इतना घमंडी बच्चा ! -सुषमा कुमारी

Posted on
  • Saturday, July 16, 2011
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
  • in
  • Labels:
  • मिसेज शर्मा की परेशानी दिनोदिन बढ़ती ही जा रही है। पहले तो मनाने से उनकी बेटी बड़ों के पांव भी छू लेती थी। यही नहीं, गलती हो जाने पर उनसे माफी भी मांग लेती थी, लेकिन पिछले कुछ समय से न जाने क्या हुआ है कि समझाने और मनाने तो दूर, डांटने-फटकारने और यहां तक कि पिटाई करने के बाद भी वह न तो मेहमानों के पांव ही छूती है और न ही अपनी गलती पर उनसे सॉरी कहती है। अगर आप भी अपने बच्चे के ऐसे ही व्यवहार से परेशान हैं, तो संभव है कि वह भी मिसेज शर्मा की बेटी की तरह घमंडी होता जा रहा है।
    अपोलो हॉस्पिटल में क्लीनिकल एंड चाइल्ड साइकोलजिस्ट डॉ. धीरेन्द्र कुमार बच्चों के इस व्यवहार के लिए कई चीजों को जिम्मेदार मानते हैं। अब एकल परिवार का चलन बढ़ा है, जहां बच्चे केवल माता-पिता के साथ बड़े होते हैं। पेरेंट्स बच्चे की उपलब्धियों को अपनी आन-बान से जोड़कर चलने लगते हैं। परिणाम यह होता है कि बच्चे की हर छोटी-बड़ी मांग पूरी की जाती है। धीरे-धीरे बच्चे को इसकी आदत हो जाती है और कुछ समय बाद बच्चे को भी खुद पर गर्व होने लग जाता है कि वे जो चाहते हैं वह पूरा होता जाता है। बच्चों को गर्व और घमंड के बीच का अंतर मालूम नहीं होता।
    क्या करें आप? 
    सबसे पहले आपको यह जानना होगा कि आप उसे अपना प्यारा बच्चा बनाए रखना चाहती हैं या अन्य पेरेंट्स की तरह हर क्षेत्र में अव्वल देखना चाहती हैं। अगर आपका बच्चा आपकी अपेक्षाओं की वजह से घमंडी बन गया है, तो सबसे पहले आपको चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से मिलकर पेरेंटिंग स्किल क्लास लेने की जरूरत है। बच्चे के स्कूल जाकर उसके टीचर्स को यह सुझाव दे सकती हैं कि स्कूल में समय-समय पर लाइफ स्किल्स प्रोग्राम चलाया जाए। बच्चे से बातचीत करें। उन्हें ऐसे लक्ष्य अपनाने की सलाह दें, जिसे आसानी से हासिल किया जा सके। 

    1 comments:

    रविकर said...

    सम्बेदन-शील विषय |
    खूबसूरत प्रस्तुति ||
    बधाई ||

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • आस अभी ज़िंदा है - जब साँझ का धुँधलका हो मन कहीं खोया हुआ हो सूचना होगी ऐसी मन में उदासी भर देगी पर हर वक्त का नकारात्मक सोच जीवन का सुकून हर लेगा यदि दीप जलाने का...
    • कब साकार होगा नशा मुक्त देवभूमि का सपना - जब कोई हमारी प्रकृति की सुरम्य पहाड़ियों की गोद में बसे देवता, ऋषि-मुनियों एवं तपस्वियों की निवास स्थली देवभूमि उत्तराखंड की चर्चाएं मद्यपान के फलते-फूलते क...
    • मैं नदी हूँ - बहती रही अथक निरंतर मैं सदियों से करती रही धरा अभिसिन्चित मैं सदियों से साधना वैद
    • क्या आदमी सच में आदमी है ? - [image: Image result for buffalo with man free images] ''आदमी '' प्रकृति की सर्वोत्कृष्ट कृति है .आदमी को इंसान भी कहते हैं , मानव भी कहते हैं ,इसी कारण आ...
    • तू इसमें रहेगा और यह तुझ में रहेगा - प्रेम में डूबे जोड़े हम सब की नजरों से गुजरे हैं, एक दूजे में खोये, किसी भी आहट से अनजान और किसी की दखल से बेहद दुखी। मुझे लगने लगा है कि मैं भी ऐसी ही प्र...
    • वह जीने लगी है... - अब नहीं होती उसकी आँखे नम जब मिलते हैं अपने अब नहीं भीगतीं उसकी पलके देखकर टूटते सपने। अब नहीं छूटती उसकी रुलाई किसी के उल्हानो से अब नहीं मरती उसकी भूख कि...
    • ये है सरकारी होली :) - सरकार आपको होली तक फ्री राइड करवाएगी फिर वो बस हो ऑटो टैक्सी या फिर मेट्रो क्योंकि यदि नोट लेकर निकले और किसी ने रंग भरा गुब्बारा मार दिया तो आपकी तो बल्ले...
    • तुम और मैं -८ - *.....तुम !* *स्याह लफ्ज़ों में लिपटे ख़यालात हो* *और मैं...* *उन ख़यालों की ताबीर |* *एक एहसास की नज़्म* *आज भी ...* *जिन्दा है तुम्हारे मेरे बीच !!* *सु-म...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • टी-पाट - *टी-पाट* *कहानी-पूनम श्रीवास्तव * *छनाक की तेज आवाज हुयी और उज्ज्वला कुछ लिखते लिखते चौंक पड़ी।फिर बोली क्या हुआ?क्या टूटा ?अ...
    • नया साल ! - समर घर से निकला तो पत्नी और बच्चों के लिए गिफ्ट पहले ही खरीदता हुआ होटल पहुंचा था। रात में प्रोग्राम ख़त्म करके सीधे घर भागेगा क्यो...
    • - * गज़ल * तमन्ना सर फरोशी की लिये आगे खड़ा होता मैं क़िसमत का धनी होता बतन पर गर फना होता अगर माकूल से माहौल में मैं भी पला होता मेरा जीने का मक़सद आसमां से भी ...
    • वेदों में गायन कला - *- डॉ. शरद सिंह* *गायन मानव की संवेदनाओं को जागृत करता है.आज दुनिया भर में संगीत के महत्व पर वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं . पाश्चात्य जगत के व...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -9) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना पुराना जीवन याद करने लगती > हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में > ...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.