Cyclebeads या मालाचक्र : गर्भ नियोजन का एक लाभप्रद उपाय

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  • Tuesday, March 6, 2012
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  • DR. ANWER JAMAL
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  • 05 दिसम्बर 2011
    वार्ता| तिरूवनंतपुरम। भारत की बढ़ती आबादी पर काबू पाने के लिए परिवार नियोजन के उपाय के तौर पर साइकिलबीड्स या मालाचक्र विकसित की गयी है जो न केवल बहुत सस्ती है बल्कि उससे किसी तरह के दुष्प्रभाव की कोई गुंजाइश नहीं है।

    यह उपाय उन लोगों के लिये है जो कण्डोम, गर्भनिरोधक गोली अथवा किसी अन्य प्रकार का गर्भनिरोधक इस्तेमाल करने को उचित नहीं समझते हैं। लेकिन इसमें संयम की बड़ी भूमिका होती है।

    जार्जटाउन विश्वविद्यालय इंस्टीटयूट द्वारा विकसित यह उपाय स्त्री के मासिक च्रक पर आधारित है और इसकी मदद से वह अनियोजित गर्भधारण पर खुद से ही रोक लगा सकती है। यह मालाचक्र ऐसी महिलाओं के लिए कारगर है जिनका मासिक चक्र 26वें दिन से 32वें दिन तक रहता है।

    54 फीसदी दंपत्ति गर्भ निरोधकों का इस्तेमाल करते हैं

    मालाचक्र रंगीन मोतियों की एक माला होती है जिसमें महिला के मासिक चक्र के दिनों के हिसाब से एक रंगीन मोती पिरोया गया है। इस रंग की मदद से वह यह जान सकती है कि उसके गर्भवती होने की संभावना किस दिन ज्यादा है या कम है।

    मालाचक्र तकनीक को प्रयोग करने के लिए महिला को रजस्वला होने के पहले दिन की पहचान लाल रंग के मोती से करनी होती है और इसके बाद प्रत्येक दिन के लिए छल्ले में एक अन्य मोती होता है। लाल रंग का मोती यह बताने के लिए है कि उसके इस दिन गर्भवती होने का अवसर नहीं के बराबर है और यह दिन उसके यौन संबंध के लिए उचित है।

    मालाचक्र में सफेद मोती उस दिन की पहचान के लिए होता है जब उसका मासिक चक्र समाप्त होता है यानि महीने के आठवें दिन से 19 दिन की पहचान उसे छल्ले में सफेद मोती से करनी है। इन श्वेत मोतियों से यह संकेत मिलता है कि यदि इन दिनों वह अपने पुरूष साथी के साथ यौन संबंध बनाती है तो उसके गर्भधारण करने की संभावना सर्वाधिक होती है बशर्ते उसने गर्भ निरोध के किसी अन्य उपाय का प्रयोग नहीं किया हो।

    ‘गर्भनिरोधक गोलियां’ करती हैं याददाश्ता कमजोर

    इस माला चक्र का निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एचएलएल हेल्थकेयर लिमिटेड कर रही है। परिवार नियोजन के क्षेत्र में नेतृत्व कारी भूमिका निभाने वाले तथा गर्भनिरोधक उत्पादों के सबसे बडे़ निर्माता एचएलएल ने मालाचक्र के निर्माण के लिए अमेरिकी कंपनी साइकिल टेक्नोलाजी से समझौता किया है।

    एचएलएल लाइफकेयर के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एम अयप्पन ने बताया कि इस माला को मालाचक्र और रितुमाला के नाम से उत्पादित किया जा रहा है। यह एक प्राकृतिक तरीका है और इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं है। यह उपाय ऐसे नए दंपत्तियों के लिए बेहद कारगर है जो यह समझते हैं कि किसी प्रकार के गर्भनिरोध का उपाय अपनाने से उनकी यौन क्षमता प्रभावित हो सकती है।

    उन्होंने कहा कि यह महिला के मासिक धर्म पर आधारित है और यह न केवल महिला सशक्तिकरण में मदद करता है बल्कि पुरूष को भी परिवार नियोजन के काम में शामिल करता है। वास्तव में इन उपायों में पुरूषों की सहभागिता मौजूदा समय की जरुरत है। यह उपाय जनसंख्या नियंत्रण के तरीकों में प्रभावी भूमिका निभाने में सक्षम है इसलिए यह सरकार के लिए काफी मददगार भी है।

    अयप्पन ने झारखंड सरकार की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि यह राज्य इस नयी तकनीक को अपनाने में अग्रणी है और उसने राज्य के विभिन्न समुदायों को यह उपाय वितरित किया है। इस उपाय को अपनाने वाला वह पहला राज्य है और इससे राज्य के लोगों को गर्भनिरोध के उपायों का नया विकल्प मिल सकेगा। इसकी किट राज्य के 24 जिलों में से 12 में उपलब्ध है। फिलहाल राज्य में करीब 40 हजार लोग इस मालाचक्र का प्रयोग कर रहे है।

    गर्भनिरोधक गोलियों से पुरुषों में कैंसर का खतरा

    उन्होंने दावा किया कि अन्य उपायों की तुलना में यह उपाय 95 प्रतिशत तक प्रभावी है। यह एक बेहद साधारण तरीका है और भारत के परिवार नियोजन का एक लाभप्रद उपाय है। इसे न तो दोबारा नया चाहिए और न इसका स्वास्थ्य पर कोई खराब असर पड़ता है।
    Source : http://hindi.in.com/latest-news/money-and-life/A-New-Family-Planning-Way-For-Women-1281662.html
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    यह माला बनाना बहुत आसान है , इसे अपने घर पर कोई भी बना सकता है। देखिये कि किस रंग का दाना धागे में कहाँ पिरोना है ?

    Research shows that women who use CycleBeads correctly are able to avoid unplanned pregnancies more than 95% of the time. (Georgetown University Medical Center)
    The Standard Days Method (TM), a new natural method of family planning, is more than 95% effective at preventing pregnancy, according to an international study conducted by Georgetown University Medical Center’s Institute for Reproductive Health. Results of the study are published in the current issue of Contraception, the journal of the Association of Reproductive Health Professionals.

    Based on sophisticated computer modeling of reproductive physiology data, the Standard Days Method identifies the 12-day "fertile window" of a woman’s menstrual cycle. These 12 days take into account the life span of the woman’s egg (about 24 hours) and the viable life of sperm (about 5 days) as well as the variation in the actual timing of ovulation from one cycle to the next. The study found the efficacy of the Standard Days Method to be comparable to or better than a number of other widely used methods of family planning, including the diaphragm and condom.

    The two-year clinical trial evaluated the effectiveness of the Standard Days Method of family planning for 478 women in Bolivia, Peru and the Philippines. The women were of childbearing age with menstrual cycles between 26 and 32 days long. The study followed the women over 13 cycles.

    "Millions of women worldwide use no form of family planning whatsoever, even though they do not want to become pregnant. And millions more rely on periodic abstinence as their primary form of family planning, but do not have a clear understanding of which days in their cycle they should avoid unprotected intercourse," said Victoria Jennings, PhD, Georgetown professor of obstetrics and gynecology and principal investigator of the study. "Clearly there is a need for a simpler, easier method of natural family planning--and that is where the Standard Days Method can really fill a void."

    To help women keep track of which days to avoid unprotected intercourse, the Institute for Reproductive Health developed CycleBeads (TM), a string of 32 color-coded beads with each bead representing a day of the menstrual cycle. Beginning with the red bead, which represents the first day of her menstrual period, the woman moves a small rubber ring one bead each day. The brown beads are the days when pregnancy is very unlikely, and the glow-in-the dark white beads (beads 8-19) represent her fertile days. The 478 women who participated in the clinical trial relied on CycleBeads to track their cycles.

    The method works best for women whose cycles are usually between 26 and 32 days long. Women use the CycleBeads and the Standard Days Method the same way every month.

    "In our research, CycleBeads were found to be an easy way for women to use the Standard Days Method. They are an effective tool for women who want to use a reliable, inexpensive, non-invasive, non-hormonal method of family planning," said Dr. Jennings.

    The Standards Days Method differs from the rhythm method in that the rhythm method requires that the woman collect detailed information about the last six menstrual cycles and perform monthly calculations to figure out which days in the current cycle she is most likely to get pregnant. The Standard Days Method requires no such calculations. No reliable, scientific effectiveness trial of the rhythm method has been reported.

    According to the 1998 edition of Contraceptive Technology, 85% of women who use no method of family planning will get pregnant in one year. The percent of women who will become pregnant during the first year of perfect use of a "user-controlled" method is as follows:


    Cervical cap, 9 - 26%
    Spermicides, 6%
    Diaphragm, 6%
    Female condom, 5%
    Male condom, 3%
    Birth control pills, 0.1 - 0.5%
    Standard Days Method, 5% (2002 Georgetown study)

    Several thousand women in 14 countries currently use the Standard Days Method and CycleBeads. Plans to manufacture and distribute CycleBeads in numerous countries, including the United States, are currently underway. More information about the Standard Days Method and CycleBeads can be found at www.irh.org.


    Co-authors of the new Standard Days Method study published in Contraception are Marcos Arevalo, MD, MPH and Irit Sinai, PhD, both assistant professors of obstetrics and gynecology at Georgetown University Medical Center. The study was funded by the U.S. Agency for International Development.

    Georgetown University Medical Center includes the School of Medicine, School of Nursing and Health Studies, the Lombardi Cancer Center and a $120 million biomedical research enterprise। The Institute for Reproductive Health (www.irh.org) conducts research, advances scientific information, and provides policy support in natural family planning and fertility awareness.
    Sorce : http://www.innovations-report.com/html/reports/medicine_health/report-10504.html

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