    उसके होठों पे क्या मुस्कान सजा पाओगे ?

    तुम्हे छू कर के मिटटी से बनाती सोना
    माँ ! वो पारस है उसे भूल कैसे पाओगे ?

    शिखा कौशिक

    5 comments:

    Vivek Jain said...

    करीब बैठकर माँ की नसीहतें भी सुनो
    कई गुस्ताखियाँ करने से तुम बच जाओगे .

    वाह,आभार- विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

    रविकर said...

    जिसने कुर्बान करी अपनी हर ख़ुशी तुम पर
    उसके होठों पे क्या मुस्कान सजा पाओगे ?

    सुन्दर प्रस्तुति,
    हार्दिक बधाई ||

    Manish Kr. Khedawat said...

    behad umda :clap: :clap:

    maa hasti hi aisi hoti hai :)
    Sakht Raahon me bhi aasaan safar lagta hai...
    Yeh meri maa ki duaaon ka asar lagta hai...

    DR. ANWER JAMAL said...

    Nice post.

    Dinesh pareek said...

    मुझे क्षमा करे की मैं आपके ब्लॉग पे नहीं आ सका क्यों की मैं कुछ आपने कामों मैं इतना वयस्थ था की आपको मैं आपना वक्त नहीं दे पाया
    आज फिर मैंने आपके लेख और आपके कलम की स्याही को देखा और पढ़ा अति उत्तम और अति सुन्दर जिसे बया करना मेरे शब्दों के सागर में शब्द ही नहीं है
    पर लगता है आप भी मेरी तरह मेरे ब्लॉग पे नहीं आये जिस की मुझे अति निराशा हुई है
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

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