Skip to main content

कोई अंडाणु कैसे आकर्षित करता है किसी शुक्राणु को ? Ovum & Sperm

प्रेगनेन्‍सी से जुडी़ समस्याओं का हल संभव
वैज्ञानिकों ने एक नए शोध में उस खास शर्करा अणु [शुगर सेल] का पता लगाया है, जिससे गर्भधारण की प्रक्रिया के दौरान एक अंडाणु किसी शुक्राणु को अपनी ओर आकिर्षत करता है।
इस नई खोज से गर्भधारण से जुडी दिक्कतों का सामना कर रहे दंपतियों को लाभ मिल सकता है। विज्ञान पत्रिका साइंस के ताजा अंक में प्रकाशित इस शोध में वैज्ञानिकों ने दावा किया कि शर्करा का एक खास किस्म के अणु 'एसलेक्स' की वजह से ही अंडाणु किसी भी शुक्राणु को अपनी तरफ आकिर्षत कर पाता है। इस शोध को अंजाम देने वाले वैज्ञानिकों के दल की सदस्य रहीं ब्रिटेन के इंपीरियल कालेज की एन डेल ने कहा कि इस शोध से नपुंसकता के बारे में सीमित हमारे ज्ञान में इजाफा हुआ है। इससे उन बहुत सी महिलाओं को फायदा मिलेगा जो किसी कारण से गर्भधारण करने में असफल रहती हैं। इस शोध से पहले तक वैज्ञानिक बस इतना ही जानते थे कि जब एक शुक्राणु किसी अंडाणु के निकट पंहुचता है तो उसका प्रोटीन अंडाणु की बाहरी सतह पर मौजूद कुछ खास किस्म की शर्कराओं से क्रिया करता है। जब शर्करा और प्रोटीन एक दूसरे से मिल जाते हैं तो अंडाणु और शुक्राणु एक सूत्र में बंध जाते है और शुक्राणु इसके अंदर मौजूद डीएनए को अंडाणु में निषेचित कर देता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि प्रजनन कर सकने में सक्षम 15 फीसदी वयस्ककों गर्भधारण से जुडी़ समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है। ब्रिटेन में हर सात में से एक दंपति को गर्भधारण से जुडी़ ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिनके बारे में चिकित्सकीय विज्ञान को कुछ भी नहीं पता है।
Source : http://www.livehindustan.com/news/lifestyle/dailydiary/article1-pregnancy-research-50-123-185933.html

Comments

बहुत सुन्दर जानकारी | धन्यवाद|
G.N.SHAW said…
उपयोगी जानकारी !
आपको अग्रिम हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. हमारी "मातृ भाषा" का दिन है तो आज से हम संकल्प करें की हम हमेशा इसकी मान रखेंगें...
आप भी मेरे ब्लाग पर आये और मुझे अपने ब्लागर साथी बनने का मौका दे मुझे ज्वाइन करके या फालो करके आप निचे लिंक में क्लिक करके मेरे ब्लाग्स में पहुच जायेंगे जरुर आये और मेरे रचना पर अपने स्नेह जरुर दर्शाए...
BINDAAS_BAATEN कृपया यहाँ चटका लगाये
MADHUR VAANI कृपया यहाँ चटका लगाये
MITRA-MADHUR कृपया यहाँ चटका लगाये

Popular posts from this blog

माँ बाप की अहमियत और फ़ज़ीलत

मदर्स डे पर विशेष भेंट  इस्लाम में हुक़ूक़ुल ऐबाद की फ़ज़ीलत व अहमियत इंसानी मुआशरे में सबसे ज़्यादा अहम रुक्न ख़ानदान है और ख़ानदान में सबसे ज़्यादा अहमियत वालदैन की है। वालदैन के बाद उनसे मुताल्लिक़ अइज़्जा वा अक़रबा के हुक़ूक़ का दर्जा आता है डाक्टर मोहम्मद उमर फ़ारूक़ क़ुरैशी 1 जून, 2012 (उर्दू से तर्जुमा- समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम) दुनिया के हर मज़हब व मिल्लत की तालीमात का ये मंशा रहा है कि इसके मानने वाले अमन व सलामती के साथ रहें ताकि इंसानी तरक़्क़ी के वसाइल को सही सिम्त में रख कर इंसानों की फ़लाहो बहबूद का काम यकसूई के साथ किया जाय। इस्लाम ने तमाम इंसानों के लिए ऐसे हुक़ूक़ का ताय्युन किया है जिनका अदा करना आसान है लेकिन उनकी अदायगी में ईसार व कुर्बानी ज़रूरी है। ये बात एक तरह का तर्बीयती निज़ाम है जिस पर अमल कर के एक इंसान ना सिर्फ ख़ुद ख़ुश रह सकता है बल्कि दूसरों के लिए भी बाइसे राहत बन सकता है। हुक़ूक़ की दो इक़्साम हैं । हुक़ूक़ुल्लाह और हुक़ूक़ुल ऐबाद। इस्लाम ने जिस क़दर ज़ोर हुक़ूक़ुल ऐबाद पर दिया है इससे ये अमर वाज़ेह हो जाता है कि इन हुक़ूक़ का कितना बुलंद मुक़ाम है और उन...

क्या अपाहिज भ्रूणों को मार देने के बाद भी डाक्टर को मसीहा कहा जा सकता है ? 'Spina Bifida'

मेरी बेटी अनम का नाम हिंदी ब्लॉग जगत के लिए एक जाना पहचाना नाम है। हिंदी ब्लॉग जगत में उसकी उम्र के किसी बच्चे का  इतना चर्चा नहीं हुआ, जितना कि उसका हुआ है। यह ठीक वही वक्त है जब हमने अपनी प्यारी अनम को उसके झूले में मृत पाया था। आज से ठीक एक साल पहले 21 और 22 जुलाई की दरम्यानी रात को जब वह सोई तो हम नहीं जानते थे कि सुबह को उसके पालने से जब हम उसे उठाएंगे तो वह हमें एक बेजान लाश की शक्ल में मिलेगी। महज़ 22 दिन इस दुनिया में रहकर वह चल बसी और अच्छा ही हुआ कि वह चल बसी। 'Spina Bifida' की वजह से वह पैदाइशी तौर पर एक अपाहिज बच्ची थी। उसकी दोनों टांगें बेकार थीं। उसके सिर की हड्डियों के बनने में भी कुछ कमी रह गई थी और उसकी रीढ़ की हड्डी भी तिरछी थी। उसकी पैदाइश से पहले जब लेडी डाक्टर मीनाक्षी राना ने उसकी सेहत को जांचने के लिए अल्ट्रा साउंड करवाया तो ये सब बातें उसकी रिपोर्ट में सामने आ गईं। डाक्टर मीनाक्षी ने कहा कि इस बच्ची को पैदा नहीं होने देना है, यह अपाहिज है और आपके किसी काम की नहीं है। हमने पूछा कि यह ज़िंदा तो है न ? उन्होंने कहा कि हां ज़िंदा तो है। तब हमने कहा कि वह ...

तेरा "वजुद" मुझ में है "माँ"

मैं चुराकर लाई हुं तेरी वो तस्वीर जो हमारे साथ तूने खींचवाई थी मेरे परदेस जाने पर। में चुराकर लाई हुं तेरे हाथों के वो रुमाल जिससे तूं अपना चहेरा पोंछा करती थी। मैं चुराकर लाई हुं वो तेरे कपडे जो तुं पहना करती थी। मैं चुराकर लाई हुं पानी का वो प्याला, जो तु हम सब से अलग छूपाए रख़ती थी। मैं चुराकर लाई हुं वो बिस्तर, जिस पर तूं सोया करती थी। मैं चुराकर लाई हुं कुछ रुपये जिस पर तेरे पान ख़ाई उँगलीयों के नशाँ हैं। मैं चुराकर लाई हुं तेरे सुफ़ेद बाल, जिससे मैं तेरी चोटी बनाया करती थी। जी चाहता है उन सब चीज़ों को चुरा लाउं जिस जिस को तेरी उँगलीयों ने छुआ है। हर दिवार, तेरे बोये हुए पौधे , तेरी तसबीह , तेरे सज़द े , तेरे ख़्वाब , तेरी दवाई , तेरी रज़ाई। यहां तक की तेरी कलाई से उतारी गई वो , सुहागन चुडीयाँ, चुरा लाई हुं “माँ”। घर आकर आईने के सामने अपने को तेरे कपडों में देख़ा तो , मानों आईने के उस पार से तूं बोली , “ बेटी कितनी यादोँ को समेटती...