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स्त्री शरीर की एक कुदरती प्रक्रिया है मासिक धर्म

Disclaimer -  यहाँ दी गयी जानकारी  केवल शैक्षिक एवं सूचना के प्रसार  हेतु है. यह जानकारी किसी भी तरह से चिकित्सीय परामर्श या  व्यवसायिक चिकित्सा  स्वास्थ्य कर्मचारी  का विकल्प न समझी जाए. इस जानकारी  के दुरूपयोग की ज़िम्मेदारी  लेखिका या सबाई परिवार की नहीं है. पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी में सम्बंधित चिकित्सा कर्मचारी से परामर्श करें.   -अल्पना वर्मा  विज्ञान कार्यशाला में मैंने कहा था कि मैं स्त्रियों के स्वास्थ्य  से सम्बंधित कुछ पोस्ट ले कर  आऊंगी..थोड़ी देर से ही सही इस श्रृंखला को आरम्भ  करते  हुए आज मैं  जिस विषय पर आप से बात करूंगी वह बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है. चूँकि इस ब्लॉग को पुरुष भी पढते हैं तो इस पोस्ट पर यह प्रश्न उठ सकता है कि क्या महिलाओं की इस 'निजी 'कही जानी वाली  जानकारी को पुरुषों को भी बताना कितना ज़रुरी है? उसका यह जवाब है कि आज हम जिस २१ वीं  सदी में हैं उस में पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिला कर स्त्रियाँ  भी काम कर रही हैं.ऐसे म...

माँ ऐसे कपूत को क्यों माफ़ करेगी ? Maa

 Facebook  पर Arun Garg ji ने बताया - बेटे ने अपनी 75 वर्षीय बूढी माँ से पूछा "माँ चल तुझे तीर्थ करा लाता हूँ" बूढी माँ बोली इससे ज्यादा भली बात और क्या होगी, मन ही मन सोचती है आखिर संस्कारी पिता का संस्कारी पुत्र है मेरा बेटा. इस तरह माँ बेटे माँ वैष्णो देवी की यात्रा पर निकल पड़ते है, ट्रेन के सफ़र के थकेहारो ने कटरा की धर्मशाला में शरण ली. बेटा माँ से बोला माँ तुम तो वैसे भी बहुत थकी हो, माँ वैष्णो की चढाई नहीं कर सकोगी तुम यही ठहरो मैं मईया का प्रसाद चढ़ा के आता हूँ. माँ की आँखों में वात्सल्य की बूंदे छलक आई, मेरा बेटा कितना लायक है, भगवान् सबको ऐसा ही सपूत दे. बेटा कटरा से वैष्णो देवी निकल पड़ा. जब 2 दिन तक नहीं लौटा तो माँ को चिंता होने लगी, मन में बेटे की कुशलता की प्रार्थना करने लगी. वह धर्मशाला के मेनेजर के पास जा पहुंची और बोली "बेटा मेरा बेटा वैष्णो देवी से नहीं लौटा, आज दो दिन पूरे हो गए. मेनेजर बोला "अम्मा तेरा बेटा अब वैष्णो देवी से नहीं लौटेगा. वह तेरे खर्चे के पैसे हमें दे गया है, और हमें 1500 रुपए हर महीने भेज दिया करेगा". माँ सन्न रह गयी, कु...

हमारी मां की दुआ-सी दुआ किसी की नहीं

है सब नसीब की बातें खता किसी की नहीं ये जि़दगी है बड़ी बेवफा किसी की नहीं। तमाम जख्म जो अंदर तो चीखते हैं मगर हमारे जिस्म से बाहर सदा किसी की नहीं। वो होंठ सी के मेरे पूछता है चुप क्यों हो किताबे-ज़ुर्म में ऐसी सज़ा किसी की नहीं। बड़े-बड़े को उड़ा ले गई है तख्त केसाथ चरा$ग सबके बुझेंगे हवा किसी की नहीं। 'नज़ीर सबकी दुआएं मिली बहुत लेकिन हमारी मां की दुआ-सी दुआ किसी की नहीं।

है कोई रिश्ता माँ जैसा तो बता दो..

बहुत ख़ूबसूरत सा रिश्ता है माँ फ़लक से जो उतरा फ़रिश्ता है माँ वो बच्चों की धुन में है ऐसी मगन ज़रा सी नहीं होती उस को थकन है कोई रिश्ता माँ जैसा तो बता दो.. कहाँ से इतना प्यार माँ लाई ये बता दो... Wall Photos साभार - Farhat Durrani

किशोरों का मस्तिष्क ठीक से काम नहीं करता !

लंदन। माता-पिता अक्सर अपने किशोरवय बच्चों के व्यवहार से परेशान रहते हैं, लेकिन इसमें बच्चों का नहीं बल्कि उनके मस्तिष्क का दोष होता है। नए अध्ययन के मुताबिक, किशोरावस्था के दौरान मस्तिष्क ठीक ढंग से काम नहीं करता। शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि उम्र के इस मोड़ पर मस्तिष्क में नई कोशिकाओं को बनाने की प्रक्रिया बाधित होती है, जो नाटकीय परिणाम देती है। अखबार 'डेली मेल' के मुताबिक किशोरावस्था में नई कोशिकाओं के निर्माण में आने वाली बाधाओं के कारण उनमें न केवल व्यवहारिक समस्या पैदा होती है, बल्कि उनके बड़े होने पर सीजोफ्रेनिया जैसी दिमागी बीमारी का शिकार होने का खतरा भी होता है। ऐसा तब होता है, जब मस्तिष्क के हिप्पोकैंपस भाग में न्यूरॉन्स बनने में कमी आ जाती है। चूहों पर किए गए प्रयोग से पता चला कि यदि मस्तिष्क की कोशिकाओं के सुचारू विकास में बाधा आती है, तो वे असामाजिक हो जाते हैं। यही बाधा अगर वयस्क होने पर उत्पन्न होती है, तो ऐसा कोई प्रभाव नहीं दिखता। अध्ययन के प्रमुख प्रोफेसर एरी काफमैन ने 'न्यूरोसांइस जर्नल' में लिखा है कि यह अध्ययन सामाजिक विकास को समझने में मददगार...

प्रसव के बाद माता-पिता में पैदा होने वाला अवसाद

आज कुमार राधा रमण जी की पोस्ट साभार पेश की जा रही है और साथ में एक फोटो जो मीनाक्षी पंत जी के ब्लॉग से लिया गया है :   महिलाओं में अवसाद मनोविज्ञानियों को यह सवाल अक्सर परेशान करता है कि कोई मां आखिर कैसे खुद के जने स्वस्थ बच्चे को किसी कागज या कपड़े में लपेट कर अस्पताल , अनाथालय या किसी अन्य ऐसी सार्वजनिक जगह पर छोड़ आती है जहां उस पर किसी और नजर पड़ जाए और वह उसे पालने - पोसने के लिए ले जाए। अनचाही संतान या गरीबी जैसे सामाजिक कारणों के अलावा इसका एक और बड़ा कारण है प्रसव के बाद माता - पिता में पैदा होने वाला अवसाद। ब्रिटेन की एक बड़ी रिसर्च में दावा किया गया है कि उन लोगों ( महिलाओं - पुरुषों , दोनों ) में ऐसे अवसाद का काफी खतरा है जिन्हें मां - बाप बने ज्यादा अरसा न हुआ हो। करीब 90 हजार लोगों के डेटा के आधार पर की गई इस रिसर्च में यह नतीजा निकाला है कि प्रसव के पश्चात 13.9 प्रतिशत महिलाएं और 3.6 प्रतिशत पिता अवसाद की चपेट में आते हैं। पहली बार मां - बाप बने लोगों में यह संभावना 10 प्रतिशत से भी अधिक होती है कि वे अपने बच्चे को लेकर डिप्रेस हो जाएं। खासकर बच्चे के जन्म के बाद क...

13 million abortions every year in China due to its rigid population control programme

Chinese officials force woman to abort foetus A dozen officials burst into her home, dragged her out and carried out the abortion By Staff Published Friday, October 22, 2010 Picture of Xiao Aiying in a hospital in Siming, China. Her left upper arm carries a large bruise mark. (SUPPLIED) An eight-month pregnant Chinese woman who defied the one-child norm was dragged out of her home and forced to have an abortion. A dozen government officials entered the home of Xiao Aiying’s house and allegedly hit her and kicked her in the stomach before dragging her to a hospital where she was injected with a drug to kill the unborn baby, reported the Daily Mail on Friday. The 36-year-old woman was restrained while doctors went about their given task of injecting the drug. The incident happened on October 10 in Siming, near the city of Xiamen, south-west China. T...