बोलो माँ,बोलो !!!

Posted on
  • Tuesday, February 22, 2011
  • by
  • रश्मि प्रभा...
  • in
  • माँ,अब क्या करोगी?
    कैसे लौटाओगी मुझे
    उन रास्तों पर,
    जो मेरे नहीं थे........
    तुम भ्रम का विश्वास देती रही,
    जिसे मैं सच्चाई से जीती गई...
    जब भी ठेस लगी,
    तुमने कहा-'जाने दो,
    जो हुआ -यूँ ही हुआ'
    ये 'यूँ ही' मेरे साथ क्यों होता है!
    तुमने जिन रिश्तों की अहमियत बताई,
    उन्होंने मुझे कुछ नहीं माना......
    मैं तो एक साधन- मात्र थी माँ
    कर्तव्यों की रास से छूटकर
    जब भी अधिकार चाहा
    खाली हाथ रह गई....
    फिर भी,
    तुम सपने सजाती गई,
    और मैं खुश होती गई..........
    पर झूठे सपने नहीं ठहरते
    चीख बनकर गले में अवरुद्ध हो जाते हें
    और कभी बूँद-बूँद आंखों से बह जाते हें!
    इतनी चीखें अन्दर दबकर रह गईं
    कि, दिल भर गया
    इतने आंसू -कि,
    उसका मूल्य अर्थहीन हो गया........
    माँ,
    ज़माना बदल गया है,
    जो हँसते थे तुम्हारे सपनों पर
    वे उन्हीं सपनों को लेकर चलने लगे हें
    पर कुछ इस तरह,
    मानों सपने सिर्फ़ उनके लिए बने थे.........
    माँ,
    मैंने तुमसे बहुत प्यार किया है,
    और माँ,
    मैं इस प्यार में जीती हूँ
    पर माँ,
    मैं तुम्हारे झूठे भ्रम को
    अब अपनी पलकों में नहीं सजा पाउंगी,
    तुम जो जोड़ने का सूत्र उठाती हो
    उसे छूने का दिल नहीं होता........
    लोग जीत गए माँ,
    मेरा मिसरीवाला घर तोड़ गए
    मैं ख़ुद नहीं जानती,
    मैं कहाँ खो गई......
    माँ,
    अब तुम क्या करोगी?
    कैसे लौटाकर लाओगी मुझे?
    बोलो माँ, बोलो!!!

    5 comments:

    Anjana (Gudia) said...

    shaayad kabhi kabhi bhram tootna hi achcha hota hai... par bahut dard hota hai... magar agar maa ne kal wo sapna nahi dekha hota aur aapne us sapne ko jeene ki koshish nahi ki hoti to aaj kisi ke liye bhi wo poora nahi hua hota

    POOJA... said...

    इन सवालों का जवाब भी माँ के ही पास होगा... वो फ़िर से "जाने दो" कहकर समझा देगी...
    बहुत प्यारी रचना...

    Roshi said...

    har saval ka jabab maa ke paas hota hai

    DR. ANWER JAMAL said...

    पोंछकर आँसू दुपट्टे से , छुपाकर दर्द को
    ले के इक तूफ़ान बेटी से लिपट जाती है माँ

    चूमकर माथा , कभी सर और कभी देकर दुआ
    कुछ उसूले ज़िंदगी बेटी को समझाती है माँ

    सदा said...

    जो हुआ -यूँ ही हुआ'
    ये 'यूँ ही' मेरे साथ क्यों होता है!

    बेटी के यह सवाल मां को विचलित कर जाते हैं ...यह सब उनकी लाडली के साथ ही क्‍यों हुआ गहन भावों के साथ सशक्‍त प्रस्‍तुति ।

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • विश्वास - ‘विश्वास’ कितना आभासी है ना यह शब्द ! कितना क्षणिक, कितना छलनामय, कितना भ्रामक ! विश्वास के जिस धागे से बाँध कर कल्पना की पतंग को आसमान की ऊँच...
    • राजीव गांधी :अब केवल यादों में - शत शत नमन - एक नमन राजीव जी को आज उनकी जयंती के अवसर पर.राजीव जी बचपन से हमारे प्रिय नेता रहे आज भी याद है कि इंदिरा जी के निधन के समय हम सभी कैसे चाह रहे थे कि ...
    • हमें अपनी झील के आकर्षण में बंधे रहना है - #हिन्दी_ब्लागिंग मैं कहीं अटक गयी हूँ, मुझे जीवन का छोर दिखायी नहीं दे रहा है। मैं उस पेड़ को निहार रही हूँ जहाँ पक्षी आ रहे हैं, बसेरा बना रहे हैं। कहाँ ...
    • शापित मंजिलें - *... स्थितियाँ * *बदल देती हैं * *राह जिंदगी की ...* *... मंजिलें* *अक्सर अकेली रह * *शापित हो जाया करती हैं !!* *सु-मन *
    • बातें हैं बातों का क्या ....... - अम्बुआ की डाली पर चाहे न कुहुके कोयल किसी अलसाई शाम से चाहे न हो गुफ्तगू कोई बेनामी ख़त चाहे किसी चौराहे पर क्यों न पढ़ लिया जाए ज़िन्दगी का कोई नया शब्दक...
    • केवल राष्ट्र के लिए था यह सृजन - देश की स्वतंत्रता के लिए 1857 से लेकर 1947 तक क्रान्तिकारियों व आंदोलनकारियों के साथ ही लेखकों, कवियों और पत्रकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय...
    • कृष्ण लीला - ग्वाल बाल साथ ले कान्हा ने धूम मचाई गोकुल की गलियों में ! खिड़की खुली थी घर में छलांग लगाई खाया नवनीत खिलाया मित्रों को भी कुछ खाया कुछ फैलाया आहट ...
    • नींद बनाम ख्व़ाब - मैंने अपनी नींदें बेच, कुछ ख्वाब खरीदे थे। रख दिया था सहेज कर, उन्हें अपनी पलकों तले। वक़्त की बारिशों औ आंधी से, कुछ उड़ गए, कुछ बह गए। कुछ को बचाया जतन...
    • - गज़ल 1 मुहब्बत से रिश्ता बनाया गया उसे टूटते रोज पाया गया मुहब्बत पे उसकी उठी अँगुलियाँ सरे बज़्म रुसवा कराया गया यहाँ झूठ बिकता बड़े भाव पर मगर सच को ठेंगा द...
    • माँ तुझे प्रणाम - *माँ तुझे प्रणाम* *शत शत नमन कोटि प्रणाम * *माँ तुझे प्रणाम ।* *जब मैं तेरी कोख में आई * *तूने स्पर्श से बताया था * *ममता का कोई मोल नहीं * *तूने ही सि...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • नया साल ! - समर घर से निकला तो पत्नी और बच्चों के लिए गिफ्ट पहले ही खरीदता हुआ होटल पहुंचा था। रात में प्रोग्राम ख़त्म करके सीधे घर भागेगा क्यो...
    • वेदों में गायन कला - *- डॉ. शरद सिंह* *गायन मानव की संवेदनाओं को जागृत करता है.आज दुनिया भर में संगीत के महत्व पर वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं . पाश्चात्य जगत के व...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -9) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना पुराना जीवन याद करने लगती > हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में > ...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.