समाज का डर

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  • Monday, June 27, 2011
  • by
  • Prerna Argal
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  • समाज का डर

    4 comments:

    Manish Kr. Khedawat said...

    jindagi ki sachhai ko bakhoobi bayan kiya hai aapne !
    Bahut sunder rachna ! badhai !
    ___________________________________
    ...दिल में कसक आज़ भी हैं ||

    रविकर said...

    करते रहो प्रहार,
    बात बन जायगी जरुर |
    आज हम समझे हैं-
    कल दुनिया भी समझ जाएगी जरुर ||
    तलवार से भी तेज धार वाली ये कलम
    चलाते जाओ---
    मंजिल आएगी जरुर ||

    DR. ANWER JAMAL said...

    समाज का डर अच्छा है अगर समाज अच्छा हो क्योंकि अच्छा समाज बुरी बातों से रोकता है जबकि बुरा समाज डराता है अच्छे लोगों को । भटके हुए लोगों के बीमार समाज से डरना बेकार है ।

    सहमत ।

    शालिनी कौशिक said...

    समाज का डर अच्छा है अगर समाज अच्छा हो क्योंकि अच्छा समाज बुरी बातों से रोकता है जबकि बुरा समाज डराता है अच्छे लोगों को । भटके हुए लोगों के बीमार समाज से डरना बेकार है ।
    anwar jamal ji ki ye tippani aapki hi nahi sabhi blogs ki post ke liye mahtvapoorn hai.
    nice post.

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