'सत्यमेव जयते' में पतियों के जुल्म की कहानी 'satymev-jayate'

Posted on
  • Sunday, June 17, 2012
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
  • in

  • SMJ.jpg
    नई दिल्‍ली।। 'सत्‍यमेव जयते' में आमिर ने इस हफ्ते उठाया महिलाओं की सुरक्षा और घरेलू हिंसा का मुद्दा। शो की शुरुआत में दर्शकों की लाइन में बैठे सभी पुरुषों से आमिर ने पूछा कि ऐसी कौन सी जगहे हैं, जहां महिलाएं असुरक्षित हैं? दर्शकों ने लोकल ट्रेन, सबवे से रात को अकेले गुजरना, कॉल सेंटर्स को महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा असुरक्षित बताया। लेकिन आमिर ने बताया कि महिलाएं पब्लिक प्लेसों मे नहीं बल्कि घर में असुरक्षित हैं।
    आमिर ने शो में मुंबई निवासी स्‍नेहलता को बुलाया और दर्शकों को उनकी कहानी उन्हीं की जुबानी सुनवाई कि कैसे उनके पति उनके साथ मारपीट करते थे और बात-बात पर गंदी गालियां देते थे, हाथ उठाते थे। स्नेहलता ने बताया कि एक बार पति की पसंद के चावल नहीं बने तो उन्होंने उसे जोर से थप्‍पड़ मार दिया। थप्पड़ मारते वक्त पति ने यह तक नहीं देखा कि स्नेहलता की गोद में उनकी छोटी सी छोटी बच्‍ची भी थी। थप्पड़ इतनी जोर से मारा गया कि गोद से बच्ची जमीन पर गिर गई। यही नहीं, एक बार वह अपने भाई से मिलने गईं तो पति ने यहाँ तक भला-बुरा कहा कि अपने यार से मिलकर आई है। जब उन्होंने कहा कि वह उसका भाई है तो पति बोला कि भाई है तो क्या हुआ है तो पुरुष ही न। स्नेहलता ने बताया कि जरा सी बात पर उन्हें रात-रात भर घर से बाहर रखा जाता था। सालों तक उन्होंने अपनी बच्ची की वजह से यह सब सहा, लेकिन एक दिन उनके सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने पति को छोड़ने का फैसला कर लिया।
    शो में जानी-मानी लेखिका और दिल्‍ली में घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं और बच्‍चों की काउंसिलिंग करने वालीं रश्मि आनंद को भी बुलाया गया था, जो खुद सालों तक घरेलू हिंसा की शिकार रही हैं। रश्मि ने बताया कि किस तरह शादी के दो-तीन दिन के बाद ही उन पर अत्याचार होने लगे, बात-बात पर मारा-पीटा जाने लगा। उन्होंने कहा कि शुरुआत में तो उनका पति यह सब करने के बाद काफी रोता था और माफी मांगता था, लेकिन जैसे-जैसे वक्त बीता पति का रोना कम होता गया और जुल्म बढ़ते गए। तैयार नहीं तो थप्‍पड़, गलती से बहस की तो थप्‍पड़।
    रश्मि ने कहा कि जब वह प्रेगनेंट थीं तो उनके पति ने पहली मंजिल की सीढ़ियों से धक्का दे दिया था, जिससे बच्चे की मौत हो गई थी। हर साल कोई न कोई हड्डी टूटती। रश्मि ने सालों तक यह सोचकर सबकुछ सहती रहीं कि दो बच्चों के साथ वह कहां जाएंगीं और क्या करेंगी... लेकिन फिर रश्मि पति को छोड़ अपने मां-बाप के पास वापस कोलकाता चलीं गईं और आज वह अपने बच्चों की मां भी हैं और पिता भी। रश्मि ने बताया कि जब उन्‍होंने अपने पति को छोड़ दिया तो उनके पति ने उनके चरित्र पर उंगलियां उठाईं। उन्‍हें बदनाम करने की कोशिशें कीं।
    आमिर ने शो में आकंड़े पेश किए और बताया कि भारत सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक 40 प्रतिशत औरतें घर में मार-पीट की शिकार होती हैं। वहीं प्‍लानिंग कमीशन की एक रिपोर्ट के अनुसार 84 प्रतिशत महिलाओं पर कभी न कभी पति और उनके घर वालों ने हाथ उठाया होता है। इस हिसाब से अगर बीच की संख्‍या लें तो 50 फीसदी महिलाएं घर में मारपीट का शिकार होती हैं।
    Source : http://navbharattimes.indiatimes.com/satyamev-jayate/articleshow/14204264.cms

    0 comments:

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • तुम गाँधी तो नहीं ! - ना ना पीछे मुड़ कर ना देखना क्या पाओगे वहाँ वीभत्स सचाई के सिवा जिसे झेलना तुम्हारे बस की बात नहीं तुम कोई गाँधी तो नहीं ! सामने देखो तुम्हें आगे बढ़ना ...
    • शापित मंजिलें - *... स्थितियाँ * *बदल देती हैं * *राह जिंदगी की ...* *... मंजिलें* *अक्सर अकेली रह * *शापित हो जाया करती हैं !!* *सु-मन *
    • बातें हैं बातों का क्या ....... - अम्बुआ की डाली पर चाहे न कुहुके कोयल किसी अलसाई शाम से चाहे न हो गुफ्तगू कोई बेनामी ख़त चाहे किसी चौराहे पर क्यों न पढ़ लिया जाए ज़िन्दगी का कोई नया शब्दक...
    • पहाड़ों के बीच बसा अलसीगढ़ - #हिन्दी_ब्लागिंग मनुष्य प्रकृति की गोद खोजता है, नन्हा शिशु भी माँ की गोद खोजता है। शिशु को माँ की गोद में जीवन मिलता है, उसे अमृत मिलता है और मिलती है सुरक...
    • केवल राष्ट्र के लिए था यह सृजन - देश की स्वतंत्रता के लिए 1857 से लेकर 1947 तक क्रान्तिकारियों व आंदोलनकारियों के साथ ही लेखकों, कवियों और पत्रकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय...
    • कृष्ण लीला - ग्वाल बाल साथ ले कान्हा ने धूम मचाई गोकुल की गलियों में ! खिड़की खुली थी घर में छलांग लगाई खाया नवनीत खिलाया मित्रों को भी कुछ खाया कुछ फैलाया आहट ...
    • नींद बनाम ख्व़ाब - मैंने अपनी नींदें बेच, कुछ ख्वाब खरीदे थे। रख दिया था सहेज कर, उन्हें अपनी पलकों तले। वक़्त की बारिशों औ आंधी से, कुछ उड़ गए, कुछ बह गए। कुछ को बचाया जतन...
    • तुम राम बनके दिल यूँ ही दुखाते रहोगे . - [image: Image result for seeta agni pariksha image] अवसर दिया श्रीराम ने पुरुषों को हर कदम , अग्नि-परीक्षा नारी की तुम लेते रहोगे , करती रहेगी सीता सदा मर्य...
    • - गज़ल 1 मुहब्बत से रिश्ता बनाया गया उसे टूटते रोज पाया गया मुहब्बत पे उसकी उठी अँगुलियाँ सरे बज़्म रुसवा कराया गया यहाँ झूठ बिकता बड़े भाव पर मगर सच को ठेंगा द...
    • माँ तुझे प्रणाम - *माँ तुझे प्रणाम* *शत शत नमन कोटि प्रणाम * *माँ तुझे प्रणाम ।* *जब मैं तेरी कोख में आई * *तूने स्पर्श से बताया था * *ममता का कोई मोल नहीं * *तूने ही सि...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • नया साल ! - समर घर से निकला तो पत्नी और बच्चों के लिए गिफ्ट पहले ही खरीदता हुआ होटल पहुंचा था। रात में प्रोग्राम ख़त्म करके सीधे घर भागेगा क्यो...
    • वेदों में गायन कला - *- डॉ. शरद सिंह* *गायन मानव की संवेदनाओं को जागृत करता है.आज दुनिया भर में संगीत के महत्व पर वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं . पाश्चात्य जगत के व...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -9) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना पुराना जीवन याद करने लगती > हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में > ...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.