Posted on
  • Wednesday, June 29, 2011
  • by
  • Prerna Argal
  • in

  • दुनिया की  रीत
    1

    दुनिया की रीत ही निराली है 
    किसी को फूलों का हार ,किसी को देती गाली है 
    अमीरों को झूक कर सलाम करती है 
    भूंखे  गरीब बच्चे की तरबूज चोरी पर जान ले लेती है 
    स्वार्थी ,मतलब से परिपूर्ण दुनिया हो रही है 
    दुःख-दर्द ,भावनाओं से विहीन,पैसों की गुलाम हो रही है 
    गरीबों की कहीं नहीं सुनवाई  ,अमीरों की बेवजह वाहवाही 
    गरीब जब सब तरफ से परेशान हो जातें हैं 
    तो विद्रोह पर उतर आते हैं

    चोरी,डकेती करने,गुंडे,मवाली बनने
     के लिए मजबूर हो जातें हैं
    धर्म के नाम पर धर्म के ठेकेदार ,देश के नाम पर देश के कर्णधार 
    जब जनता और देश को लूट सकतें हैं 
    तो चोरी,डकेती करने पर सिर्फ गरीबों ही को क्यों
    सजा देते हैं 
    यह दोहरी रीति समझ नहीं आती 
    इंसानों में यह भेद की निराली नीति क्यों है निभाई जाती 
    गरीबों के जीवन में होतीं खुशियाँ कम हैं 
    जमाने द्वारा दिए उनको बहुत से गम हैं 
    पैसे को भगवान् मत बनाओ ,इंसानियत को अपनाओ 
    मतलब,अहम् ,स्वार्थ को भूलकर ,इंसान को गले लगाओ 
    अमीरी,गरीबी किस्मत की बात है ,उसको देखने की एक ही नजर लाओ 
    सबके लिए एक ही नियम  कानून हो ,हेंसियत के अनुसार अलग-२ कानून मत बनाओ 
    गरीब है तो वो भी इंसान है 
    भूंख उसे भी लगती है, दर्द उसे भी होता है 
    उसकी मजबूरी और लाचारी का फयदा मत उठाओ 
    उसकी भी इज्जत है .उसको दुत्कार कर अपने को 
    उसकी नजरों में छोटा मत बनाओ 
    इंसान को उसकी हेंसियत से नहीं 
    उसके कर्मों से अपनाओ 
    सारे भेदभाव को मिटाकर 
    इस जहाँ को और सुंदर बनाओ   

    3 comments:

    शिखा कौशिक said...

    bahut khoob prerna ji .badhai .

    DR. ANWER JAMAL said...

    इंसान को उसकी हेंसियत से नहीं
    उसके कर्मों से अपनाओ
    सारे भेदभाव को मिटाकर
    इस जहाँ को और सुंदर बनाओ


    बहुत ठीक कहा आपने!
    शुक्रिया !!

    शालिनी कौशिक said...

    sateek v sarthak bat kahi hai aapne .aaj aise hi jagruk lekhkon ki aavshyakta hai .badhai .

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • मैं नदी हूँ - बहती रही अथक निरंतर मैं सदियों से करती रही धरा अभिसिन्चित मैं सदियों से साधना वैद
    • क्या आदमी सच में आदमी है ? - [image: Image result for buffalo with man free images] ''आदमी '' प्रकृति की सर्वोत्कृष्ट कृति है .आदमी को इंसान भी कहते हैं , मानव भी कहते हैं ,इसी कारण आ...
    • तू इसमें रहेगा और यह तुझ में रहेगा - प्रेम में डूबे जोड़े हम सब की नजरों से गुजरे हैं, एक दूजे में खोये, किसी भी आहट से अनजान और किसी की दखल से बेहद दुखी। मुझे लगने लगा है कि मैं भी ऐसी ही प्र...
    • वह जीने लगी है... - अब नहीं होती उसकी आँखे नम जब मिलते हैं अपने अब नहीं भीगतीं उसकी पलके देखकर टूटते सपने। अब नहीं छूटती उसकी रुलाई किसी के उल्हानो से अब नहीं मरती उसकी भूख कि...
    • प्राकृतिक अभियंता - तिनके चुन चुन घरोंदा बनाया आने जाने के लिए एक द्वार लगाया मनोयोग से घर को सजाया दरवाजे पर खड़े खड़े अपना घर निहार रही देख दस्तकारी अपनी फूली नहीं सम...
    • ये है सरकारी होली :) - सरकार आपको होली तक फ्री राइड करवाएगी फिर वो बस हो ऑटो टैक्सी या फिर मेट्रो क्योंकि यदि नोट लेकर निकले और किसी ने रंग भरा गुब्बारा मार दिया तो आपकी तो बल्ले...
    • तुम और मैं -८ - *.....तुम !* *स्याह लफ्ज़ों में लिपटे ख़यालात हो* *और मैं...* *उन ख़यालों की ताबीर |* *एक एहसास की नज़्म* *आज भी ...* *जिन्दा है तुम्हारे मेरे बीच !!* *सु-म...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • टी-पाट - *टी-पाट* *कहानी-पूनम श्रीवास्तव * *छनाक की तेज आवाज हुयी और उज्ज्वला कुछ लिखते लिखते चौंक पड़ी।फिर बोली क्या हुआ?क्या टूटा ?अ...
    • नया साल ! - समर घर से निकला तो पत्नी और बच्चों के लिए गिफ्ट पहले ही खरीदता हुआ होटल पहुंचा था। रात में प्रोग्राम ख़त्म करके सीधे घर भागेगा क्यो...
    • - * गज़ल * तमन्ना सर फरोशी की लिये आगे खड़ा होता मैं क़िसमत का धनी होता बतन पर गर फना होता अगर माकूल से माहौल में मैं भी पला होता मेरा जीने का मक़सद आसमां से भी ...
    • वेदों में गायन कला - *- डॉ. शरद सिंह* *गायन मानव की संवेदनाओं को जागृत करता है.आज दुनिया भर में संगीत के महत्व पर वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं . पाश्चात्य जगत के व...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -9) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना पुराना जीवन याद करने लगती > हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में > ...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.