माँ को शीश नवाना है.

Posted on
  • Wednesday, June 1, 2011
  • by
  • Shalini Kaushik
  • in
  • Labels:

  • होगा जब भगवान् से मिलना हमें यही तब कहना है,
    नमन तुम्हे करने से पहले माँ को शीश नवाना है.

    माँ ने ही सिखलाया हमको प्रभु को हर पल याद करो,
    मानव जीवन दिया है तुमको इसका धन्यवाद् करो.
    माँ से ही जाना है हमने क्या क्या तुमसे कहना है,
    नमन तुम्हे करने से पहले माँ को शीश नवाना है.

    जीवन की कठिनाइयों को गर तुम्हे पार कर जाना है ,
    प्रभु के आगे काम के पहले बाद में सर ये झुकाना है.
    शिक्षा माँ की है ये हमको तुमको ही अपनाना है,
    नमन तुम्हे करने से पहले माँ को शीश नवाना है.

    माँ कहती है एक बार गर प्रभु के प्रिय बन जाओगे,
    इस धरती पर चहुँ दिशा में बेटा नाम कमाओगे.
    तुमसे मिलवाया है माँ ने इसीलिए ये कहना है,
    नमन तुम्हे करने से पहले माँ को शीश नवाना है.
                   शालिनी कौशिक 

    6 comments:

    शिखा कौशिक said...

    maa ki mahima hi aisi hai -maa me rab dikhta hai .My salute to MOTHER .

    DR. ANWER JAMAL said...

    Raat ko 3 baje main kahta hun ise
    Nice post.

    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/06/dr-anwer-jamal.html

    दिगम्बर नासवा said...

    माँ ने ही सिखलाया हमको प्रभु को हर पल याद करो,
    मानव जीवन दिया है तुमको इसका धन्यवाद् करो.
    माँ से ही जाना है हमने क्या क्या तुमसे कहना है,
    नमन तुम्हे करने से पहले माँ को शीश नवाना है...
    बहुत खूब .. जब माँ को नमन कर लिया तो ईश्वर तो मान ही जाएँगे ... लाजवाब रचना है ...

    शालिनी कौशिक said...

    shikha ji aur digambar naswa ji aap dono ka hardik dhanyawad.
    dr.anwar jamal sahab din ke 2.31 par fursat me aapka bhi hardik dhanyawad karti hoon ki aapne rat ke 3.00 baje maa ko sheesh navaya.

    Sunil Kumar said...

    माँ की शीश नवाना प्रभु के आगे शीश नावाने के समान है , सुंदर रचना , बधाई

    Manish Kumar Khedawat said...

    bahut khoobsurat rachna
    shalini zi :)

    ____________________________________

    मैं , मेरा बचपन और मेरी माँ

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • क्या दीवाली लक्ष्मी जयन्ती है? - एक मान्यता के अनुसार दीपावली ‘लक्ष्मी जयन्ती’ अर्थात् लक्ष्मी के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। निश्चित ही यह कल्पना अर्वाचीन है, क्योंकि प्राचीन देवताओं...
    • जीएसटी ने मारा धक्का ,मुंह खोले महंगाई खड़ी ..... - वसुंधरा के हर कोने को जगमग आज बनायेंगे , जाति-धर्म का भेद-भूलकर मिलकर दीप जलाएंगे . ..........................................................................
    • दीवाली इस वर्ष - [image: Happy Diwali and swachchhata abhiyan - pics के लिए चित्र परिणाम] जब ज्योति जली विष्णुप्रिया के मंदिर में तम घटा घर के हर कोने का जगमग मन मंदिर हु...
    • अपनी बचा लूं और दूसरे की रीत दूँ - पहली बार अमेरिका 2007 में जाना हुआ था। केलिफोर्निया में रेड-वुड नामक पेड़ का घना जंगल है। हम मीलों-मील चलते रहे लेकिन जंगल का ओर-छोर नहीं मिला। इस जंगल में...
    • खूँटा - तुमने ही तो कहा था कि मुझे खुद को तलाशना होगा अपने अन्दर छिपी तमाम अनछुई अनगढ़ संभावनाओं को सँवार कर स्वयं ही तराशना होगा अपना लक्ष्य निर्धारित करना ह...
    • हुनर - *समेट लेना खुद को , अपने दायरे में * *सिखा देता है ये हुनर , वक़्त आहिस्ता आहिस्ता !!* *सु-मन *
    • We never can change our history - Dr Sharad Singh - *Dr Sharad Singh, * *Author & Historian**Thought of the Day* *History give us a chance to change ourselves but we never can change our history.* *- Dr Shar...
    • झूठ की लंका ! - गाँव में समाधान बैठक होने वाली थी और उसमें मंत्रीजी का आना तय था। सरपंच गाँव में माहौल बनाने के लिए लोगों को पहले से स...
    • - * गज़ल * बेवफाई के नाम लिखती हूँ आशिकी पर कलाम लिखती हूँ खत में जब अपना नाम लिखती हूँ मैं हूँ उसकी जिमाम लिखती हूँ आँखों का रंग लाल देखूँ तो उस नज़र को मैं...
    • अँधा युग - गोली और गाली जो बन चुके हैं पर्यायवाची इस अंधे युग की बनकर सौगात लगाते हैं ठिकाने बडबोली जुबान को तुम , तुम्हारी जुबान और तुम्हारी कलम रहन है सत्ता की...
    • नींद बनाम ख्व़ाब - मैंने अपनी नींदें बेच, कुछ ख्वाब खरीदे थे। रख दिया था सहेज कर, उन्हें अपनी पलकों तले। वक़्त की बारिशों औ आंधी से, कुछ उड़ गए, कुछ बह गए। कुछ को बचाया जतन...
    • माँ तुझे प्रणाम - *माँ तुझे प्रणाम* *शत शत नमन कोटि प्रणाम * *माँ तुझे प्रणाम ।* *जब मैं तेरी कोख में आई * *तूने स्पर्श से बताया था * *ममता का कोई मोल नहीं * *तूने ही सि...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -4) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से वे जग जाती हैं,और पुराना जीवन याद करने लगती हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में श...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.