ओ माँ sss प्यारी माँ---

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  • Saturday, February 5, 2011
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  • दर्शन कौर धनोय
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  • बचपन में,  मै अपनी माँ को खो चुकी हु-- अब तो मात्र स्मृतियाँ ही रह गई हे-- 
    अपनी  स्वर्गीय माँ के नाम एक प्यार भरी चिठ्ठी ----
    ओsssमाँ --प्यारी माँ ---
    ओ माँ --मै धरती वासी --
    तू परलोक  निवासी --
    तू प्यार की मूरत --
    मै प्यार की प्यासी --
    कहाँ से लाऊ वो स्नेह --
    किससे मांगू ममता उधार --
    ओsss माँ -प्यारी माँ ---
    काश ,के तू होती माँ --
    मेरे संग हंसती -खेलती-बोलती  माँ --
    मेंरे नैनो के नीर अपने पल्ले से पोछती माँ--
    मै जब -जब गिरती --
    तू तब-तब सम्भालती माँ --
    रातो को जागकर मुझे लोरी सुनाती माँ  --
    कभी सहलाती ,कभी सीने से लगाती माँ --
    माँ sss प्यारी माँ ---
    तुझे याद कर के मेरा  चुप -चुप के रोना --
    तकिए  में सिर छुपाए तुझे महसूस करना --
    अपनी  किसी गलती पर तेरा मुस्कुराना --
    अपनी नादानियो पर तेरा मुंह फिराना --
    फिर ,अपनी बेबसी पर तेरा खिलखिलाना --
    मुझे याद हे वो नकली गुस्सा दिखाना --
    माँ sss प्यारी माँ ---
    अब तो आजा --यह विरह जीवन मुझे काटता हे --
    इस  धधकती मरु भूमि में,मै भटक रही हु --
    तेरे  प्यार की एक - एक बूंद को तरस  रही हु --
    तू  मृग-तृष्णा न बन --
    मेरे   मन- हिरन को अब ,तेरा ही इन्तजार हे 
    ओ माँ sss  प्यारी माँ--- 

    4 comments:

    वन्दना said...

    समझ सकती हूँ उस अहसास को जो माँ के बिना एक बच्चे के जीवन मे होता है और उसे कोई पूरा नही कर सकता …………उस अहसास को बहुत ही सुन्दरता से उकेरा है।

    Anjana (Gudia) said...

    मेरे संग हंसती -खेलती-बोलती माँ --
    मेंरे नैनो के नीर अपने पल्ले से पोछती माँ--
    मै जब -जब गिरती --
    तू तब-तब सम्भालती माँ --
    रातो को जागकर मुझे लोरी सुनाती माँ --
    कभी सहलाती ,कभी सीने से लगाती माँ --
    माँ sss प्यारी माँ ---

    kya kahun koi shabd nahi soojh rahe..... sirf aapke dil ka thoda sa dard mehsoos kar paa rahi hoon...

    DR. ANWER JAMAL said...

    समझो कि सिर्फ़ जिस्म है और जाँ नहीं रही
    वो शख़्स जो कि ज़िन्दा है और माँ नहीं रही

    Nice post.

    @ दर्शन कौर जी ! एक अच्छी पोस्ट के साथ आपकी ख़ुशगवार आमद का हम इस्तक़बाल करते हैं ।
    Welcome .

    दर्शन कौर धनोए said...

    @ सही कहा आपने अनवर सा. माँ के बगेर जग सूना हे

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