माँ

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  • Thursday, June 30, 2011
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  • शिखा कौशिक
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  • vidya ji has posted this post on her blog ''LOVE EVERYBODY ''.her blog's URL is -''http://sarapyar.blogspot.com''

    माँ

    माँ शब्द दिल से कहते ही मानों हमारा सारे दुःख दूर हो जाते है |
    मानों हमें दुनिया का सुख मिल जाता है !"माँ " हमें सबसे जयादा
    प्यार करती है ||
    माँ घर मे सबसे पहले उठती है /सबके लिय खाना आदि बनाती है /
    सबके जरुरत का ध्यान रखती है/समय समय पर सब का काम करती है
    माँ प्यार , दया और ममता की मूर्ति है ! माँ कभी अपने कर्तब्यो
    से मुह नाहे मोड़ती |वह घर मे सबको मिलकर रहना है |बच्चो के सुख
    को ही अपना सुख मानतीहै |वह कभी किसी से गुस्सा नही करती |
    कोई गलत बात बोले तो भी चुप हीरहती है |फिर भी उसका भला हीचाहती है|
    हमने भगवान को नही देखा |पर हम अपनी माँ में ही भगवान को देखसकते ह''
    shikha kaushik

    7 comments:

    शालिनी कौशिक said...

    vidhya ji ki ye post yahin ke liye mahtavapoorn hai aur shikha ji aapne ise yahan lakar bahut sundar karya kiya hai.vidhya ji bahut achchha likha hai aapne maa par .aapko bahut bahut badhai.

    रेखा said...

    माँ को समर्पित ऐसी अनोखी रचना को पढवाने के लिए धन्यवाद

    रविकर said...

    ma sab jagah par bhali

    yaha bhi ma

    meri ma

    DR. ANWER JAMAL said...

    @ शिखा जी ! आपने मां का जो चित्रण किया है। पहले अक्सर घरों में ऐसी ही मांएं हुआ करती थीं। आप और हम ख़ुशनसीब हैं कि हमें ऐसी ही मांएं मिलीं लेकिन आजकल बहुत मांएं अपनी कोख भी किराए पर दे रही हैं और अपने करिअर की ख़ातिर ‘डायन‘ तक बन चुकी हैं।
    देखिए मेरा एक लेख
    डायना बनने की चाह में औरतें बन गईं डायन Vampire

    शिखा कौशिक said...

    Anwar ji -this is not my post .this is actually VIDHYA ji 's post .i have posted this here .on the other hand your view is 50% right not 100%.

    upendra shukla said...

    bahut bahut dhanyawaad
    jo aapne hame itni acchi lekhni padne ko di
    "samrt bundelkhand"

    V.P. Singh Rajput said...

    बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति.

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