माँ

Posted on
  • Thursday, January 27, 2011
  • by
  • Minakshi Pant
  • in
  • Labels:
  •                                         
    मेरे मालिक तेरा हमपे ये करम हो गया !
    तूने अपनी जगह माँ का जो हमको साथ दिया !
     तू भी जानता  था की अकेले तो हम न रह पाएँगे !
    इसलिए चुपके से माँ बनके हाथ थाम लिया !
    जिंदगी के हर पल में उसने हमारा साथ दिया !
    इसलिए जब दर्द  उठा तो माँ का ही जुबाँ ने नाम लिया !
    माँ ने तेरा ये  काम बहुत खूबसूरती से कर  दिया !
    तेरी ही तरह हम सबको अपना गुलाम कर दिया !
    दोनों के एहसानों को तो अलग ना हम कर पाएंगे !
    इसलिए उससे लिपट कर तेरे और करीब हम आ जायेंगे ! 

    9 comments:

    Anjana (Gudia) said...

    दोनों के एहसानों को तो अलग ना हम कर पाएंगे !
    इसलिए उससे लिपट कर तेरे और करीब हम आ जायेंगे !

    sach hai. bahot khoobsurat!

    ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

    अति सुंदर।

    ---------
    हिन्‍दी के सर्वाधिक चर्चित ब्‍लॉग!

    DR. ANWER JAMAL said...

    'वाह'
    माँ कि शान को बयान करने कि एक सुन्दर कोशिश .
    @ मीनाक्षी जी ! इस प्यारे ब्लाग पर अपनी पहली रचना पेश करने के लिए आपको धन्यवाद.
    नोट : कृपया सभी सदस्यगण ध्ज्ञान दें कि पोस्ट पब्लिश करने के बाद 'हमारी वाणी' के लोगो पर ज़रूर क्लिक करें ताकि पोस्ट हमारी वाणी पर भी पब्लिश हो जाए और आपका प्यारा सन्देश ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचे .

    DR. ANWER JAMAL said...

    @ पूजा जी ! प्यारी माँ के खिदमतगारों में आपका स्वागत है तहे दिल से .

    निर्मला कपिला said...

    माँ के लिये अति सुन्दर अभिव्यक्ति। धन्यवाद।

    शेखचिल्ली का बाप said...

    @ जनाब अनवर साहब ! हमारा ब्लाग क्यों न जोड़ा आपने अपने एग्रीगेटर में ?
    क्या इसलिए कि हम 2011 के खिलाफ क्यों बोले ?

    शेखचिल्ली का बाप said...

    पोस्ट अच्छी लगी , शुक्रिया सभी का । ब्लाग भी अच्छा लगा और इसका आयडिया भी।

    POOJA... said...

    बहुत ही प्यारी रचना... वाह...

    Minakshi Pant said...

    ये एक छोटी सी कोशिश थी वेसे माँ के बारे मे जितना भी कहो उतना कम ही है , पर आप सबके प्यार ने हमारी और बेहतर लिखने की हिम्मत मै इजाफा कर दिया !

    आप सबकी मै शुक्रगुज़ार हूँ !

    धन्यवाद !

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • मर्द की एक हकीकत - *[image: Hand writing I Love Me with red marker on transparent wipe board. - stock photo][image: Selfish business man not giving information to others.Mad...
    • एकाकी मोरनी - बाट निहारूँ कब तक अपना जीवन वारूँ आ जाओ प्रिय तुम पर अपना सर्वस हारूँ सूरज डूबा दूर क्षितिज तक हुआ अंधेरा घिरी घटाएं रिमझिम बरसें टूटे जियरा ...
    • क्या दीवाली लक्ष्मी जयन्ती है? - एक मान्यता के अनुसार दीपावली ‘लक्ष्मी जयन्ती’ अर्थात् लक्ष्मी के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। निश्चित ही यह कल्पना अर्वाचीन है, क्योंकि प्राचीन देवताओं...
    • दीवाली इस वर्ष - [image: Happy Diwali and swachchhata abhiyan - pics के लिए चित्र परिणाम] जब ज्योति जली विष्णुप्रिया के मंदिर में तम घटा घर के हर कोने का जगमग मन मंदिर हु...
    • अपनी बचा लूं और दूसरे की रीत दूँ - पहली बार अमेरिका 2007 में जाना हुआ था। केलिफोर्निया में रेड-वुड नामक पेड़ का घना जंगल है। हम मीलों-मील चलते रहे लेकिन जंगल का ओर-छोर नहीं मिला। इस जंगल में...
    • हुनर - *समेट लेना खुद को , अपने दायरे में * *सिखा देता है ये हुनर , वक़्त आहिस्ता आहिस्ता !!* *सु-मन *
    • We never can change our history - Dr Sharad Singh - *Dr Sharad Singh, * *Author & Historian**Thought of the Day* *History give us a chance to change ourselves but we never can change our history.* *- Dr Shar...
    • झूठ की लंका ! - गाँव में समाधान बैठक होने वाली थी और उसमें मंत्रीजी का आना तय था। सरपंच गाँव में माहौल बनाने के लिए लोगों को पहले से स...
    • - * गज़ल * बेवफाई के नाम लिखती हूँ आशिकी पर कलाम लिखती हूँ खत में जब अपना नाम लिखती हूँ मैं हूँ उसकी जिमाम लिखती हूँ आँखों का रंग लाल देखूँ तो उस नज़र को मैं...
    • अँधा युग - गोली और गाली जो बन चुके हैं पर्यायवाची इस अंधे युग की बनकर सौगात लगाते हैं ठिकाने बडबोली जुबान को तुम , तुम्हारी जुबान और तुम्हारी कलम रहन है सत्ता की...
    • नींद बनाम ख्व़ाब - मैंने अपनी नींदें बेच, कुछ ख्वाब खरीदे थे। रख दिया था सहेज कर, उन्हें अपनी पलकों तले। वक़्त की बारिशों औ आंधी से, कुछ उड़ गए, कुछ बह गए। कुछ को बचाया जतन...
    • माँ तुझे प्रणाम - *माँ तुझे प्रणाम* *शत शत नमन कोटि प्रणाम * *माँ तुझे प्रणाम ।* *जब मैं तेरी कोख में आई * *तूने स्पर्श से बताया था * *ममता का कोई मोल नहीं * *तूने ही सि...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -4) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से वे जग जाती हैं,और पुराना जीवन याद करने लगती हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में श...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.