तुम होती तो कहती !

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  • Tuesday, February 8, 2011
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  • दर्शन कौर धनोय
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  • जब-जब आंसू भरे आँखों में |
    तब-तब कमी तुम्हारी खटकी माँ,
    काश ! कि तुम  होती तो कहती ---
    मोती व्यर्थ लुटाओ न ----?


                          जब -जब  गायन के सुर साघे |
                          जब -जब तन्मय हो तान उठाई |
                          तब -तब कमी तुम्हारी खटकी माँ,
                          काश ! कि तुम होती तो कहती---
                          इक बार फिर से गाओ न ---?

                                       जब -जब गीत बनाया कोई--|
                                जब-जब सस्वर पाठ किया --|
                                    तब-तब कमी तुम्हारी खटकी माँ,
                                     काश ! कि तुम होती तो कहती ---
                                बेटा ,फिर से दोहराओ  न ---?

    6 comments:

    रश्मि प्रभा... said...

    माँ जीवन का सम्पूर्ण आधार होती है... प्रेरणा, प्रशंसा , दुलार माँ के पर्यायवाची शब्द हैं

    क्रिएटिव मंच-Creative Manch said...

    जब-जब आंसू भरे आँखों में |
    तब-तब कमी तुम्हारी खटकी माँ,
    काश ! कि तुम होती तो कहती ---
    मोती व्यर्थ लुटाओ न ----?

    बहुत ही सुन्दर
    माँ को समर्पित यह रचना बेहद अच्छी लगी
    आभार

    DR. ANWER JAMAL said...

    मेरे बुजुर्गों का साया था जब तलक मुझ पर
    मैं अपनी उम्र से छोटा दिखाई देता था

    आपकी रचना मैंने अपनी वाइफ़ को पढ़कर सुनाई तो वह बोलीं कि
    'इंसान को माँ की जरूरत हर उम्र में रहती है '
    सन 1997 में ईद के दिन उनकी वालिदा मोहतरमा का कैंसर की बीमारी से इंतक़ाल हो गया था । उनके 2 छोटी बहनें और एक छोटा भाई है जिसकी वजह से उनके वालिद साहब को 2 महीने बाद ही दिल्ली की एक तलाक़शुदा औरत से शादी करनी पड़ी और फिर वे अपनी बेटी की शादी मुझसे करके वापस Riyadh चले गए। वे पहले से ही वहीं रहते थे और यहाँ केवल अपनी बेटी की शादी करने के लिए आए थे ।

    दर्शन कौर धनोए said...

    डॉ. सा,आपकी पत्नी ने ठीक कहा हे इन्सान को हर उम्र में माँ की जरूरत पडती हे -- मै जब महज ११ साल की थी तभी मेरी भी माँ का इंतकाल हो गया था -मेरा एक भाई ९ साल का और दूसरा केवल ७ साल का था --हमारे पिता ने दूसरी शादी नही की क्योकि हमारी दादी जिन्दा थी --कुछ साल वो रही हमारे साथ --फिर तो अकेला ही जीवन था बस गुजर गया --पर माँ के बिछोह का जो गम था वो कभी न भर सका न भर सकता हे !

    सदा said...

    काश ! कि तुम होती तो कहती ---
    बेटा ,फिर से दोहराओ न ---?

    बहुत ही भावमय करते शब्‍द ।

    HAKEEM YUNUS KHAN said...

    nice post.

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