खट्टे-मीठे सपने.....

Posted on
  • Monday, March 7, 2011
  • by
  • रश्मि प्रभा...
  • in


  • छन न न से गिरा मन-सपनों की घाटी में,
    बटोर लाया सपने
    कुछ खट्टे,कुछ मीठे,
    पारले की गोलियों जैसे...........
    अपनी टोली बुलाई-
    और सपने बांटने लगा.......
    माँ सिखाती रही है,
    मिलजुल बाँट के चलना,
    कम होंगे
    तो सपनों की घाटी है न !
    छ न न से गिर जायेगा मन
    बटोर लाएगा सपने
    खट्टे-मीठे -
    पारले जैसी !

    17 comments:

    POOJA... said...

    मुझे भी चाहिए वो पार्ले की गोलियां...
    सपनों वाली...
    खट्टी-मीठी...

    Anjana (Gudia) said...

    :-) theek hai phir...... hum to chale sapno ki ghati mein.... :-)

    DR. ANWER JAMAL said...

    शुक्रिया हो ही नहीं सकता कभी उसका अदा
    मरते मरते भी दुआ जीने की दे जाती है माँ

    कुश्वंश said...

    आदरणीय रश्मि जी आपकी कविताओं का सदा से ही कायल रहा हूँ, हमेशा पढ़ी है , हर रंगों में आपकी लेखनी को महारत हासिल है, सही अर्थो में काव्य की उत्पत्ति होती है आपके शब्दों से, जबसे लिखना शुरू क्या इस वेर्तुअल जगत में सही कहू तो आपके काव्य ने ही प्रेरित किया मुझे और कुछ अभिव्याक्तिया करता हूँ, हमेशा से ही आपकी उपस्थिति का, आपके शब्दों का इंतज़ार रहा अपनी कविताओ पर सच्ची टिप्पणी के लिए.- कुश्वंश

    संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

    पार्ले की पौपिंस ....बहुत पसंद हैं आज तक ...बहुत खूबसूरत कल्पना

    शिखा कौशिक said...

    bahut sundar abhivyaki..

    वाणी गीत said...

    माँ ही सिखाती है मिलजुल कर बाँट कर चलना ...
    मुझे भी चाहिए ये पार्ले वाली खट्टी मीठी गोलियां ...सपनों की दूकान तो खोलिए !

    Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

    सपनों के लिए हाथ फैलाये हम भी तो हैं खड़े !

    दर्शन कौर धनोए said...

    यह दुनिया परले की गोलियों की तरह ही खट्टी मीठी है और माँ हिदायत देती डेंटिस्ट की तरह---:)

    Mukesh Kumar Sinha said...

    aaj ke din kahin ye parle ki goliyan sirf mahilaon ke liye to nahi hai..:)

    happy womens day!

    एस.एम.मासूम said...

    नारी मनुष्य का निर्माण करती है.नारी समाज की प्रशिक्षक है और उसके लिए आवश्यक है कि सामाजिक मंच पर उसकी रचनात्मक उपस्थिति हो

    सदा said...

    अपनी टोली बुलाई-
    और सपने बांटने लगा.......
    माँ सिखाती रही है,
    मिलजुल बाँट के चलना

    बहुत खूब ...सुन्‍दर भावमय शब्‍दों का संगम ।

    जेन्नी शबनम said...

    पार्लेजी की मीठी मीठी रंगीन टॉफी की तरह मीठी रचना, बधाई!

    kase kahun?by kavita. said...

    छ न न से गिर जायेगा मन
    बटोर लाएगा सपने iski khanak goonj rahi hai kano me...

    निर्मला कपिला said...

    छ न न से गिर जायेगा मन
    बटोर लाएगा सपने
    खट्टे-मीठे -
    पारले जैसी !
    चलो फिर बटोरते हैं। सुन्दर रचना। शुभकामनायें।

    Dinesh pareek said...

    आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
    http://vangaydinesh.blogspot.com/2011/03/blog-post_12.html

    Dinesh pareek said...

    आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
    http://vangaydinesh.blogspot.com/2011/03/blog-post_12.html

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • बातें हैं बातों का क्या ....... - अम्बुआ की डाली पर चाहे न कुहुके कोयल किसी अलसाई शाम से चाहे न हो गुफ्तगू कोई बेनामी ख़त चाहे किसी चौराहे पर क्यों न पढ़ लिया जाए ज़िन्दगी का कोई नया शब्दक...
    • पहाड़ों के बीच बसा अलसीगढ़ - #हिन्दी_ब्लागिंग मनुष्य प्रकृति की गोद खोजता है, नन्हा शिशु भी माँ की गोद खोजता है। शिशु को माँ की गोद में जीवन मिलता है, उसे अमृत मिलता है और मिलती है सुरक...
    • * भारत माँ का आर्तनाद * - १५ अगस्त के उपलक्ष्य में विशेष रचना वर्षों की गर्भ यंत्रणा सहने के बाद सन् १९४७ की १४ और १५ अगस्त में जब कुछ घंटों के अंतराल पर मैंने दो जुडवाँ ...
    • केवल राष्ट्र के लिए था यह सृजन - देश की स्वतंत्रता के लिए 1857 से लेकर 1947 तक क्रान्तिकारियों व आंदोलनकारियों के साथ ही लेखकों, कवियों और पत्रकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय...
    • कृष्ण लीला - ग्वाल बाल साथ ले कान्हा ने धूम मचाई गोकुल की गलियों में ! खिड़की खुली थी घर में छलांग लगाई खाया नवनीत खिलाया मित्रों को भी कुछ खाया कुछ फैलाया आहट ...
    • खाली हसरतें - *खाली हसरतों की * *होती है मियाद * *बस इतनी ....* *भीतर के भरेपन में * *होती है खाली * *जाम-ए-पनाह जितनी.. !!* *सु-मन *
    • नींद बनाम ख्व़ाब - मैंने अपनी नींदें बेच, कुछ ख्वाब खरीदे थे। रख दिया था सहेज कर, उन्हें अपनी पलकों तले। वक़्त की बारिशों औ आंधी से, कुछ उड़ गए, कुछ बह गए। कुछ को बचाया जतन...
    • तुम राम बनके दिल यूँ ही दुखाते रहोगे . - [image: Image result for seeta agni pariksha image] अवसर दिया श्रीराम ने पुरुषों को हर कदम , अग्नि-परीक्षा नारी की तुम लेते रहोगे , करती रहेगी सीता सदा मर्य...
    • - गज़ल 1 मुहब्बत से रिश्ता बनाया गया उसे टूटते रोज पाया गया मुहब्बत पे उसकी उठी अँगुलियाँ सरे बज़्म रुसवा कराया गया यहाँ झूठ बिकता बड़े भाव पर मगर सच को ठेंगा द...
    • माँ तुझे प्रणाम - *माँ तुझे प्रणाम* *शत शत नमन कोटि प्रणाम * *माँ तुझे प्रणाम ।* *जब मैं तेरी कोख में आई * *तूने स्पर्श से बताया था * *ममता का कोई मोल नहीं * *तूने ही सि...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • नया साल ! - समर घर से निकला तो पत्नी और बच्चों के लिए गिफ्ट पहले ही खरीदता हुआ होटल पहुंचा था। रात में प्रोग्राम ख़त्म करके सीधे घर भागेगा क्यो...
    • वेदों में गायन कला - *- डॉ. शरद सिंह* *गायन मानव की संवेदनाओं को जागृत करता है.आज दुनिया भर में संगीत के महत्व पर वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं . पाश्चात्य जगत के व...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -9) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना पुराना जीवन याद करने लगती > हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में > ...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.