उकसावे पर बेटे की हत्या को हत्या नहीं माना कोर्ट ने

Posted on
  • Saturday, February 11, 2012
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
  • in
  • मदुरै ।। मदास उच्च न्यायालय ने बेटे की हत्या के मामले में 60 साल की विधवा को निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को छह वर्ष के सश्रम कारावास में तब्दील कर दिया है। साथ ही अदालत ने कहा कि इसे हत्या करार नहीं दिया जा सकता,क्योंकि मां की देखभाल करने से लगातार इनकार करते आ रहे बेटे के उकसाने पर महिला ने यह कदम उठाया।

    तिरूनेलवेली जिले के अगस्थियारपुरम की निवासी एम पूवाम्मल की आपराधिक याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए अदालत की मदुरै पीठ ने इस मामले को गैर इरादतन हत्या में तब्दील कर दिया। इस महिला ने निचली अदालत द्वारा उसे दी गई सजा को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

    अभियोजन पक्ष के अनुसार, पूवाम्मल का बेटा एम देवेन्द्रन अपने विवाह के बाद से ही पत्नी के साथ अपनी ससुराल में रह रहा था। पांच अक्तूबर 2007 को अपने पति की मौत के बाद पूवाम्मल ने बहू-बेटे पर अपने साथ रहने के लिए दबाव डाला। लेकिन जब देवेन्द्रन ने उसकी अपील नहीं सुनी तो पूवाम्मल को गुस्सा आ गया और उसने 23 अक्तूबर 2007 को उस पर कुल्हाड़ी से वार किया। बाद में उसने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया और आत्महत्या की कोशिश में खुद को घायल कर लिया।

    हाई कोर्ट के मुताबिक इस मामले में पूवाम्मल की ओर से कोई सोची-समझी चाल नहीं थी। उसने गुस्से में अचानक कुल्हाड़ी उठाई। यह स्थिति उसके बेटे ने पैदा की थी। घटना के बाद उसकी पहली प्रतिक्रिया खुद को मारने की थी।
    Source : http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/11849279.cms

    2 comments:

    Shanti Garg said...

    लाजबाब प्रस्तुतीकरण..

    sangita said...

    behtarin

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