माँ तुझे सलाम

Posted on
  • Saturday, May 7, 2011
  • by
  • Shalini Kaushik
  • in
  • Labels:
  • होगा जब भगवान् से मिलना हमें यही तब कहना है,
    नमन तुम्हे करने से पहले माँ को शीश नवाना है.

    माँ ने ही सिखलाया हमको प्रभु को हर पल याद करो,
    मानव जीवन दिया है तुमको इसका धन्यवाद् करो.
    माँ से ही जाना है हमने क्या क्या तुमसे कहना है,
    नमन तुम्हे करने से पहले माँ को शीश नवाना है.

    जीवन की कठिनाइयों को गर तुम्हे पार कर जाना है ,
    प्रभु के आगे काम के पहले बाद में सर ये झुकाना है.
    शिक्षा माँ की है ये हमको तुमको ही अपनाना है,
    नमन तुम्हे करने से पहले माँ को शीश नवाना है.

    माँ कहती है एक बार गर प्रभु के प्रिय बन जाओगे,
    इस धरती पर चहुँ दिशा में बेटा नाम कमाओगे.
    तुमसे मिलवाया है माँ ने इसीलिए ये कहना है,
    नमन तुम्हे करने से पहले माँ को शीश नवाना है.
                   शालिनी कौशिक 

    5 comments:

    शिखा कौशिक said...

    shalini ji bahut sundar bhavon ko prastut kiya hai .

    शिखा कौशिक said...

    maa aisi hi hoti hai .bahut sundar

    शिखा कौशिक said...

    aapne bahut sundar shabdon me maa ki mahima ka gungaan kiya hai .aabhar .

    शिखा कौशिक said...

    kavita me shabdon ka chayan bahut sateek hai .saral bhasha shaili me prastut aapki kavita man ko bha gayee .

    शिखा कौशिक said...

    maa shabd apne me hi sare sansar ko samete hai .aapne bahut khoobsoorti se iska vishleshan kiya hai .

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • विश्वास - ‘विश्वास’ कितना आभासी है ना यह शब्द ! कितना क्षणिक, कितना छलनामय, कितना भ्रामक ! विश्वास के जिस धागे से बाँध कर कल्पना की पतंग को आसमान की ऊँच...
    • राजीव गांधी :अब केवल यादों में - शत शत नमन - एक नमन राजीव जी को आज उनकी जयंती के अवसर पर.राजीव जी बचपन से हमारे प्रिय नेता रहे आज भी याद है कि इंदिरा जी के निधन के समय हम सभी कैसे चाह रहे थे कि ...
    • हमें अपनी झील के आकर्षण में बंधे रहना है - #हिन्दी_ब्लागिंग मैं कहीं अटक गयी हूँ, मुझे जीवन का छोर दिखायी नहीं दे रहा है। मैं उस पेड़ को निहार रही हूँ जहाँ पक्षी आ रहे हैं, बसेरा बना रहे हैं। कहाँ ...
    • शापित मंजिलें - *... स्थितियाँ * *बदल देती हैं * *राह जिंदगी की ...* *... मंजिलें* *अक्सर अकेली रह * *शापित हो जाया करती हैं !!* *सु-मन *
    • बातें हैं बातों का क्या ....... - अम्बुआ की डाली पर चाहे न कुहुके कोयल किसी अलसाई शाम से चाहे न हो गुफ्तगू कोई बेनामी ख़त चाहे किसी चौराहे पर क्यों न पढ़ लिया जाए ज़िन्दगी का कोई नया शब्दक...
    • केवल राष्ट्र के लिए था यह सृजन - देश की स्वतंत्रता के लिए 1857 से लेकर 1947 तक क्रान्तिकारियों व आंदोलनकारियों के साथ ही लेखकों, कवियों और पत्रकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय...
    • कृष्ण लीला - ग्वाल बाल साथ ले कान्हा ने धूम मचाई गोकुल की गलियों में ! खिड़की खुली थी घर में छलांग लगाई खाया नवनीत खिलाया मित्रों को भी कुछ खाया कुछ फैलाया आहट ...
    • नींद बनाम ख्व़ाब - मैंने अपनी नींदें बेच, कुछ ख्वाब खरीदे थे। रख दिया था सहेज कर, उन्हें अपनी पलकों तले। वक़्त की बारिशों औ आंधी से, कुछ उड़ गए, कुछ बह गए। कुछ को बचाया जतन...
    • - गज़ल 1 मुहब्बत से रिश्ता बनाया गया उसे टूटते रोज पाया गया मुहब्बत पे उसकी उठी अँगुलियाँ सरे बज़्म रुसवा कराया गया यहाँ झूठ बिकता बड़े भाव पर मगर सच को ठेंगा द...
    • माँ तुझे प्रणाम - *माँ तुझे प्रणाम* *शत शत नमन कोटि प्रणाम * *माँ तुझे प्रणाम ।* *जब मैं तेरी कोख में आई * *तूने स्पर्श से बताया था * *ममता का कोई मोल नहीं * *तूने ही सि...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • नया साल ! - समर घर से निकला तो पत्नी और बच्चों के लिए गिफ्ट पहले ही खरीदता हुआ होटल पहुंचा था। रात में प्रोग्राम ख़त्म करके सीधे घर भागेगा क्यो...
    • वेदों में गायन कला - *- डॉ. शरद सिंह* *गायन मानव की संवेदनाओं को जागृत करता है.आज दुनिया भर में संगीत के महत्व पर वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं . पाश्चात्य जगत के व...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -9) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना पुराना जीवन याद करने लगती > हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में > ...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.