मूत्राशय प्रदाह (cystitis) का कुदरती घरेलू पदार्थों से उपचार.

Posted on
  • Monday, September 24, 2012
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
  • in
  • Labels:
  •  
     मूत्राशय में रोग-जीवाणुओं का संक्रमण होने से मूत्राषय प्रदाह रोग उत्पन्न होता है। निम्न मूत्र पथ के अन्य अंगों किडनी, यूरेटर और प्रोस्टेट ग्रंथि और योनि में भी संक्रमण का असर देखने में आता है। 

       इस रोग  के कई कष्टदायी लक्छण होते हैं जैसे-तीव्र गंध वाला पेशाब होना,पेशाब का रंग बदल जाना, मूत्र त्यागने में जलन और दर्द  अनुभव होना, कमजोरी मेहसूस होना,पेट में पीडा और शरीर में बुखार की हरारत रहना। हर समय मूत्र त्यागने की ईच्छा बनी रहती है। मूत्र पथ में जलन  बनी रहती है। मूत्राषय में सूजन आ जाती है।

         यह रोग पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ज्यादा देखने में आता है। इसका कारण यह है कि स्त्रियों की पेशाब नली (दो इंच) के बजाय पुरुषों की मूत्र नलिका ७ इंच लंबाई  की होती है। छोटी नलिका से होकर संक्रमण सरलता से मूत्राषय को आक्रांत कर लेता है। गर्भवती स्त्रियां और सेक्स-सक्रिय औरतों में मूत्राषय प्रदाह रोग अधिक पाया जाता है। रितु निवृत्त महिलाओं में भी यह रोग अधिक होता है।

         इस रोग में मूत्र खुलकर नहीं होता है और जलन की वजह से रोगी पूरा पेशाब नहीं कर पाता है और मूत्राषय में पेशाब बाकी रह जाता है। इस शेष रहे मूत्र में जीवाणुओं का संचार होकर रोगी की स्थिति ज्यादा खराब हो सकती है।

        आधुनिक चिकित्सक एन्टीबायोटिक दवाओं से इस रोग को काबू में करते हैं लेकिन कुदरती और घरेलू पदार्थॊं  के उपचार भी इस रोग में फ़लदायी होते है। 

    १)  खीरा ककडी का रस इस रोग में अति लाभदायक है। २०० मिलि ककडी के रस में एक बडा चम्मच नींबू का रस  और एक चम्मच शहद मिलाकर हर तीन घंटे के फ़ासले से पीते रहें।

    २) पानी और अन्य तरल पदार्थ प्रचुर मात्रा में प्रयोग करें। प्रत्येक १० -१५ मिनिट के अंतर पर एक गिलास पानी या फ़लों का रस पीयें। सिस्टाइटिज नियंत्रण का यह रामबाण उपचार है।

    ३)  मूली के पत्तों का रस लाभदायक है। १०० मिलि रस दिन में ३ बार प्रयोग करें।

    ४)  नींबू का रस इस रोग में उपयोगी है। वैसे तो नींबू स्वाद में खट्टा होता है लेकिन गुण क्छारीय हैं। नींबू का रस मूत्राषय में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट करने में सहायक होता है। मूत्र में रक्त आने की स्थिति में भी लाभ होता है।






    ५)  पालक रस १२५ मिलि में नारियल का पानी मिलाकर पीयें। तुरंत फ़ायदा होगा। पेशाब में जलन मिटेगी।

    ६)  पानी में मीठा सोडा यानी सोडा बाईकार्ब मिलाकर पीने से तुरंत लाभ प्रतीत होता है लेकिन इससे रोग नष्ट नहीं होता। लगातार लेने से स्थिति ज्यादा बिगड सकती है।

    ७) गरम पानी से स्नान करना चाहिये। पेट और नीचे के हिस्से में गरम पानी की बोतल से सेक करना चाहिये। गरम पानी के टब में बैठना लाभदायक है।

    ८)  मूत्राषय प्रदाह रोग की शुरुआत में तमाम गाढे भोजन बंद कर देना चाहिये।दो दिवस का  उपवास करें। उपवास के दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल,पानी,दूध लेते रहें। 

    ९)  विटामिन सी (एस्कार्बिक एसिड) ५०० एम जी दिन में ३ बार लेते रहें। मूत्राषय प्रदाह निवारण में उपयोगी है।

    १०) ताजा भिंडी लें। बारीक काटॆं। दो गुने जल में उबालें। छानकर यह काढा दिन में दो बार पीने से मूत्राषय प्रदाह की वजह से होने वाले पेट दर्द में राहत मिल जाती है।

    ११)  आधा गिलास मट्ठा में आधा गिलास जौ का मांड मिलाएं इसमें नींबू का रस ५ मिलि मिलाएं और पी जाएं। इससे मूत्र-पथ के रोग नष्ट होते है।

    १२) आधा गिलास  गाजर का रस में इतना ही पानी मिलाकर पीने से मूत्र की जलन दूर होती है। दिन में दो बार प्रयोग कर सकते हैं।




    मेरा फोटो





    Dr. Aalok Dayaram
    dr.dayaram aalok,M.A.,Ayurved Ratna,D.I.Hom(London
    व्यवसाय-हर्बल चिकित्सा। विशेषत:गुर्दे एवं पित्ताषय की पथरी और प्रोस्टेट वृद्धि से मूत्र बाधा की चिकित्सा। 
    mobile: 09926524852

    1 comments:

    आशा जोगळेकर said...

    अच्छी जानकारी ।

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • रोटियाँ बनाम टोटियाँ - मक्की की रोटी यदि आपको नए कलेवर के साथ मिले तो आप आश्चर्य में पड़ जाएंगे और पूछ ही लेंगे कि यह क्या है? बताया गया कि यह टोटियाँ हैं। हमने कहा कि रोटियां है...
    • रघुवर तुमसे मैं हारी - रघुवर तुमसे मैं हारी अनुनय कभी न सुनी मेरी ना कोई दुःख ना असंतोष पर फिर भी कहीं कोई कमी खल रही मुझको जब से तुमसे दूरी पाली ऐसा कभी सोचा न था क्यों तुमसे...
    • पर्व संक्रान्ति - मीठी गजक चटपटे मंगौड़े तिल के लड्डू लैया की पट्टी मूंगफली की पट्टी जाड़ों की मेवा मीठी रेवड़ी बाजरे की टिकिया खोये के लड्डू पोंगल भात बाजरे की ख...
    • विभीषण अब भी हैं - [image: four judges image के लिए इमेज परिणाम][image: image of vibhishana के लिए इमेज परिणाम] देश में इस वक़्त चारों तरफ एक मुद्दा गर्म है और वह है लोकतंत्...
    • History fills the gap between origin of human and being human. - Dr Sharad Singh - *History Quotation of Dr (Miss) Sharad Singh**इतिहास मानव की उत्पत्ति और मानव होने के बीच की खाई को भर देता है - डॉ. शरद सिंह* *A piece of Sculpture in Thr...
    • एक हमारा प्यारा तोता - एक हमारा प्यारा तोता 'ओरियो ' है वह कहलाता बोली हमारी वह सीखता फिर उसको है दोहराता चोंच उसकी है लाल-लाल ठुमक-ठुमक है उसकी चाल घर-भर वह पूरे घूमता रहता मिट्...
    • बिजूका पर मेरी कवितायेँ - आपका लिखा कभी जाया नहीं होता इसका उदाहरण है ये कि हिंदी समय पर मेरी कवितायें शामिल हैं. वहाँ प्रोफ़ेसर संजीव जैन जी ने पढ़ीं और बिजूका समूह जो व्हाट्स एप पर ...
    • तुम और मैं -९ - *मैंने दीया जला कर * *कर दी है रोशनी ...* *तुम प्रदीप्त बन * *हर लो, मेरा सारा अविश्वास |* *मेरे आराध्य !* *आस के दीये में * *बची रहे नमी सु...
    • चिता की राख ! - चिता की राख ------------- रात में अचानक जोर जोर से ...
    • - * गज़ल * बेवफाई के नाम लिखती हूँ आशिकी पर कलाम लिखती हूँ खत में जब अपना नाम लिखती हूँ मैं हूँ उसकी जिमाम लिखती हूँ आँखों का रंग लाल देखूँ तो उस नज़र को मैं...
    • नींद बनाम ख्व़ाब - मैंने अपनी नींदें बेच, कुछ ख्वाब खरीदे थे। रख दिया था सहेज कर, उन्हें अपनी पलकों तले। वक़्त की बारिशों औ आंधी से, कुछ उड़ गए, कुछ बह गए। कुछ को बचाया जतन...
    • माँ तुझे प्रणाम - *माँ तुझे प्रणाम* *शत शत नमन कोटि प्रणाम * *माँ तुझे प्रणाम ।* *जब मैं तेरी कोख में आई * *तूने स्पर्श से बताया था * *ममता का कोई मोल नहीं * *तूने ही सि...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -4) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से वे जग जाती हैं,और पुराना जीवन याद करने लगती हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में श...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

    • बेटी का जीवन - [image: beautiful girl child image के लिए इमेज परिणाम][image: beautiful girl child image के लिए इमेज परिणाम] बेटी का जीवन भी देखो कैसा अद्भुत होता है, देख क...
      1 week ago
     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.