माँ ...

Posted on
  • Thursday, February 10, 2011
  • by
  • रश्मि प्रभा...
  • in




  • आसमान में
    जब सतरंगी सपने झिलमिलाते हैं
    तो माँ उनमें से चटक रंग ले आती है
    अपने आँचल में बांधकर
    फिर अपने बच्चों की आँखों में
    बूंद बूंद भर देती है
    .... चटकीले सपनों को मकसद बना
    नन्हें कदम डग भरने लगते हैं !
    दिन भर फिरकनी की तरह खटती माँ
    थकती नहीं
    चटकीले रंग , मोहक सपने लाना
    कभी भूलती नहीं ...
    कभी मालिश करते वक़्त
    कभी जूते पहनाते
    कभी कौर खिलाते
    कभी सर सहलाते हुए
    देती जाती है मोहक रंगों की उड़ान !
    हकीकत की धरती को
    कभी बाँझ नहीं होने देती
    सपनों के बीज लगाती जाती है
    आंसुओं से सींचती जाती है ...
    माँ ...
    दुआओं के धागे
    हर पल साथ लिए चलती है
    जब भी मन अकुलाता है
    आँचल की गाँठ से जोड़ लेती है
    माँ ...
    बड़ी प्यारी होती है !!!

    15 comments:

    Sonal Rastogi said...

    maa jaisi sach mein koi nahi ... Love u maa

    Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

    माँ कितना कुछ करते रहती है ... बच्चों के लिए सारा जहाँ होती है माँ ...

    Antrang - The InnerSoul said...

    ILu...

    Mukesh Kumar Sinha said...

    mere aur se bhi ILU...:D

    वाणी गीत said...

    जब भी मन अकुलाता है , आँचल की गाँठ से जोड़ लेती हैं ..प्यारी माँ ...
    बच्चे की ठुमक ने कैसा कैसा तो एहसास दिला दिया !

    दर्शन कौर धनोए said...

    जब बच्चा चलता हे तब उसकी पहली ठुमक से जो ख़ुशी एक माँ को मिलती हे वेसी ख़ुशी हजारो नोटों के बण्डल भी नही दे सकते --ऐ माँ तुझे सलाम |

    Brijendra Singh... (बिरजू, برجو) said...

    "Door bhale ho kitne usse,
    har dhadkan mai meri maa.."

    sunder rachna Rashmi ji.. :)

    यशवन्त माथुर said...

    बहुत सही कहा आपने.

    सादर

    सदा said...

    जब सतरंगी सपने झिलमिलाते हैं
    तो माँ उनमें से चटक रंग ले आती है
    अपने आँचल में बांधकर
    फिर अपने बच्चों की आँखों में
    बूंद बूंद भर देती है ...

    और बच्‍चे उन बूंदों का एक पहचान देते हैं, उन ख्‍वाबों को हकीकत का रंग देकर ..इस बेहतरीन अभिव्‍यक्ति के लिये मां के प्रत्‍येक शब्‍द को मेरा नमन ...।

    Rajiv said...

    "माँ ...
    बड़ी प्यारी होती है"
    जीवन देनेवाली और जीवन के सपनों में रंग भरनेवाली मां के सिवा और हो भी कौन सकता है. कोमल भावों से सजी रचना.

    kase kahun?by kavita. said...

    maa badi pyari hoti hai....bilkul sahi kaha...

    कविता रावत said...

    कभी भूलती नहीं ...
    कभी मालिश करते वक़्त
    कभी जूते पहनाते
    कभी कौर खिलाते
    कभी सर सहलाते हुए
    देती जाती है मोहक रंगों की उड़ान !
    ...bachhon ke liye kya kya nahi karti maa... bete ko abhi bhi thoos thoos kar khilana padhta hai 5 saal ka ho chuka hai phir bhi bamuskil apne hath se khata hai.. Didi ji! padhkar laga aapne mere man kee baat likh dee. aapka aabhar

    DR. ANWER JAMAL said...

    मुंतज़िर होंगी वो पाकीज़ा सी आंखें घर में
    घर की दहलीज़ पे नश्शे में कभी मत आना

    आपकी रचना खूबसूरत भी है और एक आला दर्जे की प्रेरणा देने वाली भी।
    इस ब्लॉग के सभी रीडर्स के साथ मैं आपका शुक्रगुज़ार हूं।
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    शालिनी कौशिक said...

    bahut sunder chtrmayee bhavpoorn prastuti..

    रवीन्द्र प्रभात said...

    माँ के बारे में आपकी अभिव्यक्ति सुन्दर है, वैसे माँ शब्दों में पूरी तरह नहीं बांधा जा सकता !

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