बच्चों का पालन-पोषण

Posted on
  • Wednesday, March 21, 2012
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
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  • अगर हमें अपने बच्चों का पालन-पोषण करना है ताकि वे हमारी तरह विकृत न हों...

    जिज्ञासुः
    अगर हमें अपने बच्चों का पालन-पोषण करना है ताकि वे हमारी तरह विकृत न हों और बिगडे न, और समाज के गलत लोगों के प्रभाव में न आएँ, तो उनके लिए हमें किस तरह का परिवेश बनाना चाहिए?
    सद्गुरु -

    अगर तुम्हें इतनी बात समझ में आ गई है कि तुम्हारा जीवन विकृत है, तो पहला काम जो करना है, वह है कि अपने बच्चों को हाथ मत लगाओ, अपने विकृत मन से उसके मन को प्रभावित मत करो। तुम्हें यही पहला कदम उठाने की जरूरत है। अब यह प्रश्न हैः “मुझे क्या करना चाहिए? मेरे बच्चे की शिक्षा कैसी होनी चाहिए? मुझे उसका पालन-पोषण कैसे करना चाहिए? मुझे उसका मार्ग-दर्शन कैसे करना चाहिए?” तुम उसे बस बुद्धिमान होने के लिए, जागरूक होने के लिए प्रोत्साहित करो। हर प्राणी को अपने जीवन की पूर्ति के लिए आवश्यक बुद्धि दिया गया है। एक चींटी पैदा होती है, तुम उसे देखो और अध्ययन करो। एक चींटी के जीवन को पूर्णता में जीने के लिए उसके पास सभी ज्ञान है। यह वह करने लायक नहीं हो सकती जो तुम कर रहे हो, लेकिन एक चींटी के रूप में, एक चींटी होने के लिए आवश्यक ज्ञान उसमें है। यह सभी जीवों के साथ लागू होता है। ठीक उसी प्रकार, यह तुम पर भी लागू होता है। तुम्हारे पास भी जीवन को पूर्णता में जीने के लिए आवश्यक ज्ञान है।

    अब समस्या यह है कि तुम चाहते हो कि तुम्हारा बच्चा तुम्हारे हिसाब से बुद्धिमान हो, उसके हिसाब से नहीं। तुम चाहते हो कि बच्चा उस तरह से बुद्धिमान हो, जिस तरह से तुमने बुद्धि को समझा है। अब, बुद्धि के संबंध में तुम्हारा विचार यह है कि तुम्हारे बच्चे को एक डॉक्टर बनना चाहिए। हो सकता है वह एक अद्भुत बढई बने, लेकिन तुम चाहते हो कि वह एक डॉक्टर बने, इसलिए नहीं कि संसार में डॉक्टरों की जरूरत है, इसलिए नहीं कि तुम पीडतों का बहुत ख्याल रखते हो जिससे तुम चाहते हो कि तुम्हारा बच्चा खुद को एक डॉक्टर के रूप में समर्पित करे, बल्कि इसलिए कि तुम्हारे दिमाग में एक मूर्खतापूर्ण कल्पना है कि सामाजिक व्यवस्था में एक डॉक्टर या इंजिनियर का अर्थ एक प्रकार की प्रतिष्ठा या कुछ और निरर्थकता है। इसका कारण यह है कि तुमने खुद अपने भीतर कोई तत्व नहीं पाया। तुम अपना जीवन अपने बच्चे के जरिए जीना चाहते हो। “मेरा बच्चा एक डाक्टर है!” यह बच्चों को बर्बाद करने का एक पक्का मार्ग है। यह बच्चों को बर्बाद करने का एक निश्चित तरीका है।
    अब प्रत्येक बच्चे में आवश्यक बुद्धि नहीं होती। उसके ऊपर अपने विकृत विचारों को थोपने के बजाय, उसे अपनी बुद्धि का विकास करने के लिए तुम उसके लिए एक वातावरण की रचना करो। जहाँ तक उसे प्रभावित करने की बात है, उसमें शिक्षकों की एक भूमिका होगी, उसके मित्रों की कुछ भूमिका होगी और समाज के दूसरे वर्ग का भी उसके ऊपर प्रभाव होगा। तुम इसे पूरी तरह से अपने वश में नहीं कर सकते। तुम अपने बच्चे के लिए कोई अस्पताल नहीं बना सकते, लेकिन फिर भी माता-पिता के रूप में, बच्चे के बुद्धि को विकसित करने में तुम बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा का सकते हो। सबसे पहले, अगर तुम इस विचार पर पहुँचे हो कि जब एक बच्चे का जन्म होता है, तो वह सिखाने का समय होता है, फिर तुम बच्चे को बर्बाद कर दोगे। जब तुम्हारे जीवन में एक बच्चा आता है, तब वह सीखने का समय होता है, क्योंकि तुम अपने जीवन में बहुत कुछ चूक गए हो। तुम्हारा बहुत सा भाग विकृत हो चुका है। जीवन को ताजगी में देखते हुए अब एक बच्चा आया है। तुम उसके साथ बैठो और जीवन को नए ढंग से देखो। तुम्हारी सडन भी कुछ हद तक चली जाएगी। उसकी बुद्धि विकसित होगी। एकमात्र चीज जो तुम अपने बच्चे के लिए कर सकते हो वह है उसे प्रेम और सहारा देना। बस इतना ही है। उसके लिए एक प्रेममय वातावरण रचो जहाँ उसकी बुद्धि अपने आप खिल उठेगी। यही एकमात्र चीज है जो तुम कर सकते हो। यह जरूरी नहीं है कि तुम्हारा बच्चा भी वही करे जो तुमने अपने जीवन में किया है। तुम्हारे बच्चे को वह काम करना चाहिए जिसके बारे में तुमने अपने जीवन में सोचने की भी हिम्मत नहीं की, है कि नहीं? तुम्हारे बच्चे को वह करना चाहिए जिसके बारे म सोचने का तुममें साहस भी नहीं था। तुम में इस तरह के विचार को पोषित करने की भी हिम्मत नहीं थी। तुम्हारे बच्चे को वही करना चाहिए। केवल तभी यह संसार प्रगति करेगा और कुछ घटित होगा, है कि नहीं? विशेषकर भारत में, जहाँ हमारे पास बच्चों की एक विशाल संख्या है!
    वास्तव में, आज इस देश में बच्चा पैदा करना एक अपराध है। एक अरब लोग! तुमने यह प्रेमवश नहीं किया है। तुमने यह इसलिए किया है क्योंकि संभवतः तुम्हारे पास करने के लिए और कुछ भी नहीं है। तुम्हें करने के लिए कुछ और सार्थक काम नहीं मिल पाया इसलिए तुम बच्चे पैदा करते गए। जीवन के प्रति प्रेम के कारण नहीं, बल्कि असुरक्षा के कारण या क्योंकि तुम्हारे पास करने के लिए और कुछ नहीं था, लेकिन ज्यादातर असुरक्षा के कारण।
    लोग यह समझते हैं कि बच्चे की प्रेमपूर्वक परवरिश करने का अर्थ है उसे वह सब कुछ देना जो वह माँगता है। यह बहुत बडी मूर्खता और घृणास्पद है। सबसे पहले, तुम अपने बच्चे की ओर विवेकपूर्वक देख भी नहीं रहे हो। अगर तुम अपने बच्चे की ओर विवेकपूर्वक देखते हो, तो क्या उसे वह सब कुछ देना जो वह माँगता है, निपट मूर्खता नहीं है? और इसे तुमने‘प्रेम’का नाम दिया है। तुम्हें एक बच्चे की परवरिश कैसे करनी चाहिए? उसे चाहे जिस भी परिस्थिति में डाल दिया जाए, उसमें आनंदपूर्वक रहने की योग्यता होनी चाहिए, है कि नहीं? यही एक तरीका है जिसमें उसकी परवरिश होनी चाहिए।
    अगर तुम अपने बच्चे की परवरिश अच्छी तरह से करना चाहते हो, तो पहली बात यह है कि तुम्हें खुश होना चाहिए; लेकिन तुम खुद नहीं जानते कि खुश कैसे रहा जाए। तुम्हारे घर में प्रतिदिन तनाव, क्रोध, डर, चिन्ता और ईर्ष्या का वातावरण होता है। केवल यही चीजें अपने बच्चे को दिखाई जाती हैं। उस पर क्या गुजरेगी? वह केवल यही सीखेगा। अगर सचमुच तुम्हारी इच्छा अच्छी तरह से अपने बच्चे की परवरिश करने की है, तो पहले तुम्हें अपने आचरण का ढंग बदलना होगा। तुम्हें खुद को एक प्रेमपूर्ण, आनंदपूर्ण, और शांतिपूर्ण प्राणी में बदलना होगा। अगर तुम यह नहीं जानते कि कैसे खुद को आनंदपूर्ण, शांतिपूर्ण और प्रेममय इंसान बनाया जाए, तो फिर तुम अपने बच्चे के लिए क्या कर सकते हो? तुम्हारा बच्चा केवल तुम्हारे तनाव, क्रोध, चिन्ता और हर दूसरी बाकवासों को ही सीखेगा। अगर तुम सचमुच अपने बच्चे के बारे में चिंतित हो, तो पहले तुम्हें खुद को रूपांतरित करने के लिए इच्छुक होना चाहिए। अगर तुम खुद को रूपांतरित करने में असक्षम हो, तो यह प्रश्न ही कहाँ उठता है कि तुम अपने बच्चे की परवरिश करो। तो क्या यह बेहतर नहीं है कि तुम एक बच्चा पैदा करने से पहले इस पर विचार करो, कि तुम सक्षम हो या नहीं, तुम्हें इस जीवन में इसकी जरूरत है या नहीं? है कि नहीं? 
    http://www.ishafoundation.org/hi/QandA/sadhguru-question1.isa

    5 comments:

    शिखा कौशिक said...

    sateek prastuti . aabhar ye hai mission london olympic-support this ...like this page

    ***Punam*** said...

    badhiya prastuti...!

    dheerendra said...

    बहुत सुंदर भाव अभिव्यक्ति,बेहतरीन सटीक रचना,......

    my resent post


    काव्यान्जलि ...: अभिनन्दन पत्र............ ५० वीं पोस्ट.

    रविकर said...

    प्रस्तुती मस्त |
    चर्चामंच है व्यस्त |
    आप अभ्यस्त ||

    आइये
    शुक्रवारीय चर्चा-मंच
    charchamanch.blogspot.com

    Nityanand Gayen said...

    बेहतरीन

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    प्यारी माँ

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