शराब पीने से रोका तो मां को जिंदा जलाया Mother in fire

सोनीपत (ब्यूरो) । गांव शामड़ी में एक शराबी युवक ने अपनी मां पर मिट्टी का तेल छिड़ककर उसे आग के हवाले कर दिया। मां का क़सूर सिर्फ़ इतना था कि उसने रात को शराब के नशे में धुत होकर आए बेटे को शराब पीने से मना किया था। पुलिस न पोस्टमार्टम के बाद शव वारिसों के सुपुर्द कर आरोपी गिरफ़्तार कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसर सोमवार सुबह करीब चार बजे गांव शामड़ी निवासी राजकुमार ने अपनी मां सुनहरी देवी पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी, जिससे वह बुरी तरह झुलस गई और बाद में उसने दम तोड़ दिया। चचेरे भाई सुल्तान ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि राजकुमार शराब पीने का आदी है और रोज़ाना शराब पीकर घर आता है। इसी बात को लेकर उसका अपनी मां सुनहरी देवी के साथ विवाद रहता था। पिछले दिनों राजकुमार के साले की मौत होने के कारण उसकी पत्नी मायके गई हुई है। सुल्तान के अनुसार रविवार रात राजकुमार फिर से शराब के नशे में धुत होकर आया तो अपनी मां के साथ कहा सुनी हो गई। रात को तो वह सो गया, लेकिन सुबह क़रीब चार बजे उठकर उसने अपनी मां पर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी। महिला की चीख़ें सुनकर आस-पास के लोग मौक़े पर पहुंचे और आग को क़ाबू किया, लेकिन तब तक सुनहरी देवी बुरी तरह झुलस चुकी थी और कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया। 
                               अमर उजाला, नई दिल्ली संस्करण, दिनांक 1 फ़रवरी 2011, पृष्ठ 10

7 comments:

एस.एम.मासूम said...

एक शर्म नाक घटना. ऐसी ओलाद को तो माफ़ कभी नहीं करना चाहिए.

Minakshi Pant said...

सच मै ये बहुत शर्मनाक घटना है एसी ओलाद को तो पहली बार मै ही सतर्क कर देना चाहिए जिससे उसकी हिम्मत इतनी न बढ जाये की वो कुछ एसी हरकत करे जो आगे चल कर दोनों को नुकसान पहुंचा सके ! वेसे मेरा सोचना है की बच्चों को जरूरत से ज्यादा दिया गया लाड - प्यार भी इसका कारण है क्युकी कुछ नासमझ बच्चे इसे हमारी कमजोरी समझ लेते हैं और कुछ इसे अपनी सही राह मै बड़ते रहने की ताक़त बना कर आगे बड़ते चलते हैं !

सतीश सक्सेना said...

यह बेटा इंसान नहीं वहशी जानवरों से भी बदतर है ...

POOJA... said...

कुछ नहीं कह सकती... जरूर उस आदमी के कोई बुरे कर्म होंगे जिसकी सजा माँ ने अपने ऊपर ले ली...

कविता रावत said...

ऐसे कपूत इंसान नहीं हो सकते!! शराबियाँ का कोई ईमान धरम, नाता रिश्ता कुछ नहीं होता ... जब भी ऐसी घटनाएँ सुनती हूँ तो मन में बहुत आक्रोश भर जाता है .... एक न एक दिन उनकी दुर्गति सुनिश्चित होती हैं यह सभी देखते हैं फिर भी ऐसे लोग कहाँ सुनते, देखते हैं? बहुत ही मार्मिक प्रस्तुति.. .. आभार

HAKEEM YUNUS KHAN said...

nihaayat afsosnaak waqya hai.
mulk men nashe ko badhaawa dene wali cheezon par bhi rok lagayee jani chahiye.

Anjana (Gudia) said...

kitni sharam ki baat hai...!

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