Mother ख़ाक जन्नत है इसके क़दमों की सोच फिर कितनी क़ीमती है मां ?

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  • Wednesday, April 6, 2011
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
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  • मां

    ज़िन्दगी भर मगर हंसी है मां

    दिल है ख़ुश्बू है रौशनी है मां
                                  अपने बच्चों की ज़िन्दगी है मां

    ख़ाक जन्नत है इसके क़दमों की
    सोच फिर कितनी क़ीमती है मां

    इसकी क़ीमत वही बताएगा
    दोस्तो ! जिसकी मर गई है मां

    रात आए तो ऐसा लगता है
    चांद से जैसे झांकती है मां

    सारे बच्चों से मां नहीं पलती
    सारे बच्चों को पालती है मां

    कौन अहसां तेरा उतारेगा
    एक दिन तेरा एक सदी है मां

    आओ ‘क़ासिम‘ मेरा क़लम चूमो
    इन दिनों मेरी शायरी है मां

    कलाम : जनाब क़ासिम नक़वी साहब
    http://vedquran.blogspot.com/2010/05/mother.html

    10 comments:

    सारा सच said...

    nice

    akhtar khan akela said...

    khudaa maa kaa saaya sbhi ke sr pr rkhe or agar khuda naa kre maa ka saaya naa ho to dua hmesha saath rkhe aamin bhtrin andaaz me likhi gyi bhtrin post . akhtar khan akela kota rajsthan

    HAKEEM YUNUS KHAN said...

    Nice post.

    mangal yadav said...

    very good poem.like it.

    रज़िया "राज़" said...

    सारे बच्चों से मां नहीं पलती
    सारे बच्चों को पालती है मां

    खूब बहेतर सुखन!!

    दर्शन कौर धनोए said...

    इसकी क़ीमत वही बताएगा
    दोस्तो ! जिसकी मर गई है मां

    इस शब्द में सारी खुदाई छिपी है --जो चीज इंशान के वश में नही होती हे तभी उसकी कीमत पता चलती है ? सुंदर नज्म---!

    M VERMA said...

    माँ तो बस माँ है
    बेहतरीन रचना

    Kunwar Kusumesh said...

    सारे बच्चों से मां नहीं पलती
    सारे बच्चों को पालती है मां

    बेहतरीन बेहतरीन बेहतरीन

    PADMSINGH said...

    सारे बच्चों से मां नहीं पलती
    सारे बच्चों को पालती है मां
    .... माँ शब्द अपने आप में ही इतना मोहक है और उसपर इतनी खूबसूरत रचना .. सुन्दर

    सारा सच said...

    अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ....

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