माँ का स्पर्श

Posted on
  • Sunday, February 20, 2011
  • by
  • Minakshi Pant
  • in


  • मेरी ख्वाइश है की मैं फिर से 
    फ़रिश्ता हो जाऊ | 
    माँ से इस तरह लिपटू की...
    फिर से बच्चा हो जाऊ |
    माँ से दूर मैं हो जाऊ 
    ये कैसे हो सकता है |
    माँ का साया तो हरदम 
    पास  मेरे ही रहता है |
    माँ जब कभी भी मुझे 
    डांट कर  चली जाती है |  
    मैं  मुहं  चिढाता  हूँ 
    तो वो हंस के पास आती है |
    माँ के डांटने मे भी 
    प्यारा सा एहसास होता है |
    उसके उस एहसास में भी 
    प्यारा सा दुलार रहता  है |
    हर पल वो मेरे दर्द को 
    साथ ले के चलती है |
    जब मैं परेशां होता  हूँ तो 
    वो होंसला सा  देने लगती है |
    माँ न जाने मेरे हर गम में  
    कैसे  शरीक  लगती  है |
    जेसे वो हर पल मेरे ही 
    इर्द - गिर्द   रहती है |
    कितना नाजुक और 
    पाक सा ये रिश्ता है |
    बिना किसी शर्त के 
    हर पल  हमारे साथ रहता है |
    ओर हमें  प्यारा सा
    उसका स्पर्श हरदम 
    मिलता ही रहता है |

    8 comments:

    DR. ANWER JAMAL said...

    सबकी नजरें हैं जेब पर , इक नज़र है पेट पर
    देखकर चेहरे को हाले दिल समझ जाती है माँ

    आपकी भावना और रचना हक़ीक़त के क़रीब है ।

    रश्मि प्रभा... said...

    bahut hi bhawpoorn abhivyakti

    निर्मला कपिला said...

    पाक सा ये रिश्ता है |
    बिना किसी शर्त के
    हर पल हमारे साथ रहता है |
    माँ ऐसी ही होती है। बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति। बधाई।

    वन्दना said...

    आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (21-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

    Patali-The-Village said...

    माँ होती ही ऐसी ही है। बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति। बधाई।

    संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

    बिना किसी शर्त के
    हर पल हमारे साथ रहता है
    बहुत खूबसूरती से लिखे हैं यह एहसास

    anupama's sukrity ! said...

    निश्छल कोमल माँ का स्पर्श याद दिलाती हुई भावपूर्ण सुंदर रचना -
    बहुत बहुत बधाई .

    Anjana (Gudia) said...

    :-) bahut sunder!

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