मां नहीं रहेगी ....

Posted on
  • Monday, April 25, 2011
  • by
  • सदा
  • in










  • मां को कुछ उलझन है,

    मेरे आने से

    पर वह कहती नहीं जमाने से

    कभी-कभी भर लाती

    आंखों में आंसू

    कहती मुझसे मन ही मन

    यह सच है

    तू मेरा अंश है

    पर बेटी

    यह सब कहते

    तुझसे चलेगा नहीं

    मेरा वंश

    तेरा अंत करना चाहते हैं

    जन्‍म के पहले

    मिटा कर

    तुझे नहीं

    खत्‍म करना चाहते हैं

    खुद मेरा वजूद

    बता मैं कैसे

    सहयोग करूं

    इनका नन्‍हीं बता न

    आज मैं भी शपथ लेती हूं

    तुझे जन्‍म दूंगी

    या अपने आपको

    मिटा दूंगी

    मैं सोचती

    मां की यह उलझन

    खत्‍म हो पाएगी कब

    मैं खत्‍म हो जाऊंगी

    या

    मां नहीं रहेगी तब

    दुनिया ये कब समझ पाएगी ।

    5 comments:

    Kunal Verma said...

    Kya dard hai apki kavita me...bahut khoob

    वन्दना said...

    दर्द को बखूबी उकेरा है………मार्मिक अभिव्यक्ति।

    DR. ANWER JAMAL said...

    दर्द को बखूबी उकेरा है………मार्मिक अभिव्यक्ति.

    यदि अल्लाह तुम्हारी मदद करेगा तो कोई तुम से जीत नहीं सकता और यदि वह तुम्हारी मदद न करे तो फिर ऐसा कौन है जो उसके बाद तुम्हारी मदद कर सके ? और आस्थावान लोगों को तो अल्लाह पर ही भरोसा करना चाहिए। -कुरआन, 3, 160
    http://quranse.blogspot.com/2011/04/secret-of-victory.html

    रश्मि प्रभा... said...

    soch badalne ki zarurat hai...

    दर्शन कौर धनोए said...

    जिन घरो में २ या ३ बेटियाँ है --वहाँ यह समस्या आम है --वेसे अब जमाना बदल रहा है --और बाम्बे में तो यह कई सालो पहले बदल चुका है ? हमारे काम्प्लेक्स में तो कई घर है जहां सिर्फ १ या २ लडकियाँ ही है ?और वह बेहद खुश है ..

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • विश्वास - ‘विश्वास’ कितना आभासी है ना यह शब्द ! कितना क्षणिक, कितना छलनामय, कितना भ्रामक ! विश्वास के जिस धागे से बाँध कर कल्पना की पतंग को आसमान की ऊँच...
    • राजीव गांधी :अब केवल यादों में - शत शत नमन - एक नमन राजीव जी को आज उनकी जयंती के अवसर पर.राजीव जी बचपन से हमारे प्रिय नेता रहे आज भी याद है कि इंदिरा जी के निधन के समय हम सभी कैसे चाह रहे थे कि ...
    • हमें अपनी झील के आकर्षण में बंधे रहना है - #हिन्दी_ब्लागिंग मैं कहीं अटक गयी हूँ, मुझे जीवन का छोर दिखायी नहीं दे रहा है। मैं उस पेड़ को निहार रही हूँ जहाँ पक्षी आ रहे हैं, बसेरा बना रहे हैं। कहाँ ...
    • शापित मंजिलें - *... स्थितियाँ * *बदल देती हैं * *राह जिंदगी की ...* *... मंजिलें* *अक्सर अकेली रह * *शापित हो जाया करती हैं !!* *सु-मन *
    • बातें हैं बातों का क्या ....... - अम्बुआ की डाली पर चाहे न कुहुके कोयल किसी अलसाई शाम से चाहे न हो गुफ्तगू कोई बेनामी ख़त चाहे किसी चौराहे पर क्यों न पढ़ लिया जाए ज़िन्दगी का कोई नया शब्दक...
    • केवल राष्ट्र के लिए था यह सृजन - देश की स्वतंत्रता के लिए 1857 से लेकर 1947 तक क्रान्तिकारियों व आंदोलनकारियों के साथ ही लेखकों, कवियों और पत्रकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय...
    • कृष्ण लीला - ग्वाल बाल साथ ले कान्हा ने धूम मचाई गोकुल की गलियों में ! खिड़की खुली थी घर में छलांग लगाई खाया नवनीत खिलाया मित्रों को भी कुछ खाया कुछ फैलाया आहट ...
    • नींद बनाम ख्व़ाब - मैंने अपनी नींदें बेच, कुछ ख्वाब खरीदे थे। रख दिया था सहेज कर, उन्हें अपनी पलकों तले। वक़्त की बारिशों औ आंधी से, कुछ उड़ गए, कुछ बह गए। कुछ को बचाया जतन...
    • - गज़ल 1 मुहब्बत से रिश्ता बनाया गया उसे टूटते रोज पाया गया मुहब्बत पे उसकी उठी अँगुलियाँ सरे बज़्म रुसवा कराया गया यहाँ झूठ बिकता बड़े भाव पर मगर सच को ठेंगा द...
    • माँ तुझे प्रणाम - *माँ तुझे प्रणाम* *शत शत नमन कोटि प्रणाम * *माँ तुझे प्रणाम ।* *जब मैं तेरी कोख में आई * *तूने स्पर्श से बताया था * *ममता का कोई मोल नहीं * *तूने ही सि...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • नया साल ! - समर घर से निकला तो पत्नी और बच्चों के लिए गिफ्ट पहले ही खरीदता हुआ होटल पहुंचा था। रात में प्रोग्राम ख़त्म करके सीधे घर भागेगा क्यो...
    • वेदों में गायन कला - *- डॉ. शरद सिंह* *गायन मानव की संवेदनाओं को जागृत करता है.आज दुनिया भर में संगीत के महत्व पर वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं . पाश्चात्य जगत के व...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -9) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना पुराना जीवन याद करने लगती > हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में > ...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.