हाथ से खिलाया तो इंडियन पैरंट्स से छीने बच्चे

Posted on
  • Monday, January 23, 2012
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
  • in
  • Labels:
  • indian-couple.jpg
    सौजन्य: एनडीटीवी
    ओस्लो।। नॉर्व में रहने वाला एक इंडियन कपल वहां के अजीब कायदे कानूनों की वजह से अपने बच्चों से 8 महीनों से मिल नहीं पा रहा है। सरकारी की चली तो वे बच्चों के 18 साल का होने तक उनसे साल में सिर्फ दो बार एक - एक घंटे के लिए ही मिल पाएंगे। इंडियन कपल अनुरूप और सागरिका भट्टाचार्य का जुर्म है कि वे अपने तीन साल के बेटे और एक साल की बेटी को गोद में बिठाकर हाथों से खाना खिलाते हैं और अपने साथ ही बिस्तर पर सुलाते हैं।

    बच्चों को मई 2011 में नॉर्वे चाइल्ड प्रोटेक्शन सर्विस ने उनके पैरंट्स से अलग कर दिया है। बच्चों के बिना दोनों की हालत खराब है , भारत सरकार ने इस मामले में नॉर्वे के अधिकारियों से संपर्क किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

    बच्चों के पिता अनुरूप का कहना था कि हमने अधिकारियों से कहा कि यह पूरी तरह से संस्कृति पर आधारित मसला है। हम बच्चों को रात में दूसरे कमरे छोड़कर गुडनाइट कह कर सोने नहीं जा सकते। बच्चों को अपने हाथ से खिलाना भारत में आम बात है। चम्मच से खिलाते समय अक्सर देखा गया है कि मां बच्चों को ज्यादा खाना खिला देती है। लेकिन हम से कहा गया कि हम हाथ से जबर्दस्ती खाना बच्चों के मुंह में डाल रहे थे। सागरिक का कहना था कि मेरा बेटा मेरे पति के साथ सो रहा था। उन्होंने कहा कि बेटे को अलग सोना चाहिए।

    नॉर्वे की चाइल्ड प्रोटेक्टिव सर्विस की सख्ती की दुनिया भर में काफी आलोचना होती है। संयुक्त राष्ट्र अपनी रिपोर्ट में भी इसका जिक्र कर चुका है। बहरहाल , बच्चों के माता - पिता का वीजा मार्च में खत्म हो रहा है लेकिन उन्हें मजबूरन बच्चों के लिए नॉर्वे में रहना पड़ेगा।
    Source : http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/11558566.cms

    5 comments:

    sangita said...

    आज की पोस्ट पर दी गई जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है | यह जानकारी जितनी भी है उसके अनुसार पालक अपने बच्चे की परवरिश ठीक ढंग से नहीं कर पा रहे थे, अत ऐसी कार्यवाही की गई, जिस देश में रहना हो वहाँ के नियमों का पालन करना ही होगा| भारत की बात अलग है कि यहाँ तो सही मायने में लोकतंत्र है जिसकी जैसी मर्जी ऐसा करे|

    Pallavi said...

    हाँ जी यह सच यह समाचार मैंने भी पढ़ा था। इस समाचार को यहाँ पोस्ट करने के लिए आभार

    dheerendra said...

    बहुत सार्थक प्रेरक अभिव्यक्ति,बेहतरीन पोस्ट....
    new post...वाह रे मंहगाई...

    G.N.SHAW said...

    दुःख भरी घटना ! पर यह शर्मादायी है की हम अपना पक्ष दूसरो के सामने रखने में सफल नहीं है !

    Sumit Madan said...

    aisi sarkaar ko aag laga deni chahiye X-(

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • मर्द की एक हकीकत - *[image: Hand writing I Love Me with red marker on transparent wipe board. - stock photo][image: Selfish business man not giving information to others.Mad...
    • एकाकी मोरनी - बाट निहारूँ कब तक अपना जीवन वारूँ आ जाओ प्रिय तुम पर अपना सर्वस हारूँ सूरज डूबा दूर क्षितिज तक हुआ अंधेरा घिरी घटाएं रिमझिम बरसें टूटे जियरा ...
    • क्या दीवाली लक्ष्मी जयन्ती है? - एक मान्यता के अनुसार दीपावली ‘लक्ष्मी जयन्ती’ अर्थात् लक्ष्मी के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। निश्चित ही यह कल्पना अर्वाचीन है, क्योंकि प्राचीन देवताओं...
    • दीवाली इस वर्ष - [image: Happy Diwali and swachchhata abhiyan - pics के लिए चित्र परिणाम] जब ज्योति जली विष्णुप्रिया के मंदिर में तम घटा घर के हर कोने का जगमग मन मंदिर हु...
    • अपनी बचा लूं और दूसरे की रीत दूँ - पहली बार अमेरिका 2007 में जाना हुआ था। केलिफोर्निया में रेड-वुड नामक पेड़ का घना जंगल है। हम मीलों-मील चलते रहे लेकिन जंगल का ओर-छोर नहीं मिला। इस जंगल में...
    • हुनर - *समेट लेना खुद को , अपने दायरे में * *सिखा देता है ये हुनर , वक़्त आहिस्ता आहिस्ता !!* *सु-मन *
    • We never can change our history - Dr Sharad Singh - *Dr Sharad Singh, * *Author & Historian**Thought of the Day* *History give us a chance to change ourselves but we never can change our history.* *- Dr Shar...
    • झूठ की लंका ! - गाँव में समाधान बैठक होने वाली थी और उसमें मंत्रीजी का आना तय था। सरपंच गाँव में माहौल बनाने के लिए लोगों को पहले से स...
    • - * गज़ल * बेवफाई के नाम लिखती हूँ आशिकी पर कलाम लिखती हूँ खत में जब अपना नाम लिखती हूँ मैं हूँ उसकी जिमाम लिखती हूँ आँखों का रंग लाल देखूँ तो उस नज़र को मैं...
    • अँधा युग - गोली और गाली जो बन चुके हैं पर्यायवाची इस अंधे युग की बनकर सौगात लगाते हैं ठिकाने बडबोली जुबान को तुम , तुम्हारी जुबान और तुम्हारी कलम रहन है सत्ता की...
    • नींद बनाम ख्व़ाब - मैंने अपनी नींदें बेच, कुछ ख्वाब खरीदे थे। रख दिया था सहेज कर, उन्हें अपनी पलकों तले। वक़्त की बारिशों औ आंधी से, कुछ उड़ गए, कुछ बह गए। कुछ को बचाया जतन...
    • माँ तुझे प्रणाम - *माँ तुझे प्रणाम* *शत शत नमन कोटि प्रणाम * *माँ तुझे प्रणाम ।* *जब मैं तेरी कोख में आई * *तूने स्पर्श से बताया था * *ममता का कोई मोल नहीं * *तूने ही सि...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -4) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से वे जग जाती हैं,और पुराना जीवन याद करने लगती हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में श...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.