मैंने माँ की दुआओं का असर है देख लिया ;

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  • Saturday, September 3, 2011
  • by
  • शिखा कौशिक
  • in
  • मैंने माँ की दुआओं का असर है देख लिया ;

    मौत आकर के मेरे पास आज लौट गयी .

    माँ ने सिखलाया है तू रहना मोहब्बत से सदा ;

    याद आते ही सैफ़ नफरतों की टूट गयी .

    जिसने माँ को नहीं बख्शी कभी इज्जत दिल से ;

    ऐसी औलाद की खुशियाँ ही उससे रूठ गयी .

    मिटाया खुद को जिस औलाद की खातिर माँ ने ;

    बेरूखी देख उसकी माँ भी आज टूट गयी .

    कैसे रखते हैं कदम ?माँ ने ही सिखाया था ;

    वो ऐसा दौड़ा की माँ ही पीछे छूट गयी .

    जो आँखें देखकर शैतानियों पर हँसती थी ;

    तेरी नादानियों पर रोई और सूज़ गयी .

    shikha kaushik

    10 comments:

    Roshi said...

    maa ke dard ko acchi yogya aulad hi samaj sakti hai........

    कुश्वंश said...

    वाह शिखाजी श्रेष्ठ उदगार

    शालिनी कौशिक said...

    बहुत सुन्दर व् सच्चाई से भरी.
    श्रमजीवी महिलाओं को लेकर कानूनी जागरूकता
    रहे सब्ज़ाजार,महरे आलमताब भारत वर्ष हमारा

    PuNeeT KuMaR GarG said...

    dil bhar aya hai

    bahut hi unda likha........

    DR. ANWER JAMAL said...

    Nice post .

    जो आँखें देखकर शैतानियों पर हँसती थी ;

    तेरी नादानियों पर रोई और सूज़ गयी .

    शिखा कौशिक said...

    thanks -ROSHI JI ,KUSHVANSH JI ,SHALINI JI ,PUNEET JI & ANWAR JI TO APPRECIATE MY POETRY .

    रज़िया "राज़" said...

    आज बहोत..........दिन बाद आई हूँ यहाँ क्यों की तबियत नासाज थी | opretion करवाना पड़ा था मुझे| आज तबियत ठीक लगी तो कमेन्ट देने आगई
    मैंने माँ की दुआओं का असर है देख लिया ;
    मौत आकर के मेरे पास आज लौट गयी .
    माँ ने सिखलाया है तू रहना मोहब्बत से सदा ;
    याद आते ही सैफ़ नफरतों की टूट गयी .
    बड़ी ही शिक्षा देती लाईनें

    Taqseer Ali said...

    wo rulakar hans na paya der taq
    jab maiN rokar muskuraaya der taq

    bhoolna chaaha agar usko kabhi
    aur bhi wo yaad aaya der taq

    bhookhe bachchoN ki tasalli ke liye
    maa ne phir paani pakaya der taq

    आशा जोगळेकर said...

    कैसे रखते हैं कदम ?माँ ने ही सिखाया था ;

    वो ऐसा दौड़ा की माँ ही पीछे छूट गयी .

    सच कह रही हैं इस दौडती जिंदगी में कितना कुछ पीछे छूट रहा है । अफसोस तो ये है कि उसका अफसोस भी नही है ।

    किसी का दर्द हमें तकलीफ देता है said...

    main roya nahin tha kuch dino se...

    aapki rachna man ko prabhavit karti hai, mera naman swikaar karen.

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