मां के लिए ...

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  • Tuesday, March 29, 2011
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  • सदा
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  • उसकी शिकायत का पिटारा

    चार छह दिनों में

    खुल ही जाता

    तुम तो बस छोटी से

    प्‍यार करती हो ...

    हर समय बस

    काम ही काम करती रहती हो

    मां मुस्‍करा के कहती नहीं ..

    मैं तुम सबसे

    बेहद प्‍यार करती हूं ..

    मां उसकी शिकायतों को

    नजरअंदाज कर

    सिर पे हांथ रखती स्‍नेह से

    क्‍या हुआ ...

    काम भी तो जरूरी है,

    यकीं मानो काम के वक्‍त भी

    मेरी आंखों में तुम्‍हारी ही

    अभिलाषा पूर्ति रहती है

    तुम्‍हारे इस स्‍नेह से लिपटी मैं

    पल- पल तुम्‍हारे हर विचार को

    अपनाती हूं, सोच को

    परिपक्‍व होने के लिए

    दुनिया की भीड़ में छोड़ देती हूं

    तुम भी मेरी तरह

    एक मजबूत स्‍तंभ बनो

    मां के लिये आसान नहीं होता

    अपने बच्‍चे से दूर होना

    वो हर बच्‍चे की पीड़ा में

    एक समान दुखी होती है

    वह यह भी जानती है किसे

    उसकी ज्‍यादा जरूरत है

    तुम्‍हारी शिकायतें

    मुझे बुरी नहीं लगती

    मैं तुम्‍हारा स्‍नेह

    महसूस करती हूं इनमें

    और इस बात पे हैरां होती हूं

    कि जैसे तुम मुझसे झगड़ती हो

    ठीक वैसे ही मैं भी

    मां से झगड़ा किया करती हूं ...।

    7 comments:

    POOJA... said...

    maa-bitiya ka rishta aisa hi hota hai... chahe jaha ho...
    bahut sundar rachna...

    शालिनी कौशिक said...

    काम भी तो जरूरी है,

    यकीं मानो काम के वक्‍त भी

    मेरी आंखों में तुम्‍हारी ही

    अभिलाषा पूर्ति रहती है
    bahut sundar bhavabhivyakti.

    दर्शन कौर धनोए said...

    Aek or sundar Rchnaa !

    Anonymous said...

    मां के सिवा अपने बच्चे को कोई उतना प्यार नहीं कर सकता।

    मां तो मां ही होती है।

    sundar rachna.

    -harminder singh

    DR. ANWER JAMAL said...

    तुम्‍हारी शिकायतें

    मुझे बुरी नहीं लगती

    मैं तुम्‍हारा स्‍नेह

    महसूस करती हूं इनमें

    आपकी भावना और आपके शब्द दोनों अच्छे लगे .
    मैं आपके लिए नेक ख्वाहिशात पेश करता हूँ और आपका स्वागत करता हूँ.

    संतोष कुमार झा said...

    आपका ब्लॉग बहुत ही सुन्दर है उतने ही सुन्दर आपके विचार है जो सोचने पर मजबूर करदेते है
    कभी मेरे ब्लॉग पे भी पधारिये में निचे अपने लिंक दे रहा हु
    धन्यवाद्
    http://santoshbihar.blogspot.com/

    HAKEEM YUNUS KHAN said...

    कि जैसे तुम मुझसे झगड़ती हो

    ठीक वैसे ही मैं भी

    मां से झगड़ा किया करती हूं ...।

    nice post.

    http://pyarimaan.blogspot.com/2011/03/blog-post_28.html

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