यह सावन भी बीत गया माँ , ना आम, ना अमलतास, ना गुलमोहर, ना नीम, ना बरगद, ना पीपल किसी पेड़ की डालियों पे झूले नहीं पड़े ! ना चौमासा और बिरहा की तान सुनाई दी ना कजरी, मल्हार के सुरीले बोलों ने कानों में रस घोला ! ना मोहल्ले पड़ोस की लड़कियों के शोर ने झूला झूलते हुए आसमान गुँजाया , ना राखी बाँधने के बाद नेग शगुन को लेकर झूठ-मूठ की रूठा रूठी और मान मनौव्वल ही हुई ! जबसे तुम गयी हो माँ ना किसीने जीवन के विविध रंगों से मेरी लहरिये वाली चुनरी रंगी , ना उसमें हर्ष और उल्लास का सुनहरी, रुपहली गोटा लगाया ! ना मेरी हथेलियों पर मेंहदी से संस्कार और सीख के सुन्दर बूटे काढ़े , ना किसीने मेंहदी रची मेरी लाल लाल हथेलियों को अपने होंठों से लगा बार-बार प्यार से चूमा ! ना किसी मनिहारिन ने कोमलता से मेरी हथेलियों को दबा मेरी कलाइयों पर रंगबिरंगी चूड़ियाँ चढ़ाईं , ना किसीने ढेरों दुआएं देकर आशीष की चमकीली लाल हरी चार चार चूड़ियाँ यूँ ही बिन मोल मेरे हाथों में पहनाईं ! अब तो ना अंदरसे और पूए मन को भाते हैं , ना स...
Comments
विश्व की वो शान है ,
प्रकृति की शक्ति है ,
स्नेहमयी जननी है,,,,बहुत शानदार प्रस्तुति,,,,
RECENT POST LINK...: खता,,,
सभी ब्लॉग पोस्टों एवं टिप्पणियों का बैकअप लीजिए
ममता की मूर्ति है ,
Nice post.
Thanks.
ममता की मूर्ति है ,
...bahut badiya rachna..
प्रिय ब्लॉगर मित्र,
हमें आपको यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है साथ ही संकोच भी – विशेषकर उन ब्लॉगर्स को यह बताने में जिनके ब्लॉग इतने उच्च स्तर के हैं कि उन्हें किसी भी सूची में सम्मिलित करने से उस सूची का सम्मान बढ़ता है न कि उस ब्लॉग का – कि ITB की सर्वश्रेष्ठ हिन्दी ब्लॉगों की डाइरैक्टरी अब प्रकाशित हो चुकी है और आपका ब्लॉग उसमें सम्मिलित है।
शुभकामनाओं सहित,
ITB टीम
पुनश्च:
1. हम कुछेक लोकप्रिय ब्लॉग्स को डाइरैक्टरी में शामिल नहीं कर पाए क्योंकि उनके कंटैंट तथा/या डिज़ाइन फूहड़ / निम्न-स्तरीय / खिजाने वाले हैं। दो-एक ब्लॉगर्स ने अपने एक ब्लॉग की सामग्री दूसरे ब्लॉग्स में डुप्लिकेट करने में डिज़ाइन की ऐसी तैसी कर रखी है। कुछ ब्लॉगर्स अपने मुँह मिया मिट्ठू बनते रहते हैं, लेकिन इस संकलन में हमने उनके ब्लॉग्स ले रखे हैं बशर्ते उनमें स्तरीय कंटैंट हो। डाइरैक्टरी में शामिल किए / नहीं किए गए ब्लॉग्स के बारे में आपके विचारों का इंतज़ार रहेगा।
2. ITB के लोग ब्लॉग्स पर बहुत कम कमेंट कर पाते हैं और कमेंट तभी करते हैं जब विषय-वस्तु के प्रसंग में कुछ कहना होता है। यह कमेंट हमने यहाँ इसलिए किया क्योंकि हमें आपका ईमेल ब्लॉग में नहीं मिला। [यह भी हो सकता है कि हम ठीक से ईमेल ढूंढ नहीं पाए।] बिना प्रसंग के इस कमेंट के लिए क्षमा कीजिएगा।
हमारी शुभकामनाएं आपके साथ है.
हमारा ईमेल पता है-
eshvani@gmail.com
ममता की मूर्ति है ,
Bahut badhia...