एक वचन जो माँ को दिया था

Posted on
  • Friday, March 11, 2011
  • by
  • HAKEEM YUNUS KHAN
  • in
  • Labels:
  • ज़िंदगी है अगर तो तुम जूझो मगर
    क़र्ज़ माँ का चुकाने का वायदा करो
    मूलचंद वशिष्ठ बिजनौर के राजेन्द्र नगर , नई बस्ती के रहने वाले हैं । सन् 1983 में उनकी माँ कलावती की मौत हो गई । सन्1982 में राजेन्द्र जी का लड़के विपिन मोहन का चयन एमबीबीएस में हो गया था। कलावती जी ने अपने बेटे मूलचंद से वचन लिया था कि पोते के डाक्टर बनने के बाद वह एक अस्पताल गरीबों के लिए बनवाएंगे , जिसमें गरीबों का पूरी तरह फ्री इलाज किया जाएगा। जिंदगी के उतार चढ़ाव से गुज़र कर अब वे अपने उस वचन को पूरा करने के क़ाबिल हो सके जो कि उन्होंने अपनी माँ को दिया था। उन्होंने अपनी माँ कलावती के नाम पर सिविल लाइन प्रथम पंचवटी कालोनी में एक अस्पताल का निर्माण कराया जिसमें ग़रीबों का इलाज भी मुफ्त होगा और उन्हें दवाइयाँ भी मुफ्त दी जाएँगी । अस्पताल के अलावा कलावती सामुदायिक केंद्र में ग़रीबों की बेटियों की शादी भी मुफ्त में कराई जाएँगी । अस्पताल में डा. रहमान सातों दिन मुफ़्त इलाज करेंगे जबकि डा. विपिन मोहन हफ्ते में एक दिन निःशुल्क उपचार करेंगे।
    यह घटना हमारे समाज में ऐसे समय सामने आई है जबकि माँ के वचन को और ग़रीबों को तो क्या , ख़ुद माँ और बाप को ही नज़रअंदाज किया जा रहा है । यह सचमुच एक अच्छी ख़बर है और हम इस पूरे परिवार के भले के लिए दुआ करते हैं । हम सभी को इससे प्रेरणा लेने की ज़रूरत है ।

    9 comments:

    Atul Shrivastava said...

    अच्‍छी और प्रेरणादायक खबर।
    ऐसे बेटे को सलाम और उससे भी ज्‍यादा उस मां को जिसने बेटे को ऐसे संस्‍कार दिए।

    DR. ANWER JAMAL said...

    एक उम्दा मिसाल .

    निर्मला कपिला said...

    bashut prerak prasang hai| dhanyavaad|

    संतोष कुमार झा said...

    होली की अपार शुभ कामनाएं...बहुत ही सुन्दर ब्लॉग है आपका....मनभावन रंगों से सजा...

    ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

    Aabhar.
    ---------
    क्या व्यर्थ जा रहें हैं तारीफ में लिखे कमेंट?

    दर्शन कौर धनोए said...

    कोई तो है जो माँ की भावनाए समझता है --
    इस कलयुग मै कोई तो निकला श्रवण ! आभार---

    वन्दना said...

    अच्‍छी और प्रेरणादायक खबर। आज के युग मे भी ऐसे बेटे हैं शायद तभी धरती टिकी है।

    सदा said...

    बहुत कम लोग ही ऐसे वचनों को निभा पाते हैं ...

    प्रेरणात्‍मक प्रस्‍तुति ।

    HAKEEM YUNUS KHAN said...

    मैं चाहकर भी ज्यादा नहीं लिख पाता , लेकिन आपने इस ख़बर को जितना सराहा उसने मुझे और भी ज़्यादा लिखने के लिए प्रेरित किया।
    मैँ एक हकीम हूँ और आए दिन अपने दवाख़ाने पर ऐसे रोगों से दुखी औरतों को देखता रहता हूँ जो माँ बेटी बहन और बहू हरेक को परेशान करते हैं ।
    अगर आप सभी लेखिकाएं कुछ ऐसी जानकारी भी दें कि जब आप ख़ुद किसी स्त्री रोग से पीड़त हुईं या आपकी कोई परिचिता बीमार पड़ी तो उसे उस रोग से कैसे मुक्ति मिली ?
    तो ये अनूभूत क़िस्से बहुत सी माँओं के लिए अपने कष्टों से निजात का ज़रिया बनेंगे बल्कि वे अपने परिवार की बहू बेटियों की देखभाल भी ठीक से कर पाएँगी और दूसरों को भी सही सलाह दे पाएँगी ।

    जमाल भाई साहब से इस्तदआ है कि मेरे ब्लॉगों को इस ब्लॉग में HBFI में और BKK में जोड़ लें क्योंकि उन्हें अब तक कहीं भी नहीं जोड़ा गया है जबकि मैं तीनों ब्लॉग का एक्टिव मेंबर भी हूँ , चाहे एक्टिविटी कम हो ।

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • जीवन की जंग - जीतनी तो थी जीवन की जंग तैयारियाँ भी बहुत की थीं इसके लिए कितनी तलवारें भांजीं कितने हथियारों पर सान चढ़ाई कितने तीर पैने किये कितने चाकुओं पर धार लगाई ...
    • संताप से भरे पुत्र का पत्र - कल एक पुत्र का संताप से भरा पत्र पढ़ने को मिला। उसके साथ ऐसी भयंकर दुर्घटना हुई थी जिसका संताप उसे आजीवन भुगतना ही होगा। पिता आपने शहर में अकेले रहते थे, ...
    • कानून पर कामुकता हावी - [image: Navodayatimes] १६ दिसंबर २०१२ ,दामिनी गैंगरेप कांड ने हिला दिया था सियासत और समाज को ,चारो तरफ चीत्कार मची थी एक युवती के साथ हुई दरिंदगी को लेकर ,आ...
    • ब्रह्म वाक्य - दुःख दर्द आंसू आहें पुकार सब गए बेकार न खुदी बुलंद हुई न खुदा ही मिला ज़िन्दगी को न कोई सिला मिला यहाँ रब एक सम्मोहन है और ज़िन्दगी एक पिंजर और तू म...
    • बस यूँ ही ~ 2 - *मैं जिंदा तो हूँ , जिंदगी नहीं है मुझमें * *फक़त साँस चल रही है ज़िस्म फ़ना होने तक !!* *सु-मन *
    • हेमलासत्ता [भाग- एक] - एक छोटे से गांव खेतासर में हेमला जाट रहता था। उसके घर में दूध, पूत, धन, धान्य सभी था। सभी तरह से उसकी जिन्दगी सुखपूर्वक कट रही थी। उसकी अपनी प्रिय पत्नी से...
    • नंबर रेस का औचित्य? - 10वीं 12वीं का रिजल्ट आया. किसी भी बच्चे के 90% से कम अंक सुनने में नहीं आये. पर इतने पर भी न बच्चा संतुष्ट है न उनके माता पिता। इसके साथ ही सुनने में आया...
    • आइना - है वह आइना तेरा हर अक्स का हिसाब रखता है तू चाहे याद रखे न रखे उसमें जीवंत बना रहता है बिना उसकी अनुमति लिए जब बाहर झाँकता है चाहे कोई भी मुखौटा लगा ल...
    • माँ तुझे प्रणाम - *माँ तुझे प्रणाम* *शत शत नमन कोटि प्रणाम * *माँ तुझे प्रणाम ।* *जब मैं तेरी कोख में आई * *तूने स्पर्श से बताया था * *ममता का कोई मोल नहीं * *तूने ही सि...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • नया साल ! - समर घर से निकला तो पत्नी और बच्चों के लिए गिफ्ट पहले ही खरीदता हुआ होटल पहुंचा था। रात में प्रोग्राम ख़त्म करके सीधे घर भागेगा क्यो...
    • - * गज़ल * तमन्ना सर फरोशी की लिये आगे खड़ा होता मैं क़िसमत का धनी होता बतन पर गर फना होता अगर माकूल से माहौल में मैं भी पला होता मेरा जीने का मक़सद आसमां से भी ...
    • वेदों में गायन कला - *- डॉ. शरद सिंह* *गायन मानव की संवेदनाओं को जागृत करता है.आज दुनिया भर में संगीत के महत्व पर वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं . पाश्चात्य जगत के व...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -9) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना पुराना जीवन याद करने लगती > हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में > ...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

    • मेरे मन की.... - मेरी पहली पुस्तक "मेरे मन की" की प्रिंटींग का काम पूरा हो चुका है | और यह पुस्तक बुक स्टोर पर आ चुकी है| आप सब ऑनलाइन गाथा के द्वारा बुक कर सकते है| मेरी...
      8 hours ago
     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.